कोरोना काल में ऑनलाइन पढ़ाई से बच्चों की मासूमियत पर कही फर्क तो नहीं पड़ रहा 

भारत में हमेशा से एक बात बोली जाती है कि बच्चे भगवान का रूप होते हैं। इसलिए बच्चे खुश तो भगवान खुश लेकिन आज के दौर में कोरोना के साथ साथ ऑनलाइन पढ़ाई का ऐसा दबाब बच्चो पर पड़ रहा है कि वो अब परेशान दिखने लगे है। ऐसे में वक्त आ गया है कि हमें अपने कल को कोरोना के साथ साथ दूसरी स्थितियों से भी बचाने की तरफ सोचना होगा।

जिंदगी घर तक ही सिमट कर रह गई 

कोरोना वायरस से दुनिया की जंग आज बीते डेढ़ साल से चल रही है। इसी क्रम में भारत भी कोरोना को हराने के लिये रात दिन लगा है। कोरोना वायरस और हमारे बीच चल रहे संघर्ष के चलते आज हमारे बच्चो पर क्या असर डाला है इस बारे में आज हम बात करना चाहेगे। क्योकि बच्चे ही है जिनकी जिंदगी इस संक्रमण काल में घर तक सिमट कर रह गई है। सोचिये जो बच्चे कोरोना वायरस आने से पहले चहकते हुए दिखाई देते थे आज वो कमरो में बंद है, घरों की खिड़की और बॉलकनी ही आज इनका समूचा संसार बनकर रह गया है जिसका असर तो इन पर पड़ रहा है उसपर ऑनलाइन पढ़ाई भी इनको खुलकर जीना नहीं सिखा पा रही है। तभी तो पीएम मोदी से कश्मीर की एक 6 साल की बच्ची ने इस बारे में शिकायत की है जिसका सार यही निकलता है कि बच्चे आज ऑनलाइन पढ़ाई का दबाव काफी बढ़ गया। ऑकड़ो में देखे तो भारत में 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों की आबादी 36 करोड़ है। ये आंकड़ा 2011 की जनगणना से लिया गया है। यानी 10 साल में ये संख्या और भी बढ़ गई होगी।इसके अलावा हमारे देश में 25 करोड़ बच्चे स्कूल जाते हैं, जो अभी कोरोना वायरस की वजह से घर पर बैठे हैं। भारत में 15 लाख सरकारी और प्राइवेट स्कूल हैं, जिनमें 85 लाख शिक्षक बच्चों को पढ़ाते हैं, लेकिन कोरोना वायरस की वजह से अब ये व्यवस्था बदल गई है। जहां पहले बोला जाता था कि बच्चो को मोबाइल और फोन कम्प्यूटर से दूर रहना चाहिये तो वो आज सबसे ज्यादा वक्त इसी के साथ बिता रहे है जो काफी हानिकारक हो सकता है।

Mobile phones are used maximum for online classes: NCERT

 

इंटरनेट पर हानिकारिक जानकारियां

वैसे ऑनलाइन पढ़ाई को लेकर पिछले साल की तुलना में हम आज ज्यादा बेहतर स्थिति में हुए है क्या शिक्षक या अभिभावक दोनो ही इसे अच्छी तरह से समझ चुका है जिसका लाभ बच्चे ले रहे है लेकिन इसके बावजूद भी ऑनलाइन पढ़ाई का एक बहुत बड़ा नुकसान ये भी है कि इंटरनेट पर कई सारी हानिकारक जानकारियां भी उपलब्ध हैं और मोबाइल फोन पर ज़्यादा समय बिताने से बच्चे ऐसी जानकारियों के सम्पर्क में आ सकते हैं, जिससे उनके विकास पर गलत प्रभाव पड़ सकता है। इंटरनेट पर ड्रग्स से जुड़ी जानकारियां हैं, हिंसक सामग्री है और अश्लील तस्वीरें भी हैं। ऐसे में बच्चों को इंटरनेट के इन खतरों से बचाना भी बड़ी चुनौती है।हम ये नहीं कह रहे कि ऑनलाइन पढ़ाई गलत है। आज जब कोरोना वायरस की वजह से स्कूल खुल नहीं सकते, तब इंटरनेट ही बच्चों की शिक्षा के लिए एक बड़ा टूल बन पाया है, लेकिन हमें यहां ये भी ध्यान रखना है कि ऑनलाइन पढ़ाई ने बच्चों के दिमाग पर बोझ बढ़ा दिया है और बच्चों के अच्छे स्वास्थ्य के लिए ये बोझ सही नहीं है।

एक तरफ वायरस तो दूसरी तरफ ऑनलाइन पढ़ाई के साथ दिनभर लगे रहना कही न कही हमारे बच्चो के दिमाग में गलत प्रवाभ डाल रहा है। ऐसा नहीं कि ऑनलाइन पढ़ाई गलत है लेकिन इसको लेकर कुछ ऐसे नियम बनाने चाहिये स्कूल प्रबंध और सरकार को मिलकर जिससे ये पढ़ाई बोझ न लगे और बच्चो का विकास हो ना कि सर्वनाश