पहले तीन तलाक, धारा 370, रामजन्म भूमि और फिर नागरिकता विधेयक, अब आगे क्या?

  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

मोदी सरकार ने अपने दूसरे कार्यकाल के सात माह के अंदर ही चार ऐसे कार्य कर दिए जिसे लेकर विपक्ष ने काफी हंगामा किया। पहले तीन तलाक कानून फिर जम्मू कश्मीर का धारा 370 फिर रामजन्म भूमि पर चल रहे विवादित भूमि पर फैसला और अब नागरिकता संशोधन विधेयक इस बात का सबूत है। अब जब नागरिकता संशोधन विधेयक राज्यसभा से मंजूर हो चुका है और आगे कानून बनाने के लिए राष्ट्रपति के पास भेजा जाने वाला है तो ऐसे में लोग कयास लगा रहे हैं कि भाजपा अब आगे क्या करेंगी।

दरअसल, बीजेपी ने अपने चुनावी घोषणापत्र में अनुच्छेद-370 हटाने, तीन तलाक की प्रथा को खत्म करने, रामजन्म भूमि विवाद का निपटारा करने और नागरिकता संशोधन कानून लाने का वादा किया था। मोदी सरकार- 2 ने लोकसभा चुनाव में जीत के करीब सात महीनों के अंदर ही इन सभी वादों को पूरा कर दिया है। ऐसे में अब इस बात की चर्चा होने लगी है कि बीजेपी का अगला कदम क्या होने वाला है।

ऐसे चर्चा है कि पार्टी समान नागरिक संहिता (यूनिफॉर्म सिविल कोड) पर आगे बढ़ सकती है। मोदी सरकार में नंबर 3 की बड़ी हैसियत रखने वाले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पत्रकारों से बात करते हुए एक प्रश्न के उत्तर में कहा था कि अब यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने का समय आ गया है। हालांकि बीजेपी नेताओं का कहना है कि अभी पार्टी की प्राथमिकता देशभर में एनआरसी लागू करवाना है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र यह बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

जबकि विपक्ष समान नागरिक संहिता और एनआरसी को सांप्रदायिक एजेंडा करार देता आया है, परंतु भाजपा हमेशा ही इन दोनों मुद्दों को राष्ट्रवाद के रूप में पेश करती आई है। गृह मंत्री अमित शाह बार-बार एनआरसी पर यह कहते हुए बल देते रहे हैं कि देश में घुसपैठियों के लिये कोई जगह नहीं होगी। अब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के समान नागरिक संहिता पर दिये गये बयान से यह स्पष्ट संकेत मिलते हैं कि मोदी सरकार का अगला कदम इन्हीं दोनों मुद्दों को लेकर आगे बढ़ना होगा।

क्या है समान आचार संहिता?

समान नागरिक संहिता अथवा समान आचार संहिता का अर्थ एक धर्मनिरपेक्ष कानून होता है जो सभी धर्म के लोगों पर समान रूप से लागू होता है। दूसरे शब्दों में कहें तो देश में हर नागरिक के लिये एक समान कानून का होना, फिर वह व्यक्ति किसी भी धर्म या जाति का हो। अभी देश में अलग-अलग धर्मों के लिये अलग-अलग पर्सनल लॉ हैं। यूसीसी लागू होने के बाद सभी धर्मों के नागरिकों के लिये एक जैसा कानून हो जाएगा। इसको यदि उदाहरण से समझें तो अभी मुस्लिमों में उनके शरिअत कानून के मुताबिक तीन शादियाँ करने तक की छूट है और मात्र तीन बार तलाक कह देने से रिश्ता खत्म करने की परंपरा है, परंतु समान नागरिक संहिता लागू होने के बाद मुस्लिम समुदाय में भी एक ही शादी को जायज ठहराया जाएगा। तीन तलाक की प्रथा के खिलाफ मोदी सरकार पहले ही कानून बना चुकी है। इसी प्रकार महिलाओं को अपने पिता की संपत्ति पर अधिकार मिलेगा और गोद लेने जैसे मामलों में भी एक समान नियम लागू होंगे।

बता दे कि भारत में अभी एनआरसी केवल असम में और समान नागरिक संहिता केवल गोवा में लागू है। जबकि दुनिया के अधिकांश देशों में समान नागरिक संहिता जैसे कानून लागू हैं, इनमें पड़ोसी पाकिस्तान और बांग्लादेश भी शामिल हैं।

गौरतलब है कि समान नागरिक संहिता का उल्लेख भारतीय संविधान के भाग 4 के अनुच्छेद 44 में है। इसमें नीति-निर्देश दिया गया है कि समान नागरिक कानून लागू करना हमारा लक्ष्य होगा। सर्वोच्च न्यायालय भी कई बार समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में केन्द्र सरकार के विचार जानने की पहल कर चुका है।

WHY INDIA NEED? | PC - Google

आखिर समान आचार संहिता की क्या जरूरत है?

ये सवाल अक्सर लोग पूछते हैं कि आखिर क्या जरूरत है समान आचार संहिता लागू करने की? तो आपको हम बता दें कि अलग-अलग धर्मों के अलग-अलग कानून की वजह से न्यायपालिका पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है। इसके लागू हो जाने से एक तो न्यायपालिका का बोझ कम होगा ऊपर से समय बचने और एक कानून होने की वजह से बहुत से लंबित मामलों का निपटारा भी जल्द हो सकेगा। इसी वज़ह से न्यायालय भी समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में केन्द्र सरकार के विचार जानना चाहती है।वहीं दूसरी ओर, जब हर धर्म का कानून एक सा होगा, तब वास्तव में सभी नागरिकों के अधिकार और कानून एक होने की बात कही जा सकती है। उस स्थिति में नागरिकों में एकता बढ़ेगी। और हां, जब समान कानून होगा तो कोई अलग-अलग धर्मों का इस्तेमाल अपनी राजनीति चमकाने के लिए नहीं कर सकेगा। जिससे वोटों के ध्रुवीकरण में भी कमी आएगी, और निष्पक्ष चुनाव में मदद मिलेगी।

 


  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •