अब राष्ट्रहित में होते है फैसले, भारत की रिफाइनरी कंपनियों ने रूस से रियायती दर पर तेल खरीदा

भारत  के वैध तरीके से ऊर्जा खरीदने का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए और जो देश तेल के मामले में आत्मनिर्भर हैं या जो खुद रूस  से तेल आयात करते हैं वे प्रतिबंधात्मक व्यापार का वकालत नहीं कर सकते हैं। ये बात भारत ने दुनिया के उन मुल्कों सो साफ शब्दों में बोला है जो रूस से भारत के तेल खरीदने या ना खरीदने पर ज्ञान दे रहे है।  इसके साथ साथ इंडियन ऑयल ने 30 लाख बैरल कच्चा तेल रूस से खरीदा है।

भारत की रिफाइनरी कंपनियों ने रूस खरीदा ऑयल

भारत की रिफाइनरी कंपनियों ने रूस से रियायती दर पर तेल खरीदने के प्रयास तेज कर दिए है। मीडिया रिपोर्ट के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कार्पोरेशन लिमिटेड ने रूस से 20 लाख बैरल कच्चा तेल खरीदा है। इससे पहले इंडियन आयल कारपोरेशन ने भी रूसी कच्चा तेल खरीदा था। सूत्रों के मुताबिक, इंडियन आयल कारपोरेशन के बाद हिंदुस्तान पेट्रोलियम कार्पोरेशन लिमिटेड ने रूसी क्रूड ऑयल खरीदने के लिए यूरोपीय व्यापारी विटोल को माध्यम बनाया है। देश की शीर्ष ऑयल कंपनी इंडियन आयल कार्पोरेशन ने पिछले हफ्ते के आखिर में यूरोपीय व्यापारी विटोल के माध्यम से 30 लाख बैरल यूराल कच्चा तेल खरीदा था, जिसकी मई में डिलीवरी होनी है। इसके साथ ही हिंदुस्तान पेट्रोलियम कार्पोरेशन लिमिटेड ने इस सप्ताह 20 लाख बैरल कच्चा तेल खरीदा है। इसकी भी मई में डिलीवरी होनी है। इससे विश्व में बनी स्थिति के बीच भारत में पेट्रोल के दामों पर असर कम पड़ता दिखाई देगा।

दूसरे देशों के अपेक्षा भारत में नहीं बढ़े दाम

रूस यूक्रेन जंग के बीच भारत के लिए एक अच्छी खबर यही है कि देश में पेट्रोल के दाम फिलहाल अबी स्थिर है और कयास लगाया जा रहा है कि जिस तरह से रूस से सस्ते में भारत को पेट्रोल देने की पेशकश की है उससे देश में ऑयल के दाम ज्यादा नहीं बढ़ने वाले। रूस से भारत आज रूपये में तेल खरीदे जा रहा है जो एक बेहतर कदम होगा। वैसे अभी देखा जाये तो अमेरिका सहित यूरोप के कई बड़े देश है जहां ऑयल के दामो में 58 फीसदी की बढ़ोत्तरी देखी जा रही है। जबकि भारत में ये बढ़ोत्तरी महज 5 फीसदी ही है जो सरकार की नीतियों के चलते हो पाया है।

 

फिलहाल जिस तरह से रूस से तेल खरीदा जा रहा है उससे देश के विपक्ष को जरूर चोट पहुंच रही है क्योकि उन्हे इस मौके पर भी सरकार को घेरने का मौका हाथ नही लग पा रहा है और यही तो मोदी सरकार की कूटनीति है जो आपदा के वक्त ऐसे कदम उठाती है कि विपक्ष खाली हाथ ही मलता रहता है।