प्याज ही नहीं सत्ता से दूर कर देता है मीठा मीठा रसगुल्ला

यूं तो सब जानते है कि प्याज ने कई नेताओं के आंसू चुनाव के वक्त निकाले है क्योकि उन्हे प्याज के बढ़े भाव के कारण सत्ता गवानी पड़ी है लेकिन क्या आपने ये सुना है कि रसगुल्ले के चलते किसी नेता को सरकार गँवानी पड़ी तो जनाब ऐसा बंगाल में हुआ है जब रसगुल्ले  के चलते बंगाल में कांग्रेस की सरकार गिर गई थी।

बंगाली रसगुल्ले की रेसिपी | रसगुल्ले की रेसिपी| बंगाली रसगुल्ले की रेसिपी -  Hindi Boldsky

जब ‘रसगुल्‍ले’ ने गिराई सरकार

1967 के विधानसभा चुनाव में इलेक्‍शन से ठीक पहले कांग्रेस को छोड़ कर नई पार्टी बनाने वाले अजय मुखर्जी प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। इससे पहले प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी और प्रफुल्ल चंद्र सेन मुख्यमंत्री थे। वो लोकप्रिय नेता थे पर उन्हें जनहित मे कड़े फैसले लेने वाले नेता के तौर पर जाना जाता था। 1965 में प्रफुल्ल चंद्र सेन को पता चला कि पश्चिम बंगाल में लोगों को पीने के लिए जरूरी मात्रा में दूध नहीं मिल पा रहा है। कारण पता किए गए तो मालूम चला कि छेने की मिठाई बनाने में दूध का इस्तेमाल ज्यादा हो रहा है। इसलिए उन्होंने दूध से बनने वाली मिठाइयों पर पाबंदी लगा दी। इसकी वजह से बंगाल में लोकप्रिय रसगुल्ला बनना बंद हो गया। रसगुल्ले के शौकीन नाराज हो गए और इसी दौरान चुनाव हुए तो रसगुल्ले की वजह से प्रफुल्ल चंद्र सेन को हार का मुंह देखना पड़ा।

रसगुल्‍ले का इतिहास

आज भी पश्चिम बंगाल की राजनीति में रसगुल्ले का बहुत महत्व है। किसी भी राजनीतिक दल का अभियान बिना रसगुल्ले की तस्वीर के नहीं दिखता। बंगाल का रसगुल्ले से युगो पुराना नाता रहा है। मिट्टी की कटोरी, उसमें रस से भरा ‘रोसोगुल्ला’,  बंगाल की पहचान सिर्फ उसकी संस्कृति ही नहीं उसकी मिठास भी है और इसी मिठास का दीवाना पूरा देश है। बंगाल में चितपुर को रसगुल्ले की जन्मस्थली कहा जाता है। आज भी चितपुर के रसगुल्ले समूचे देश में मशहूर है। रसगुल्ला के स्वाद ने देशभर में बंगाली मिठाई के नाम से प्रचलित दुकानों के लिए जगह तैयार की। भारत में वैसे तो हर इलाके की अपनी मिठाई होती है, पर उन सबके बीच छेने से बनी मिठाई का स्थान रहता है। मिठाई की दुनिया में सबकी सहमति से रसगुल्ले ने अपनी जगह बनाई है। भले ही पूरे देश में रसगुल्ले का रंग सफेद हो, लेकिन बंगाल में ‘रोसोगुल्ला’ की मिठास के कई रंग मिलते हैं। आपको ये जानकर हैरानी होगी कि रसगुल्ला के साथ साथ रसमलाई नाम की प्रसिद्ध मिठाई को भी जन्म बंगाल में ही हुआ है।

मुझे यकीन है कि रसगुल्ले की इस कहानी को जानकर आपके मुंह में भी पानी आ चुका होगा और आप ये सोच रहे होगे कि बंगाल के रसगुल्ले का स्वाद तुरंत ले लेना चाहिये। लेकिन दोस्तो चुनावी समर में किस खेमे में खुशी का रसगुल्ला फूटेगा ये तो 2 मई को ही पता चलेगा। लेकिन इस बीच रसगुल्ले का स्वाद जरूर चुनावी प्रचार की चासनी में उबलता हुआ दिखा जायेगा।