अब यह जमीनी आँकड़े बोलते हैं: तीन तलाक को बैन करना ऐतिहासिक फैसला था

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31 जुलाई2019, वो दिन जिस दिन देश में एक विशेष वर्ग की महिलाओं को वो मिला जिसका इंतजार वो पैदा होने के बाद से ही करती आई थी। आजादी के 70 साल के बाद भी महज वोट बैंक कमजोर न हो इसके लिए तीन तलाक बिल को सरकारे लटकाती आई थी लेकिन मोदी सरकार ने अपनी दूसरी पारी की शुरूआत होते ही मुस्लिम महिलाओ के पैर पर पड़ी तीन तलाक ही बेड़ी खोल कर एक सच्चे भाई का वचन निभाया। आज एक साल इस कानून लागू होने के पूरे हो गये है। ऐसे में कितना बदला है मुस्लिम महिलाओं का जीवन चलिए इसपर एक नजर डालते हैं।

मुस्लिम महिलाओं के जीवन में आया बड़ा परिवर्तन

तीन तलाक खत्म होने के बाद मुस्लिम महिलाओं को आज वो सब मिल रहा है जिसकी वो हकदार थी। ऑकड़े भी कुछ यही बता रहे है। केंद्रीय अल्पसंख्यक मंत्रालय की माने तो इस कानून को खत्म करने के बाद तलाक के 82 फीसदी मामले कम हो गये है। कानून लगने से पहले जहां यूपी में पहले 63,400 मामले थे तो महज साल भर के भीतर महज 281 मामले ही सामने आये है। बिहार में पहले जहां 38,617 मामले देखे गये तो कानून लागू होने के बाद सिर्फ 49 मामले रिपोर्ट किये गये। इसी तहर राजस्थान में 33,122 और कानून के लागू होने के बाद 83, हरियाणा में 29,201 तो बाद में 26, तेलगांना-आंध्र प्रदेश में 41,382 तो बाद में 203, महाराष्ट्र में 39,200 मामले जबकि तीन तलाक लागू होने के बाद 102, केरल में 23,300 तो बाद में 19, तमिलनाडु में 21,200 तो बाद में सिर्फ 26, असम में 19,008 बाद में 17, पश्चिम बंगाल 51,800 से अब 201 मामले और मध्य प्रदेश 22,801 तो बाद में 32 मामले ही देखे गये। इन ऑकड़ो से ये साफ होता है कि सरकार ने मुस्लिम महिलाओं का स्वाभिमान इस कानून को खत्म करके वापस दिया है।

मुस्लिम महिला अधिकार दिवस’ के रूप में मनाया गया आज का दिन

ट्रिपल तलाक कानून को संसद से पास हुए एक साल पूरा हो गया है। इसी खुशी में महिलाओं ने आज के दिन को ‘मुस्लिम महिला अधिकार दिवस’ के रूप में मनाया। इस मौके पर केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी,  कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद सहित कई मंत्रियों ने इसे ऐतिहासिक दिन बताते हुए पीएम मोदी की तारीफ की और मुस्लिम महिलाओं के सशक्तिकरण का श्रेय दिया। केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने  कहा कि मोदी सरकार ‘सियासी शोषण’ नहीं बल्कि ‘समावेशी सशक्तिकरण’ के संकल्प के साथ काम करती है और तीन तलाक को खत्म करके मुस्लिम समाज की आधी आबादी को सम्मान, सुरक्षा और समानता दिलाने का काम किया है। ऐसे ही कई शहरों में मुस्लिम महिलाओ ने जश्न मनाकर आज के दिन को एक बड़ा दिन करार दिया और बोला कि मोदी जी ने सच्चे भाई का फर्ज निभाया है जिनके कारण आज उनका जीवन खुशनुमां हो गया है।

कुलमिलाकर  तीन तलाक को खत्म करके मुस्लिम समाज की वर्षों से पीड़ित महिलाओं को सम्मान, सुरक्षा और समानता  का अधिकार मिल गया है। 31 जुलाई एक तरह से  मुस्लिम महिलाओं को 3 तलाक की कुप्रथा, कुरीति से मुक्त करने का दिन है, जो भारत के इतिहास में ‘मुस्लिम महिला अधिकार दिवस’ के रूप में दर्ज हो चुका है। यह दिन भारतीय लोकतंत्र और संसदीय इतिहास के स्वर्णिम पन्नों का हिस्सा भी है क्योकि इस कानून का सभी ने समर्थन किया था जिसके चलते एक इतिहास रचा गया।


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