नागरिकता कानून और एनआरसी से कितना अलग है एनपीआर, मोदी कैबिनेट से मिली मंजूरी

पश्चिम बंगाल और केरल सरकार अपने राज्यों में एनपीआर के लिए जारी प्रक्रिया को स्थगित कर चुकी है. असदुद्दीन ओवैसी ने ये कहते हुए एनपीआर का विरोध किया है कि इससे एनआरसी की शुरुआत हो जाएगी.

नागरिकता संशोधन कानून ( Citizenship amendment act) और नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजंस (National Register of citizens) पर देश भर में विरोध और समर्थन के लिए प्रदर्शनों के बीच केंद्र सरकार राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (National Population Register) अपडेट करने का बड़ा कदम उठा रही है. सूत्रों के मुताबिक मंगलवार को मोदी कैबिनेट की बैठक में इसे मंजूरी दे दी गई.

इस साल 31 जुलाई को एनपीआर पर काम की प्रक्रिया शुरू करने की अधिसूचना भी जारी कर दी गई थी. इसलिए कैबिनेट की बैठक में 2021 की जनगणना और एनपीआर (NPR) को अपडेट करने की औपचारिक मंजूरी दे दी गई है. इन दोनों कामों के लिए कैबिनेट करीब 8500 करोड़ रुपए के बजट को भी मंजूर किया गया है.

नागरिकता कानून और एनआरसी के बाद एनपीआर अपडेट करने को लेकर भी हंगामे की आशंका है. इसके पहले ही पश्चिम बंगाल और केरल सरकार अपने राज्यों में एनपीआर के लिए जारी प्रक्रिया को स्थगित कर चुकी है. एआईएमआईएम के नेता असदुद्दीन ओवैसी ने ये कहते हुए एनपीआर का विरोध किया है कि इससे एनआरसी की शुरुआत हो जाएगी.

एनपीआर और एनआरसी में अंतर

नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर ( NPR) और नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजनशिप ( NRC) में स्पष्ट अंतर है. एनपीआर का नागरिकता से कोई लेना-देना नहीं है जबकि एनआरसी से नागरिकता तय होगी. एनपीआर से देश के निवासियों की पूरी जानकारी रखने का मकसद पूरा होगा. वहीं एनआरसी से देश के घुसपैठियों की पहचान की जाएगी. यह दोनों ही नागरिकता कानून से अलग प्रक्रिया है.

क्या है एनपीआर

गृह मंत्रालय के तहत आने वाली ऑफिस ऑफ द रजिस्ट्रार जनरल एंड सेंसस कमिश्नर की वेबसाइट के मुताबिक यह देश में रहने वाले लोगों की जानकारी का एक रजिस्टर होगा. एनपीआर दरअसल वो रजिस्टर है जिसमें देश में रहने वाले हरेक इंसान की पूरी जानकारी होगी. इसमें देश के 5 साल से अधिक उम्र के सभी निवासियों की पहचान से जुड़ी हर तरह की सूचना होगी.

इसके लिए लोगों से नाम, पता, पेशा, शिक्षा समेत 15 तरह की जानकारियां मांगी जाएंगी. लोगों की तस्वीर, फिंगर प्रिंट, रेटिना की भी जानकारी ली जाएगी. यह सारी जानकारी खुद से बताई गई होगी. इसके लिए किसी दस्तावेज के सौंपने की जरूरत नहीं होगी. सरकार की अधिसूचना के मुताबिक इस बार भी एनपीआर के लिए आंकड़े जुटाने का काम 2020 में 1 अप्रैल से 30 सितंबर तक किया जाएगा.

एनपीआर से जुड़ा बड़ा सवाल

एनपीआर से सरकार देश के हर निवासी की जानकारी जुटाएगी. सवाल ये भी है कि जब देश एक है तो इतने तरह की पहचान की जरूरत क्यों है. आधार कार्ड, वोटर आईडी, पासपोर्ट, राशन कार्ड, बैंक का पासबुक, बिजली का बिल, रजिस्ट्री का पेपर, पानी का बिल, गैस का कनेक्शन रहने के बावजूद एनपीआर की जरूरत क्यों है?

क्या होगा एनपीआर का फायदा

सरकार के पास देश के हर निवासी की जानकारी और पहचान से जुड़ा डाटाबेस होगा. इससे सरकारी योजनाओं का लाभ सही लोगों तक सीधे पहुंच सकेगा. देश की सुरक्षा के लिए कारगार कदम उठाए जा सकेंगे. साल 2010 में पहली बार एनपीआर बनाने की शुरुआत हुई थी. 2011 की जनगणना के साथ एनपीआर लागू किया गया था. दस साल बाद इसे अपडेट किया जाएगा. साल 2020 तक असम को छोड़कर इसे हर राज्य और केन्द्र शासित प्रदेश में लागू किए जाने की योजना है.