संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में फिर मुंह की खाया पाक और ड्रैगन

एक बार फिर से पाकिस्तान और चीन को मुंह की खानी पड़ी है। इन दोनो ने मिल कर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में जम्मू कश्मीर के मुद्दे को एक बार फिर से ‘अंतर्राष्ट्रीय मसला’ बनाने की कोशिश की लेकिन अमेरिका ने एक बार फिर से इनके मनसूबे पर पानी फेर दिया तो भारत ने भी सख्त लहजे में दोनो देशों को अपना संदेश दिया।

अमेरिका ने पाक, चीन को दिया फिर झटका

कश्मीर मुद्दे पर कई बार मात खा चुका पाक और चीन को एक बार फिर से झटका मिला है। संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद की बंद कमरे में हुई बैठक जो  अनौपचारिक थी। यानी इस बैठक का न तो कोई  रेकॉर्ड रखा गया और न ही कोई परिणाम  निकला। लगभग सभी देशों ने माना कि जम्‍मू-कश्‍मीर एक द्विपक्षीय मसला है और सुरक्षा परिषद के समय और ध्‍यान का हकदार नहीं है।’ सूत्रों के मुताबिक जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के पहली वर्षगांठ पर पाकिस्तान ने इस मसले को सुरक्षा परिषद में उठाने की चाल चली थी। लद्दाख को केंद्र प्रशासित प्रदेश बनाने के फैसले और एलएसी पर भारत के कड़क रूख से बौखलाया चीन भी अपने सदाबहार दोस्त की चाल में शामिल हो गया। सुरक्षा परिषद की बंद कमरे में अनौपचारिक बैठक हुई। इस बैठक में अमेरिका के नेतृत्व में कई सदस्य देशों ने चीन के प्रस्ताव का विरोध किया और साफ कर दिया कि जम्मू- कश्मीर भारत पाकिस्तान के बीच का द्विपक्षीय मामला है, जिसे इस फोरम पर नहीं उठाया जा सकता। इसके बाद चर्चा बिना बगैर किसी निष्कर्ष के खत्म कर दी गई। चीन इससे पहले जनवरी में भी इसी प्रकार का एक प्रस्ताव सुरक्षा परिषद में लाने की कोशिश कर चुका है, जिसमें उसे मुंह की खानी पड़ी थी और प्रस्ताव बिना किसी निष्कर्ष के रद्द कर दिया गया था।

भारत का दो टूक जवाब 

जम्‍मू-कश्‍मीर के मुद्दे पर चीन के पाकिस्‍तान का साथ देने पर भारत ने करारा जवाब दिया है। भारत ने चीन को कड़े शब्दों में चेताते हुए कहा कि वो आंतरिक मामलों में दखल न दे। हम चीन के हमारे आंतरिक मामले में हस्‍तक्षेप को पूरजोर तरीके से खारिज करते हैं। भारत ने अपने बयान में कहा कि हमें चीन की उस हरकत के बारे में पता चला, जिसमें उसने भारत के केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर यूएनएससी में बातचीत की। ये पहली बार नहीं है, कि चीन ने इस मामले को उठाया हो, जो पूरी तरह से भारत का आंतरिक मामला है, हालांकि हर बार की तरह इस बार भी चीन को अंतर्राष्ट्रीय बिरादरी का सहयोग नहीं मिला, हमने भारत के आंतरिक मामले में दखल देने की चीन की कोशिशों को नाकाम कर दिया है।

कुल मिलाकर पाक और उसके साथी चीन को अब भारत की ताकत का ऐहसास हो गया होगा वो ये अच्छी तरह से समझ गये होंगे कि भारत के खिलाफ कितना भी झूठ वो क्यों न बोले लेकिन उनकी दाल दुनिया में नही गलने वाली।