कोरोना को धूल चटाने के लिये भारतीय फौज ने छेड़ा महायुध्द

देश पर जब-जब कोई विपदा आती है,तब तब सेना सबसे आगे आकर मोर्चा संभालती है और देश के लिए संकटमोचन की भूमिका में होती है। भारतीय सेना ने कोरोना के खिलाफ ऑपरेशन नमस्तेछेड़ दिया है। ये सब जानते है कि जब देश की सेना कोई ऑपरेशन छेड़ती है तो फिर वो आपदा देश से भाग ही जाती है। निकट के वक्त में सेना के कुछ खास ऑपरेशन के बारे में हम आपको बताते है ।

कोरोना के खिलाफ ऑपरेशन नमस्ते

देश में इस वक्त कोरोना वायरस एक ऐसी आपदा बनकर उभरी है कि इससे सभी परेशान है लेकिन अब हमारी सेना ने इसके खिलाफ जंग का ऐलान कर दिया है। आर्मी चीफ ने कहा कि सेना ने पहले भी सभी अभियानों में सफलता पाई थी और ऑपरेशन नमस्ते को भी सफलतापूर्वक अंजाम देगी। सेना की ओर से देशभर में अब तक आठ क्वारेंटाइन सेंटर्स स्थापित किए जा चुके हैं। सेना की ओर से हेल्प लाइन नंबर भी जारी किया गया है। इसके लिए सेना के साउथ कमांड, ईस्टर्न कमांड, वेस्टर्न कमांड, सेंट्रल कमांड, नॉदर्न कमांड, साउथ वेस्टर्न कमांड और दिल्ली हेडक्वॉर्टर में कोरोना हेल्प लाइन सेंटर्स बनाए गए हैं। इसके जरिए कोरोना वायरस की चपेट में आए लोगों की मदद की जाएगी। साथ ही, आम नागरिकों को इस संकट से जुड़ी जानकारियां भी दी जाएंगी।

 

पाक के खिलाफ ऑपरेशन पराक्रम 

दिसंबर 2001 में संसद पर हमले में पाकिस्तान के हाथ होने के कुछ अहम सबूत मिले तो भारत ने उसके खिलाफ ऑपरेशन पराक्रम चलाया था। तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने सेना को सीमा की ओर कूच करने का आदेश दिया था और दिसंबर 2001 से जून 2002 तक भारत और पाकिस्तान दोनों देशों की सेना धीरे-धीरे नियंत्रण रेखा की ओर बढ़ती रही। इसका असर यह हुआ कि पाकिस्तानी सेना ने दबाव में आकर आतंकवादी समूहों को समर्थन देना बंद कर दिया। आर्मी चीफ नरवणे ने इसी का उदाहरण देते हुए बताया कि तब भी सेना के जवान लंबे वक्त तक छुट्टियों पर नहीं गए थे। ऑपरेशन नमस्ते में भी सेना के सभी जवानों को 24 घंटे मुस्तैद रहने को कहा गया है और सभी की छुट्टी खत्म कर दी गई है। 

केदारनाथ आपदा के वक्त ऑपरेशन सूर्य होप

16 जून 2013 को उत्तराखंड स्थित केदारनाथ मंदिर में भयंकर बाढ़ आई थी। इस प्राकृतिक आपदा में करीब 6 हजार लोगों की जान चली गई थी, लाखों लोग बेघर हो गए और कई लोग अपनों से बिछड़ गए। सेना की सेंट्रल कमांड ने 19 जून को पहले ऑपरेशन गंगा प्रहार लॉन्‍च किया। दो दिन बाद इसका नाम बदलकर ऑपरेशन सूर्य होप कर दिया गया। ऑपरेशन सूर्य होप को सेना के सेंट्रल कमांड के जीओसी लेफ्टिनेंट जनरल अनिल चैत कमांड कर रहे थे। सेना से अलग वायुसेना ने भी अपना रेस्‍क्‍यू ऑपरेशन लॉन्‍च किया और इसे ऑपरेशन राहत नाम दिया गया। इस ऑपरेशन में इंडियन नेवी भी शामिल थी।

जब कश्मीर में चला ऑपरेशन मेघ राहत

साल 2014 में जम्मू-कश्मीर में आई भयावह बाढ़ के दौरान भी सेना ने अपनी क्षमता दिखाई। ऑपरेशन मेघ राहत के तहत सेना ने 2 सितंबर, 2014 से जम्मू-कश्मीर के अलग-अलग इलाकों में उतरने लगी और 18 सितंबर आते-आते 2 लाख कश्मीरियों को बाढ़ आपदा से सुरक्षित निकाल लिया। रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान ऐसे-ऐसे कारनामे कर दिखाए जिन्हें आज भी याद किया जाता है। इसी तरह के एक ऑपरेशन में सेना ने जम्मू की तवी नदी में सांसें थाम देने वाला कारनामा किया। इसमें वायुसेना के जवानों ने गजब की जांबाजी दिखाते हुए दो लोगों को सकुशल बचाया।

मतलब साफ है कि अब देश की सेना ने कोरोना को हराने के लिये कमर कस ली है जिसके बाद ये पक्का है कि कोरोना जल्द ही भारत में दम तोड़ देगा क्योकि भारत की फौज की डिक्शनरी में पराजय का तो शब्द ही नही है।