नई शिक्षा नीति के चलते विदेशी छात्रों की संख्या भारत में बढ़ी

आज भारत को लेकर दुनिया का नजरिया बदला है फिर वो कोई भी सेक्टर क्यों न हो। इसी क्रम में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति आने के बाद दुनिया का नजरिया भारत को लेकर काफी बदला है। इसका अनुमान विदेशी छात्रों के भारतीय उच्च शिक्षण संस्थानों की ओर बढ़े रुझान से लगाया जा सकता है जिनकी संख्या में पिछले सालों के मुकाबले इस साल करीब 30 फीसद की बढ़ोतरी दर्ज हुई है।

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विदेशियों को भा रही है नई शिक्षा नीति

कोरोना काल से देश के शिक्षा संस्थान भी अब उबरने लगे है जिसके चलते अब पढ़ाई फिर से शुरू हो पाई है। वही भारत के लिए इस सेक्टर को लेकर एक अच्छी खबर ये है कि भारतीय उच्च संस्थानों में विदेशी छात्रों का रूझान बढ़ा है। शिक्षा मंत्रालय भी भारतीय उच्च संस्थानों की ओर विदेशी छात्रों के इस बढ़े रुझान से उत्साहित है। इस बढ़े रुझान को देखते हुए दुनिया के बाहर और देशों में अभियान चलाने की फैसला लिया गया है। वैसे तो भारत में पढ़ाई के लिए किसी भी देश के छात्र आ सकते हैं, लेकिन शिक्षा मंत्रालय का फोकस अभी सिर्फ तीस देशों को लेकर ही था। इनमें ज्यादातर अफ्रीकी, खाड़ी और एशियाई देश शामिल हैं। फिलहाल इस मुहिम में जो बारह नए देशों को शामिल किया गया है वे खाड़ी और एशिया से हैं। इनमें इंडोनेशिया, फिलीपींस, मॉरीशस व बहरीन आदि देश शामिल हैं। अब तक इन देशों के छात्रों की संख्या कम रहती थी, जो इस बार बढ़ी है।

42 देशों में सेमिनार की तैयारी में मोदी सरकार

खुद पीएम मोदी कई बार अपने भाषणो में बोल चुके है कि सरकार की इस नीति से न केवल कुशल छात्र मिलेंगे बल्कि विदेशी छात्रो के आने से देश में विदेशी इनवेटमेंट भी बढ़ेगा। इसी के तहत मोदी सरकार  स्टडी इन इंडिया प्रोग्राम के तहत मौजूदा समय में भारत में उच्च शिक्षा के लिए 70 से ज्यादा देशों के छात्र आते हैं। मंत्रालय इसके भी दायरे को बढ़ाने की तैयारी करने में लगी है। फिलहाल जिस तरह का रुझान देखने को मिल रहा है, उनमें आने वाले सालों में भारत में पढ़ाई के लिए सौ से भी ज्यादा देशों के छात्र आ सकते हैं। मंत्रालय से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक जैसे ही कोरोना का प्रभाव कम होगा, वह फोकस वाले सभी 42 देशों में भारतीय संस्थानों और यहां पढ़ाए जाने वाले कोर्सों के लिए रोड शो, सेमिनार जैसे आयोजन करेगा।विदेशी छात्रों को लुभाने के लिए सरकार ने यह मुहिम तब शुरू की है, जब अमेरिका, जर्मनी, बिट्रेन, फ्रांस और आस्ट्रेलिया जैसे देशों में यह आय का एक बड़ा जरिया बना हुआ है, क्योंकि पढ़ाई के लिए आने वाले छात्र पढ़ाई के साथ यहां रहने और खाने पर उससे ज्यादा खर्च करते हैं।

सच में मोदी सरकार उन सेक्टर में आज अच्छा करके दिखा रही है जिसके बारे में कभी सोचा ही नही गया था। तभी तो आज भारत से बाहर पढ़ने वालो की संख्या कम हो रही है और विदेशी भारत आकर शिक्षा ग्रहण करने के लिये ज्यादा आ रहे है जो भारत की आत्मनिर्भरता की ताकत को दर्शाता है।