पहले ही दिन संसदीय परंपरा को तोड़ता हुआ दिखा विपक्ष

मानसून सत्र शुरू होने से पहले हुई सभी पार्टियों की बैठक में तय किया गया था कि लोकसभा और राज्य सभा में हर मुद्दे पर बहस की जायेगी वो भी शांति के साथ और मर्यादा के साथ लेकिन जैसे ही आज लोकसभा की बैठक शुरू हुई। विपक्ष ने सभी मर्यादा को तार तार करते हुए संसदिय परंपरा का भी ध्यान नहीं रखा और पीएम मोदी को अपनी नये मंत्रीमंडल से भी परिचय नहीं करवाने दिया।

 

मानसून सत्र के पहले दिन ही दिखा अमर्यादित विपक्ष

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से लोकसभा में मंत्रिपरिषद के नए सदस्यों का परिचय कराने के दौरान विपक्षी सदस्यों ने हंगामा किया। इस दौरान प्रधानमंत्री ने विपक्षी दलों को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि कुछ लोगों को यह रास नहीं आ रहा है कि दलित, आदिवासी, ओबीसी और महिला मंत्रियों का यहां परिचय कराया जाए। संसद के मॉनसून सत्र के पहले दिन नए मंत्रियों का सदन में परिचय देने के लिए प्रधानमंत्री मोदी जैसे ही खड़े हुए, विपक्षी सदस्य हंगामा करने लगे। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विपक्षी सदस्यों से शांत होने और मंत्रियों का परिचय होने देने की अपील की। उन्होंने कहा कि ‘परंपराओं को न तोड़ें। आप लंबे समय तक शासन में रहे हैं। आप परंपरा को तोड़कर सदन की गरिमा को कम ना करें। कुछ यही हाल राज्यसभा में भी देखने को मिला जब पीएम बोलने के लिये खड़े हुए सो विपक्ष ने नारेबाजी शुरू कर दी जो ये बताता है कि विपक्ष का काम सिर्फ अब हंगामा करना ही रह गया है।

सत्तापक्ष हर मुद्दे पर चर्चा को तैयार

इससे पहले संसद भवन पहुंचे पीएम ने मीडिया से बात करते हुए साफ किया कि सत्तापक्ष हर मुद्दे पर बहस के लिये तैयार है लेकिन विपक्ष को इसके लिए तैयार रहना चाहिये क्योंकि अगर विपक्ष सत्तापक्ष से तीखे सवाल पूछ सकता है तो उसे सवालों का जवाब देने के लिये सत्ता पक्ष को भी सुनना होगा। तभी जनता तक ठीक तरह से हर मुद्दे पर हकीकत सामने आयेगी। गौरतलब है कि इस बार मोदी सरकार इस सत्र में  19 विधेयक लेकर आने वाली है और उसकी कोशिश रहेगी कि वो सभी बिल को पास करवा सके। जिससे देश में तेजी के साथ विकास काम किये जा सके।

पहले दिन विपक्ष का रुख देखकर तो यही लगता है कि विपक्ष ना बहस करने के लिये तैयार है और ना ही काम करने को वो तो बस पूरे सत्र में हंगामा खड़ा करके सिर्फ सदन का समय बर्बाद करना चाहती है। जिससे कोई काम ना हो सके। ऐसे में आप समझ सकते हैं कि विपक्ष आज किस हद तक मोदी विरोध में गिर चुका है।

 

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