गणतंत्र दिवस के दिन वो हुआ जिसे लिखने में भी शर्मसार हो रहे हैं हम

आज जो भी लिख रहा हूं वो बेशर्मी की कमल से, शर्मिदगी की स्याही से लिख रहा हूँ क्योकि  दिल्ली में गणतंत्र दिवस के मौके पर जो कुछ नंगनाच राजधानी की सड़कोंपर हमारे रकीब न कर सके वो हमारे अपनो ने करके दिखा दिया। देश आज शर्मसार है लालकिला बेहद दर्द महसूस कर रहा है क्योकि आजादी के बाद पहली बार उसकी रुह पर हमला हुआ है वो भी अन्नदाता की आड में छुपकर कुछ लोगों की अपनी सियासी महत्वाकाक्षा पूरी करने के चलते ।

दिल्ली की सड़कों पर तथाकथित किसानों का नंग नाच

एक तरफ दुनिया गणतंत्र दिवस के मौके पर भारत की संस्कृति की विरासत और ताकत को राजपथ पर देख रहा था देख रहा था कि नया भारत आज कितना मजबूत है और कितनी तेजी के साथ आगे बढ़ रहा है बस यही बात कुछ देश विरोधियों को पंसद नही आ रही थी तभी तो उन्होने किसान के नाम पर खुलकर राजधानी की सड़को में तोड़फोड की पुलिस वालो पर हथियार चलाये मानो इन लोगो के सिर पर कोई हैवान बैठ गया हो इस तरह से इन लोगो ने सड़को पर ट्रैक्टर चलाया। ये सब करने के बाद सबसे बड़ा गांव उस वक्त इन लोगो ने दिया जब ऐतिहासिक लालकिले पर एक धर्म विशेष का झड़ा लगाकर तिरंगा को अपमानित किया चारो तरफ अफरातफरी का माहौल बता रहा था कि किस तरह से लोकतंत्र और आंदोलन के नाम पर कुछ चरमपंथी अपने स्वार्थ को पूरा कर रहे थे। जो भारत के इतिहास पर एक कालिख की तरह है।

दिल्ली पुलिस की संयम की तारीफ तो होनी चाहिए

पिछले एक महीने से दिल्ली की सीमा पर बैठे ये आंदोलनकारियों से निपट रही दिल्ली पुलिस कितनी संयमी और कितनी धैर्य रखने वाली पुलिस है इसका उदाहरण कल देखने को मिला जब उपद्रवियों ने दिल्ली पुलिस पर जमकर हमला किया लेकिन दिल्ली पुलिस ने उनपर किसी तरह का अतरिक्त बल का प्रयोग नही किया। इसी का नतीजा है कि आज दिल्ली पुलिस के 100से ज्यादा जवान इस हंगामे के बाद घायल है जो अस्पताल में इलाज करवा रहे है। नागलोई हो या आईटीओ या फिर लालकिला हर जगह पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को समझाकर पीछे हटने को बोला लेकिन हद तो तब हो गई जब  हिंसा के बाद कुछ तथाकथित किसान नेता सामने आकर दिल्ली पुलिस पर ही आरोप लगाते हुए दिखे साथ ही उपद्रवियों का मचाव करते हुए ये कहते हुए नजर आये कि 2 महीने से सीमा पर बैठे रहने के चलते ही सरकार के खिलाफ प्रदर्शनकारियों का गुस्सा फूट गया पर कोई इनसे ये पूछे की दिल्ली पुलिस भी तो सीमा पर पिछले 2 महीने से मुस्तैद खड़ी है लेकिन इसके बाद भी पूरे संयम में है। इस लिये दिल्ली पुलिस की जितनी भी तारीफ की जाये वो कम होगी।

फिलहाल बीती बातों को बिसार कर अब हमे उन लोगो के खिलाफ सख्त कदम उठाने चाहिये तो किसानो के नाम पर हिंसा फैलाकर सियासी उल्लू सीधा करना चाहते है और ऐसे लोगो के खिलाफ इतनी सख्त कर्यवाही करनी चाहिये कि आने वाले दिनो में एक नजीर बन सके।