पीएम मोदी से बोले अधिकारी, श्रीलंका से सबक लेते हुए मुफ्त की योजनाओं को करना होगा खत्म

पीएम मोदी की वरिष्ठ नौकरशाहों के साथ बैठक में कुछ अधिकारियों ने कई राज्यों द्वारा घोषित लोकलुभावन योजनाओं पर चिंता जताई और दावा किया कि वे आर्थिक रूप से व्यावहारिक नहीं हैं और वे उन्हें श्रीलंका के रास्ते पर ले जा सकती हैं।

चार घंटे की मैराथन बैठक

पीएम मोदी के 7, लोक कल्याण मार्ग स्थित अपने शिविर कार्यालय में सभी विभागों के सचिवों के साथ चार घंटे की लंबी बैठक हुई। 24 से अधिक सचिवों ने अपने विचार व्यक्त किए और पीएम मोदी के साथ अपने फीडबैक साझा किए, जिन्होंने उन सब को ध्यान से सुना। दो सचिवों ने हाल के विधानसभा चुनावों में एक राज्य में घोषित एक लोकलुभावन योजना का उल्लेख किया जो आर्थिक रूप से खराब स्थिति में है। उन्होंने साथ ही अन्य राज्यों में इसी तरह की योजनाओं का हवाला देते हुए कहा कि वे आर्थिक रूप से टिकाऊ नहीं हैं और राज्यों को श्रीलंका के रास्ते पर ले जा सकती हैं। क्योंकि  इससे कही ना कही राज्य के खजाने पर प्रभाव पड़ता है।

गरीबी का हवाला देकर प्रमुख विकास परियोजनाओं पर आगे नहीं बढ़ने की परिपाटी

बैठक के दौरान मोदी ने नौकरशाहों से स्पष्ट रूप से कहा कि वे कमियों के प्रबंधन की मानसिकता से बाहर निकलकर अधिशेष के प्रबंधन की नई चुनौती का सामना करें। मोदी ने उनसे प्रमुख विकास परियोजनाओं पर आगे नहीं बढ़ने के बहाने के तौर पर ‘गरीबी’ का हवाला देने की पुरानी परिपाटी छोड़ने और बड़ा दृष्टिकोण अपनाने के लिए कहा। कोविड-19 महामारी के दौरान सचिवों ने जिस तरह से साथ मिलकर एक टीम की तरह काम किया, उसका उल्लेख करते हुए मोदी ने कहा कि उन्हें भारत सरकार के सचिवों के रूप में कार्य करना चाहिए न कि केवल अपने संबंधित विभागों के सचिवों के रूप में और उन्हें एक टीम के रूप में काम करना चाहिए। उन्होंने सचिवों से सरकार की नीतियों में खामियों पर फीडबैक और सुझाव देने के लिए भी कहा, जिनमें वे नीतियां भी शामिल हैं जो उनके संबंधित मंत्रालयों से संबंधित नहीं हैं। ऐसी बैठकों के अलावा प्रधानमंत्री मोदी ने शासन में समग्र सुधार के लिए नए विचारों का सुझाव देने के लिए सचिवों के छह-क्षेत्रीय समूहों का भी गठन किया है।

2014 के बाद से प्रधानमंत्री की सचिवों के साथ यह नौवीं बैठक थी। इस बैठक में एक तरफ तेज रफ्तार से भारत को आगे ले जाने का खाका खीचा गया तो दूसरी तरफ ये भी बताया गया कि भारत के हित में सिर्फ सत्ता पाने के लिए जो लोग लोकलुभावने वादे कर रहे है वो पूरी तरह से गलत है और उससे बचना होगा।