पाकिस्तान को सता रहा काली सूची में डाले जाने का डर

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आतंक को अपने जमीन पर पनाह देने वाला पाकिस्तान, आज कल खुद आतंकवाद से जुड़े मसले को लेकर काफी डरा हुआ है| दरअसल, आतंकवद के मसले में वैश्विक स्तर पर घिरे पाकिस्तान को अब इस बात का डर सता रहा है कि कहीं उस पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध ना लगा दिए जाए| इस मामले को लेकर पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने कहा है कि भारत की पैरवी के चलते फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) उनके मुल्क को काली सूची में डाल सकता है। कुरैशी ने इसमें आगे जोड़ते हुए कहा, पाकिस्तान को अगर ग्रे लिस्ट यानी निगरानी सूची में भी कायम रखा जाता है तो देश को सालाना दस अरब डॉलर (करीब 69 हजार करोड़ रुपये) का नुकसान हो सकता है। मालूम हो कि पाकिस्तान फ़िलहाल ग्रे लिस्ट में ही लिस्टेड है|

इस सन्दर्भ में सोमवार शाम को कुरैशी ने लाहौर में कहा कि, ‘अगर पाकिस्तान को एफएटीएफ द्वारा काली सूची में डाला जाता है तो इससे होने वाले सालाना नुकसान का विदेश विभाग आकलन कर रहा है। भारत इसके लिए लॉबिंग कर रहा है। सरकार का आकलन है कि अगर पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में भी बरकरार रखा जाता तो सालाना दस अरब डॉलर का नुकसान होगा।’

इससे पहले 14 फरवरी को जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान को वैश्विक स्तर पर दबाव का सामना करना पड़ रहा है। हमले होने के कुछ ही समय बाद, इस हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तान से संचालित आतंकी संगठन जैश-ए-मुहम्मद ने ले ली थी। आतंकी घटना के बाद एफएटीएफ के विशेषज्ञों के एक दल ने यह समीक्षा करने के लिए पाकिस्तान का दौरा किया था कि यह मुल्क ग्रे लिस्ट से निकलने के लिए वैश्विक मानकों के अनुरूप पर्याप्त प्रगति कर रहा है या नहीं। समीक्षा करने के लिए गए विशेषज्ञों के एक दल ने बीतें मार्च महीने में प्रतिबंधित आठ संगठनों के खिलाफ जमीनी कार्रवाई को लेकर सवाल खड़े किए थे। समीक्षा के लिए गए विशेषज्ञों के दल के सदस्यों का कहना था कि, प्रतिबंधित संगठनों की अब तक जांच तक नहीं की गई है। वे अब भी धन एकत्र कर रहे हैं और रैलियां कर रहे हैं। लिहाजा सदस्यों द्वारा इस तरह के गंभीर सवाल उठाये जाने के बाद पाकिस्तान को डर सता रहा है कि कहीं उस पर अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबन्ध न लग जाये|

ग्रे-लिस्ट क्या है?

ग्रे लिस्ट में उन देशो को रखा जाता है, जिनके कानून को मनी लांड्रिंग और आतंकी फंडिंग से निपटने में कमजोर माना जाता है।

एफटीएफ क्या है?

दरअसल, एफटीएफ एक अंतर सरकारी संगठन है, जो मनी लांड्रिंग और आतंकवाद के वित्तपोषण को रोकने की दिशा में काम करता है। इसकी स्थापना जी-7 देशों की पहल पर 1989 में की गयी थी|