मोदी के खिलाफ भानुमती का नया कुनबा तैयार करता विपक्ष

आजादी के बाद से भारतीय राजनीति ने कई दौर देखे हैं, एक ही दल की कई सालों तक सरकार देखी है तो उसे उखाड़ने के लिये सम्पूर्ण क्रांति के वक्त से भी रूबरू हुआ है। लेकिन आज की सियासत में हिंदुस्तान एक नया दौर देख रहा है जिसे भानुमती का कुनबा बोला जा सकता है। पीएम मोदी के खिलाफ विपक्ष एकजुट होने का ड्रामा तो कर रही है लेकिन कही ना कही उसमें विवाद भी देखा जा सकता है।

विपक्ष का वही हाल: दोस्ती और दुश्मनी साथ में

आजकल देश का विपक्ष एक नया गठबंधन बनाने में लगा हुआ है। वो चाहता है कि इस गठबंधन के दम पर वो मोदी सरकार पर ब्रेक लगा सकती है। वैसे ऐसा प्रयास पहले भी तीसरे मोर्चे के दौरान की गई थी जो कुछ दिन बाद विभाजित हो गया जिससे ये पता चलता है कि ये सिर्फ सियासत में लौटने के लिये अवसरवादियों का एक कुनबा है जो अपने हित के लिये एक हो रहा है हालांकि अभी से ही इसमे दरार देखने को मिल रही है। हर पार्टी के नेता को अपना कद सबसे बड़ा दिख रहा है और वो दूसरे नेता के पीछे उनपर तंज कसती हुई नजर आ रही है। कोई बोल रहा है कि कुछ लोग विदेश ही घूमते रहते है तो कुछ लोग बोल रहे है कि बिना हमारे सरकार कोई नहीं बना सकता है जिससे ये साफ होता है कि अभी से जब इतना मनभेद है तो आगे क्या होगा।

पीएम मोदी द्वारा किये गये विकास का भी देना होगा जवाब

दूसरी तरफ पीएम मोदी से भिड़ंत के पहले पीएम मोदी के किये कार्यों का भी जवाब होना चाहिये। मजे की बात यही है कि विपक्ष एक तरफ अभी सिर्फ एकजुट होने की कवायद में जुटा है तो मोदी सरकार हर दिन जनता के लिये कोई ना कोई काम करने में जुटी हुई है। जबकि मोदी सरकार लगातार विकास के नये नये योजना को जारी भी कर रहे है। ऐसे में एक तरफ 7 सालों में देश में हुआ परिवर्तन तो दूसरी तरफ मोदी जी जैसा नेता देश की जनता भी इस बात को ध्यान में रखकर वोट करेगी।

ऐसे में ये तो तय है कि 2024 का चुनावी रण इस बार जरूर बदला हुआ होगा। लेकिन अभी से मोदी जी एक रण तो जीत चुके है कि इस बार भी चुनाव मोदी बनाम और होगा और जिसमें देखने वाली बात ये होगी कि विपक्ष से आया हुआ नाम कितना लोकप्रिय और जनता के करीब होगा। क्योकि मोदी जी इस मामले में इस वक्त देश में नबंर वन हैं।