पीएम मोदी की बात अब तो समझो CAA का विरोध करने वालों

राष्ट्रपति के अभिभाषण पर पीएम मोदी जैसे जैसे बोल रहे ते उससे ये साफ हो रहा था कि विपक्ष ने CAA और NPR को लेकर जो भ्रम देश की जनता के बीच में फैलाया है वो पूरी तरह से गलत है। इसके साथ साथ विरोध करने वालो को उस स्थिति में लाकर खड़ा कर दिया है कि आज उनके कथित हित राष्ट्रहित से मेल खाते नहीं दिख रहे है।

पीएम ने एक बार फिर भ्रम को दूर किया

यह अच्छा हुआ कि CAA को विभाजनकारी बताने के दुष्प्रचार का पर्दाफाश करने के लिए प्रधानमंत्री ने न केवल नेहरू जी की उस चिट्ठी का जिक्र किया जिसमें उन्होंने असम के तत्कालीन मुख्यमंत्री से पूर्वी पाकिस्तान से आने वाले अल्पसंख्यकों की विशेष चिंता करने को कहा था, बल्कि लाल बहादुर शास्त्री और राम मनोहर लोहिया के उन बयानों का भी उल्लेख किया जिनमें पड़ोस के प्रताड़ित अल्पसंख्यकों के प्रति नरमी बरतने की अपेक्षा जताई गई थी। पीएम मोदी के इन उदाहरण देते वक्त विपक्ष बिलकुल मौन था वो इस लिये क्योकि पीएम के एक एक शब्द का तोड उसके पास नही था और उसका ये झूठ साफ हो गया कि ये कानून देश में रह रहे मुसलमानों के खिलाफ है। हालाकि पीएम ने एक बार फिर से सदन में साफ कहा कि इस कानून से देश के मुस्लिम समाज का अहित नहीं होगा। इस बायन के बाद अब इसका विरोध जो लोग कर रहे है और धरने पर बैठे है वो सिर्फ सियासत कर रहे है।

यूरोपीय संसद को समझ में आ गया, पर देश के सांसदो को क्यो नही

इसके साथ साथ पीएम ने एक उदाहरण ये भी दिया कि आज देश यह देख-समझ रहा है, कि संविधान की बातें करके संवैधानिक तौर-तरीकों के खिलाफ कौन काम कर रहा है? क्या विपक्षी दल उस स्थिति को स्वीकार करेंगे जिसके तहत पंजाब, राजस्थान, मध्य प्रदेश, बंगाल, केरल आदि की जिला पंचायतें इन सरकारों द्वारा पारित किसी कानून को लागू करने से इन्कार कर दें? क्या इससे बुरी बात और कोई हो सकती है कि यूरोपीय संसद को तो यह समझ आ गया कि भारतीय संसद के किसी फैसले पर चर्चा करना ठीक नहीं, लेकिन हमारी अपनी राज्य सरकारों को यह समझ नहीं आया कि वे संसद से पारित कानून को लागू करने से इन्कार कर न केवल घोर असंवैधानिक काम कर रही हैं, बल्कि विरोध की आग में घी डालने का काम कर रही हैं।

जो लोग इसके बाद भी अगर CAA को लेकर सरकार की मंशा पर शक कर रहे है तो ये पक्का है कि वो या तो सियासत कर रहे है या फिर वो समझना नहीं चाहते लेकिन पीएम मोदी ने एक बात सही कही थी ‘कि देश सब देख रहा है और समझ भी रहा है।’