एक सवाल:आखिर राफेल की जरूरत क्यों है भारत को ?

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देश मे राफेल लड़ाकू विमान को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष मे खूब हाय तौबा मची हुई है और इसी हाय तौबा के बीच इस बात की चर्चा कही न कही दबती हुई दिखाई दे रही है कि आखिर राफेल देश के लिये जरूरी क्यों है देश की वायुसेना इस विमान को क्यों सबसे ज्यादा पसंद कर रही है?

सामरिक दृष्टि से क्यों है खास

यह सौदा इसलिए अहम है क्योंकि एक तरफ जहां चीन और पाकिस्तान लगातार अपनी वायुसेना की जरूरत को मजबूत कर रहे है तो दूसरी तरफ भारत मे कई सालों से इस ओर कोई कदम नही उठाया है। और यही वजह है कि भारत के पास बीते कई साल से वायुसेना के पास नये फाइटर प्लेन नही आये हैIभारतीय वायुसेना लड़ाकू विमानों की कमी से जूझ रही है जबकि पाकिस्तान ने हाल ही में चीन से 110 लड़ाकू विमान खरीदने का सौदा किया है. ऐसे में राफेल से वायुसेना की ताकत बढ़ेगी।

 

राफेल की खूबियां

यह विमान 4.5 जेनरेशन के ट्विन इंजन से लैस है। परमाणु हथियार ढोने समेत तमाम तरह के मिशन को अंजाम देने में सक्षम है।एक मिनट में विमान के दोनों तरफ से 30 एमएम की तोप से 2500 राउंड गोले दागे जा सकते हैं।विमान की मारक क्षमता 3700 किलोमीटर है जबकि यह 1900 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ सकता है। 300 किलोमीटर की रेंज से हवा से जमीन पर हमला करने में सक्षम है। 9.3 टन वजन के साथ 1650 किलोमीटर तक उड़ान भरने में सक्षम है।14 हार्ड प्वाइंट के जरिये भारीहथियार भी गिराने की क्षमता है।24 हजार 500 किलो वजन उठाने में सक्षम है। पाकिस्तान के एफ-16 विमानों के मुकाबले ज्यादा उन्नत विमान है।यह विमान खतरनाक मिसाइल और बमों से लैस है।इसमें 6 मीका मिसाइल एक साथ दागने की ताकत है औऱ ये खूबियां ही इस प्लेन को दूसरे फाइटर प्लेनों से अलग करती है।

इसलिए जरूरी हैं नए फाइटर प्लेन

चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसी मुल्कों से संभावित खतरे से निपटने के लिए भारत को 42-44 फाइटर स्क्वाड्रन की जरूरत है लेकिन, मौजूदा समय में भारत के पास महज 32 स्क्वाड्रन हैं I एक स्क्वाड्रन में 16 से 18 जेट विमान होते हैं। मिग 21 फाइटर विमान के इस्तेमाल पर पाबंदी लगा दी गई है, जिसके चलते यह संख्या और कम हो जाएगी। पुराने होने की वजह से मिग 21 और मिग 27 के 11 स्क्वाड्रन रिटायर हो रहे हैं।

सुखोई 30 एमकेआई और जगुआर विमान के बेड़े की सेवाएं पुरानी हो चली है। वही सुखोई टी-50 और सुखोई PAK FA जैसे पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों के लिए भारत और रूस के बीच डील की अभी तक शुरुआत नहीं हुई है।स्वदेशी तेजस लड़ाकू विमानों में काफी देर हो रही है. पहले 20 तेजस जेट साल 2018 तक एयरफोर्स को मिलेंगे। इसके बाद इनके 100 उन्नत संस्करण 2018 से 2026 तक उपलब्ध हो सकेंगे जबकि नए राफेल विमान 2019 से इंडियन एयरफोर्स के बेड़े में शामिल होंगे।

ऐसे समय मे अगर राफेल भारत के पास आ जाता है तो भारत की वायुसेना को बहुत बड़ी मजबूती मिलेगी। इसीलिये वायुसेना इस डील को लेकर लगातार ये कहती हुई नजर आ रही है कि राफेल के आ जाने के बाद देश के दुश्मन आंख उठाकर उसकी तरफ नही देख पायेगे।


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