सियासत की जोड़ी नंबर वन

साल 2019 खत्म होने वाला है, 2019 में अगर सियासी हलचल की बात करे तो खूब देखी गई। लेकिन सियासत में एक जोड़ी खूब चर्चा में रही। और वो जोड़ी थी, पीएम नरेन्द्र मोदी और अमित शाह जी की, वैसे तो ये जोड़ी एक साथ कई दशक से काम कर रही है,लेकिन जिस तरह से इस साल इस जोड़ी ने देश के विकास के लिये सख्त फैसले लिये वो शायद इतिहास में किसी भी नेताओं की जोड़ी भी नही ले पाई थी। चलिये इस जोड़ी की कुछ खास खासियत पर चर्चा करते है।  

चुनौतियों को चुनौती देने में माहिर

पीएम नरेन्द्र मोदी वो नाम जिन्हे चुनौतियों को चुनौती देना का शौक आज से नही बल्कि बजपन से ही देखा गया था तभी तो आज चुनौती भी उनके सामने आने से डरती है। साल 2019 के शुरूआती महीनो की बात करे तो चुनावी समर में हर तरफ से मोदी जी के ऊपर ऐसे ऐसे आरोप लगाये जा रहे थे जिसको कोई भी सह नही सकता था लेकिन इस चुनौतियों को हराकर एक बार फिर वो सियासत के सिंकदर बनकर उभरे देश की जनता ने उनका ऐसा साथ दिया कि विपक्ष चारो खाने चित हो गया। लेकिन सत्ता में आने के बाद जिस तरह से उन्होने देश की कई दशक पुरानी बीमारियों का इलाज करना शुरू किया जिसे लेकर कहा जाता था कि देश में तुफान आ जायेगा लेकिन जिस सफलता से उन्होने अपनी बात जनता तक रखी वो सच में तारीफ के काबिल है तभी तो देश में धारा 370 हटाई गई हो या फिर तीन तलाक को खत्म किया गया हो या देश का ऐतिहासिक फैसला अयोध्या मसला सुलझने के बाद देश में हर तरफ अमन देखा गया वो मोदी सरकार की कुशल रणनीति का ही असर है। वही विदेश नीति की बात करे तो विश्व में भारत का जो आज दबदबा है वो पीएम मोदी की नीति के चलते है तभी रूस हो अमेरिका या फिर चीन सभी मुल्क भारत को हाथोहाथ लेते है। पीएम मोदी की कुशल कूटनीति का ही असर है कि आज पाकिस्तान समूचे विश्व में अलग थलग हो गया है। भारत की आर्थिक स्थिति पर प्रकाश डाले तो साफ पता चलता है कि समूचा विश्व जब मंदी के माहौल से गुजर रहा है तो भारत में इसकी परछाई भी नही पड़ रही है. ऐसे में अगर पीएम मोदी को साल 2019 का सबसे हीरो कहा जाये तो गलत न होगा.

सख्त फैसले लेने में माहिर

गृहमंत्री अमित शाह वो नाम जो कोई फैसला ले ले , तो फिर उसे लागू करके ही दम लेते है वैसे तो आज उन्हे सियासत का चाणक्य कहा जाता है और उनकी नीति की काट किसी के पास भी नही है, खासकर विपक्ष के पास यही कारण है, कि राज्य सभा में बहुमत न होने के बाद भी कई बिल अमित शाह पास करवाकर निकले और विपक्ष सिर्फ हाथ पर हाथ धरे बैठा रहा। इसीलिये आज उन्हे राष्टवाद का असल चेहरा माना जा रहा है।साल 2014 से 2019 तक पार्टी को विश्व की सबसे बड़ी पार्टी बनाने का काम हो या फिर संगठन को हर गांव गांव से शहर शहर तक फैलाने का काम अमित शाह के नेत्तृव में ही पूरा हुआ है। मतलब साफ है शांत से दिखने वाले अमित शाह के दिमाग में कौन कौन सी सियासी चाले चल रही है ये कोई नही जानता है। लेकिन उनका एक और रूप तब देखने को मिला जब उन्होने धारा 370, और CAA बिल को पेश करते हुए लोकसभा में अपना बयान दिया। राष्टवाद को लेकर उनका उग्र रूप शायद ही किसी ने देखा होगा। साथ ही साथ उनका ये भाषण साल 2019 का सबसे ऐतिहासिक भाषण होगा। और इसे सब मानते भी है।

मतलब साफ है कि इस जोड़ी ने जिस तरह देश के विकास के लिए खाका खीचा है उसका असर अब 2020 में दिखेगा। लेकिन तय मानिये कि इनकी सियासी चाले जरूर विपक्ष को पस्त करती रहेगी। और ये भी पक्का है कि विपक्ष और सियासत के पंडितों के पास इनको जांचने  के लिये बहुत कुछ मिलता रहेगा।