अब सोशल मीडिया पर फेक न्यूज डाली तो समझो शामत आई

मोदी सरकार ने सोशल मीडिया और ओवर-द-टॉप यानी की OTT प्‍लेटफॉर्म्‍स के लिए गाइडलाइंस जारी कर दी हैं। नई गाइडलाइंस के दायरे में फेसबुक, ट्विटर जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्‍स और नेटफ्लिकस, ऐमजॉन प्राइम, हॉटस्‍टार जैसे OTT Platforms आएंगे। मोदी सरकार में मंत्री जावड़ेकर ने बताया कि इसके संबंध में दिशा निर्देश तैयार किए जा चुके हैं और जल्द ही उन्हें लागू किया जाएगा।

सोशल मीडिया के लिए नई पॉलिसी

सरकार ने गाइडलाइंन जारी करते हुए बोला कि भारत में सोशल मीडिया कंपनीज का स्वागत है, वो भारत में करोबार कर सकते हैं लेकिन यह बेहद जरूरी है कि यूजर्स को सोशल मीडिया के दुरुपयोग को लेकर सवाल उठाने के लिए फोरम दिया जाए। मोदी सरकार के मंत्री रविशंकर प्रसाद ने इस बाबत बोला कि उनकी सरकार असहमति के अधिकार का सम्‍मान भी करते है। लेकिन हमारे पास कई शिकायतें सोशल मीडिया पर मार्फ्ड तस्‍वीरें शेयर करने की आई तो दूसरी तरफ इसका इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों के लिए इनका इस्‍तेमाल हो रहा है। इन सब पर रोक लग सके इसके लिये ही सरकार ने नई पॉलिसी लाये हैं जो इस प्रकार है:

सोशल मीडिया पॉलिसी में क्‍या है?

  • दो तरह की कैटिगरी हैं: सोशल मीडिया इंटरमीडियरी और सिग्निफिकेंड सोशल मीडिया इंटरमीडियरी।
  • सबको ग्रीवांस रीड्रेसल मैकेनिज्‍म बनाना पड़ेगा, 24 घंटे में शिकायत दर्ज होगी और 14 दिन में निपटाना होगा।
  • अगर यूजर्स खासकर महिलाओं के सम्‍मान से खिलवाड़ की शिकायत हुई तो 24 घंटें में कंटेंट हटाना होगा।
  • सिग्निफिकेंड सोशल मीडिया को चीफ कम्‍प्‍लायंस ऑफिसर रखना होगा जो भारत का निवासी होगा।
  • एक नोडल कॉन्‍टैक्‍ट पर्सन रखना होगा जो कानूनी एजेंसियों के चौबीसों घंटे संपर्क में रहेगा।
  • मंथली कम्‍प्‍लायंस रिपोर्ट जारी करनी होगी।
  • सोशल मीडिया पर कोई खुराफात सबसे पहले किसने की, इसके बारे में सोशल मीडिया कंपनी को बताना पड़ेगा।
  • हर सोशल मीडिया कंपनी का भारत में एक पता होना चाहिए।
  • हर सोशल मीडिया प्‍लेटफॉर्म के पास यूजर्स वेरिफिकेशन की व्‍यवस्‍था होनी चाहिए।
  • सोशल मीडिया के लिए नियम आज से ही लागू हो जाएंगे। सिग्निफिकेंड सोशल मीडिया इंटरमीडियरी को तीन महीने का वक्‍त मिलेगा।

इसी तरह ही OTT प्‍लेटफॉर्म्‍स के लिये भी नई गाइडलाइंस लाई गई है जो इस प्रकार है:

ओटीटी प्‍लेटफॉर्म्‍स के लिए क्‍या हैं गाइडलाइंस?

  • OTT और डिजिटल न्‍यूज मीडिया को अपने बारे में विस्‍तृत जानकारी देनी होगी, रजिस्‍ट्रेशन अनिवार्य नहीं है।
  • दोनों को ग्रीवांस रीड्रेसल सिस्‍टम लागू करना होगा। अगर गलती पाई गई तो खुद से रेगुलेट करना होगा।
  • OTT प्‍लेटफॉर्म्‍स को सेल्‍फ रेगुलेशन बॉडी बनानी होगी जिसे सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज या कोई नामी हस्‍ती हेड करेगी।
  • सेंसर बोर्ड की तरह OTT पर भी उम्र के हिसाब से सर्टिफिकेशन की व्‍यवस्‍था हो। एथिक्‍स कोड टीवी, सिनेमा जैसा ही रहेगा।
  • डिजिटल मीडिया पोर्टल्‍स को अफवाह और झूठ फैलाने का कोई अधिकार नहीं है।

मतलब साफ है कि आने वाले दिनो में सोशल मीडिया में आप कुछ भी पोस्ट कर रहे है तो अपने कंटेट को जरूर चेक करके डाले क्योकि अगर अब आप ने सिर्फ मजे मजे में या फिर देश का माहौल खराब करने के लिये पोस्ट किया है तो समझ लीजिये कि अब आप पर कार्यवाही भी हो सकती है।