10 दिसंबर को नए संसद भवन की नींव रख नमो रचेंगे नया इतिहास

नए भारत में सब कुछ बदल रहा है मोदी सरकार के आने के बाद से ही देश में काम करने का तरीका बदला तो भ्रष्टाचार पर लगाम लगाई गई तो विकास के नये आयाम छुए जा रहे है। ऐसे में देश के लोकतंत्र का मंदिर नया न हो तो फिर नये भारत की तस्वीर अधूरी ही रहेगी। भारत में अंग्रेजों के जमाने में बना संसद भवन अब पुराने जमाने की बात होने जा रही है। वर्तमान संसद भवन के पास में नए संसद भवन का निर्माण  होने जा रहा है जिसका भूमि पूजन पीएम मोदी के हाथ 10 दिसंबर को होने वाला है।

21 महीने में बनकर तैयार होगा नया संसद भवन

नया संसद भवन 21 महीने में बनकर तैयार हो जाएगा। देश की आजादी की 75वीं वर्षगांठ के मौके पर संसद का सत्र नए भवन में ही आयोजित होगा। नए भवन में संसद सदस्यों के लिए अलग-अलग कार्यालय होंगे। इसके साथ सांसदों के लिए लाउंज, लाइब्रेरी, समिति कक्ष और भोजन कक्ष भी होंगे। सांसदों के लिए डिजिटल सुविधाएं उपलब्ध होंगी, जो संसद को पेपरलेस बनाने की दिशा में अग्रणी कदम साबित होंगी। नए संसद भवन में सभी मंत्री एक जगह बैठेंगे और आने-जाने में लगने वाले समय व किराए में भी बचत होगी। लोकसभा और राज्यसभा कक्षों के अलावा नए भवन में एक भव्य संविधान कक्ष होगा जिसमें भारत की लोकतांत्रिक विरासत दर्शाने के लिए अन्य वस्तुओं के साथ-साथ संविधान की मूल प्रति, डिजिटल डिस्प्ले आदि होंगे। भारत यात्रा पर आने वाले विदेशी प्रतिनिधिमंडलों को इस हॉल में जाने की अनुमति होगी, जिससे वे संसदीय लोकतंत्र के रूप में भारत की यात्रा के बारे में जान सकें।

निर्माण के दौरान ध्वनि-प्रदूषण का रहेगा खास ख्याल

नए संसद भवन के निर्माण के दौरान इस बात का पूरा ध्यान रखा गया है कि वायु और ध्वनि प्रदूषण न हो। साथ ही वर्तमान भवन में संसद की कार्यवाही या प्रशासनिक कामकाज बाधित न हो। सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना के तहत नए भवन का निर्माण मौजूदा भवन के पास किया जाएगा। इस परियोजना के तहत एक नए त्रिकोणीय संसद भवन, एक संयुक्त केंद्रीय सचिवालय और राष्ट्रपति भवन से इंडिया गेट तक तीनकिलोमीटर लंबे राजपथ के पुनर्निमाण किया जायेगा। इसके साथ साथ नए संसद भवन को हाइटेक बनाने के साथ साथ नई लाइटो से सजाया जाएगा। सोलर पॉवर और कई तरह के दूसरे यन्त्र भी इस भवन में लगाये जाएंगे तो सुरक्षा का बेहद कड़ा इतंजाम की भी पुख्ता तैयारी होगी वही मौजूदा भवन भूकंपरोधी भी होगा।

बता दें कि मौजूदा संसद भवन का निर्माण अंग्रेजों ने 1927 में किया था। जिस दौरान इस संसद भवन का निर्माण हुआ, उस वक्त केवल एक ही सदन होता था। लेकिन आजादी के बाद लोकसभा और राज्यसभा के रूप में दो सदन बनने पर सदस्यों को बैठने के लिए जगह की कमी होने लगी। वर्तमान में कई सांसदों को प्लास्टिक की कुर्सियों पर बैठना पड़ता है, जिसे सांसद की गरिमा के खिलाफ माना जाता है। वैसे भी समय के साथ बदलना कोई गलत बात नही है और जिस तरह का भवन का मॉडल रखा गया है उसे देखकर तो यही लगता है कि ये दुनिया का सबसे बड़े लोकतंत्र का मंदिर बहुत खूबसूरत होगा।