दुश्मन देश की सेना ही नहीं अब तो आतंकी भी पढ़ते है भारतीय फौज के कसीदे

“मां, तू फिक्र न कर, मैं जल्द ही लौट आऊंगा। बस दुआ करना कि खुदा ने जो मौका मुझे दिया है, मैं उसका सही फायदा उठाऊं”

ये शब्द 19 वर्षीय आतंकी अली बाबर के है जो भारत में दहशत फैलाने के लिये आया था जिसे पाकिस्तान सेना ने भारत की सेना के प्रति झूठ बोलकर इतना क्रूर बना दिया था जो सेना के जवानों को मारने के लिये किसी हद तक भी जाने को तैयार था। लेकिन आज वो पूरी तरह से बदल गया है और पाक सेना पर ही सवाल खड़ा कर रहा है और उनकी पोल खोल रहा है।

भारतीय फौज के गुणगान गाता पाक आतंकी

पाकिस्तान के ओकाड़ा का रहने वाला अली बाबर ने कहा कि मैंने तो सुना था कि यहां कश्मीर में हिंदुस्तानी फौज कश्मीरी नौजवानों को देखते ही गोली मार देती है, उन पर जुल्म करती है। इन्होने तो मुझे बख्श दिया, फिर यह कैसे यहां नौजवानों पर गोली चला सकते हैं, कैसे किसी औरत की अस्मत पर हाथ डाल सकते हैं। मैंने जो सुना था, वह गलत सुना था। 19 वर्षीय अली बाबर अपने सात अन्य साथियों संग कश्मीर में खून की होली खेलने के लिए बीते सप्ताह हथियारों का एक बड़ा जखीरा लेकर गुलाम कश्मीर से एलओसी पार कर उड़ी सेक्टर में दाखिल हुआ था। सेना के जवानों ने उसे व उसके साथियों को घेर लिया था। वह रविवार की शाम को पकड़ा गया था। उसका एक साथी उसके सामने ही मारा गया, जबकि अन्य साथी जिंदा बचे हैं या मारे गए, उसे नहीं पता। लेकिन, वह कहता है कि जिस तरह की लड़ाई हुई है, शायद ही उसका कोई साथी जिंदा बचा होगा। आतंकी के बयान के बाद ये तो साफ हो गया है कि कैसे पाकिस्तान कश्मीरी युवको के साथ साथ अपने यहां के युवाओं का गलत इस्तेमाल कर रही है।

सीमा पार से पाकिस्तान भेजता है आतंकी

सातवीं पास अली बाबर ने कहा कि घर में गरीबी बहुत है। बाप की मौत हो चुकी थी। एक बहन और मां है। करीब दो साल पहले मैं लश्कर-ए-तोयबा के एक कैंप कमांडर के साथ संपर्क में आया था। मैं मदरसे और मजलिसों में जाता था। वहां कश्मीर को लेकर तकरीरें होती थीं। कश्मीर में जुल्म की कहानियां सुनाई जाती थी। इस्लाम और जिहाद की बात होती थी। काम धंधा कोई नहीं था। फिर पता चला कि जिहादी बनने पर पैसा भी मिलेगा। मैं लश्कर-ए-ताइबा में शामिल हो गया। दो साल पहले मैने गढ़ी हबीबुल्ला कैंप में दौरा-ए-आम की ट्रेनिंग की और 22 दिन बाद मैं अपने घर चला गया। इसी साल 13 अप्रैल को मुझे कैंप में बुलाया गया। सात दिन बाद मुझे हालन में सवाई नाला के पास बने कैंप में भेजा गया। चार माह तक फिर ट्रेनिंग चली। इस दौरान हमने जीपीएस, रेडियो सेट का इस्तेमाल करना, हथियार चलाना, मैट्रिक्स कोड तैयार करना और उसका इस्तेमाल करना सीखा। फिर हमें कश्मीर चलने का हुक्म मिला जिसके बाद भारतीय फौज ने मेरे साथी को मार गिराया और मुझे गिरफ्तार कर लिया।

फिलहाल ये पहला मौका नही है जब एक आतंकी पाक की पोल खोल रहा है। ऐसे में इमरान मियां अभी भी संभल जाओ और आतंक का रास्ता छोड़ अमन के रास्ते पर चलो वरना फिर मत कहना चेतावनी नहीं दी क्योकि अबकी बार सर्जिकल स्ट्राइक अगर हुई तो समूचे पाक में होगी।