एक सवाल: क्या इसका जवाब आप के पास है?

आजादी के बाद देश मे सबसे ज्यादा शासन कांग्रेस का रहा।इस दौरान गांधी परिवार का वर्चस्वसबसेज्यादा रहा। लेकिन ऐसे मे सवाल ये उठता है कि क्या हम अग्रेजों से तो आजाद हो गये लेकिन गांधी परिवार के गुलाम हो गये तभी तो देश मे जहां 600 सरकारी योजनाओं का नाम  इसी परिवार के नाम पर गया है। तो कई पुरस्कार के नाम भी इन लोगों के नाम पर ही रखे गये है। ऐसे मे सवाल ये उठता है कि आजाद भारत मे ये किस तरह का उपनिवेशवाद था।

भारत के आतीत मे झांके तो ऐसा माना जाता है कि मुगल वंश ने देश मे सबसे लंबे समय तक शासन किया है। उसके बाद अग्रेजों ने.. लेकिन आजादी के बाद सबसे लंबे वक्त तक सत्ता का सुख अगर किसी परिवार ने उठाया तो वो गांधी परिवार और इसका नतीजा ये हुआ कि देश मे लाखों सड़को के नाम इस परिवार के नाम पर हैकरीब 600 से ज्यादा योजनाओं के नाम भी गांधी परिवार पर रखे गये है।इतना ही नही खुद इदिरा जी को अपने परिवार के गुणो का बखान करने के लिये एक टाइम कैप्शूल बनवाया था जिसमे आजादी की लड़ाई मे लड़ने वाले नेताओं के इतिहास को मिटा कर सिर्फ गांधी परिवार का ही गुणगान किया गया था और उसे लालकिले मे दफनाने का प्लान भी बनाया गया लेकिन विपक्ष के भारी ऐतराज के बाद इदिरा कि इस सोच पर विराम लग दी थी।

मतलब कि सत्ता मे रहते हुए गांधी परिवार ने अपने नाम को चमकाने मे कोई कोर कसर नही छोड़ी। मसलन अब राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार को ही ले ले। ये भारत मेखेल का सबसे बड़ा पुरस्कार है लेकिन ये भी गांधी परिवार के नाम रखा गया है न कि देश के किसी दूसरे महान खिलाड़ी के नाम ऐसे मे ये सवाल खड़ा होता है कि राजीव गांधी ने खेल के विभाग मे ऐसा क्या काम किया था जिसके चलते उनके नाम पर खिताब का नाम रखा गया, मेरे तो समझ के परे है।

दूसरी तरफ विदेश मे ऐसा नही होता है। अब आस्ट्रेलिया को ही ले ले जहां का खेल पुरस्कार महान किक्रेटर डॉन ब्रेटमैन के नाम है। इसी तरह न्यूजीलैड का सर्वोच्चय खेल पुरस्कार महान एथलीट सर मरे हैल्बर्ग केनाम है। वही जेसी ओवेन्स पुरस्कार यूएसए के एक महान एथलीट खिलाड़ी के नाम पर रखा गया है। ऐसे मे दिमाग मे सवाल उठता है कि आखिर हमारे देश मे ऐसा क्यो नही हुआ। कई बार इस पर सवाल भी खड़े किये गये है लेकिन उठी आवाज को कांग्रेस के हो हल्ला ने पीछे कर दिया।

ऐसा नही की हम देश मे गांधी परिवार की उपयोगिता पर सवाल खड़ा कर रहे है लेकिन अगर राजनीति के विभाग मे उनके नाम पर एवार्ड हो तो सवाल नही उठता लेकिन खेल के क्षेत्र मे तो सवाल तो बनता ही है। फिलहाल देश मे लोकतन्त्र है ऐसे मे सवाल तो पूछे जायेगे लेकिन जवाब नही दिये जायेगे ये भी पक्का है. क्योंकि कांग्रेस के आज के नेता सिर्फ इतिहास मे इसी परिवार को पढ़ाते है और इसकी स्वामीभक्ति करते है।