धरती के स्वर्ग के लिए अच्छी खबर- जैश ए मोहम्मद का नेतृत्व संभालने को नहीं कोई तैयार

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कॉन्फ़्रेन्स_में_जनरल_ऑफिसर_कमांडिंग

जिस तरह से हमारी सरकार और भारतीय सेना अपने शौर्य से काम कर रही है, अब वों दिन दूर नहीं जब धरती के स्वर्ग कहे जाने वाले जम्मू-कश्मीर में अमन और शांति आएगी| पुलवामा हमले करने के बाद भारत ने जबावी करवाई कर बालाकोट एयर स्ट्राइक किया था| जिसमें जैश के कई आतंकी मारे गये थे| लेकिन भारत सरकार और भारतीय सेना यहाँ पर नही रुकी, लगातार घाटी में अपना सर्च ऑपरेशन चालू रखा, जिसमें अभी तक 69 आतंकी ढेर हुए हैं जिसमें जैश के टॉप 25 आतंकी भी शामिल हैं| आपको बता दें की साल 2018 में सुरक्षबलों ने 272 आतंकवादियों का अंत किया था, जो कि भारतीय सेना के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है|

जैश का नेतृत्व संभालने को नहीं कोई तैयार

श्रीनगर की चिनार कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल ढिल्लन ने कहा, “हमने जैश-ए-मोहम्मद के नेतृत्व को निशाना बनाया और अब स्थिति ऐसी है कि कोई भी घाटी में जैश की कमान नहीं संभालना चाहता|” डीजीपी सिंह ने कहा कि घाटी में 14 फरवरी को हुए पुलवामा आतंकवादी हमले जैसे कुछेक मामलों को छोड़ 2018 में और उसके बाद से अब तक आतंकवाद को रोकने में कामयाबी मिली है|

पुलिस ने बुधवार को कहा कि बड़ी संख्या में कश्मीरी युवा आतंकवाद से दूर हो गए, लेकिन सुरक्षा कारण से सटीक संख्या प्रकट करना ठीक नहीं होगा| “ऐसे कई युवा हैं, जिन्होंने या तो आत्मसमर्पण कर दिया है या उन्हें आतंकवाद में शामिल होने से रोक दिया गया है| पुलिस प्रमुख दिलबाग सिंह ने कहा, “हम उनकी सुरक्षा के लिए सटीक संख्या प्रकट नहीं कर सकते|” उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में 2018 में कानून व्यवस्था की स्थिति में सकारात्मक सुधार देखे हैं|

उन्होंने कहा, “स्थानीय युवाओं की आतंकवाद में भर्ती बहुत कम हो गई है और उम्मीद है कि आगे कम होगी,” उन्होंने कहा, 2018 से अब तक 272 आतंकवादी मारे गए और कई पकड़े गए| आतंकवादियों के लिए काम कर रहे बड़े पैमाने पर मॉड्यूल का भी भंडाफोड़ किया गया है और जो गिरफ्तार हुए हैं वे न्यायिक हिरासत में हैं|”

पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) दिलबाग सिंह ने कहा, “पथराव की घटनाओं में भारी गिरावट आई है और कानून-व्यवस्था में सुधार हुआ है|” वही सुरक्षाबलों ने लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादी संगठन में भारी सेंध लगाई है| उन्होंने कहा कि राज्य में पंचायत चुनाव सफलतापूर्वक संपन्न हुए और जम्मू-कश्मीर में चल रहे संसदीय चुनावों में भी कोई भी चुनाव संबंधी हिंसा नहीं हुई है|

कॉन्फ़्रेन्स में जनरल ऑफिसर कमांडिंग (जीओसी) लेफ्टिनेंट जनरल कंवल जीत सिंह ढिल्लों ने कहा कि “बड़ी संख्या में आतंकवादियों के सफाए के कारण कश्मीर में जैश का नेतृत्व करने के लिए कोई आगे नहीं आ रहा है|” ढिल्लन ने कहा कि पुलवामा हमले के बाद इस साल अभी तक 69 आतंकियों को मार गिराया जा चुका है 12 को ज़िंदा पकड़ा गया, जिनमें जैश के 25 आतंकियों ढेर हुए हैं| उसमें 13 पाकिस्तान से आए आतंकी शामिल हैं|

उन्होंने कहा कि लश्कर ने बडगाम मुठभेड़ के दौरान बंधक बनाकर रखने के बाद एक जवान लड़के की हत्या कर दी थी, कश्मीरियों को यह पूछना चाहिए कि क्या यह जिहाद है| जीओसी ने स्थानीय युवाओं से भी अपील की है कि वे मुठभेड़ के दौरान या उसके बाद मुठभेड़ स्थलों पर न आएं. श्रीनगर के पुलिस कंट्रोल रूम में सेना और जम्मू पुलिस और सीआरपीएफ ने साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इसकी जानकारी दी है|

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान डीजीपी दिलबाग सिंह ने कहा कि बीते साल 2018 में बड़ी संख्या में आतंकियों की गिरफ्तारी भी हुई थी। इस कार्रवाई के बाद घाटी में आतंक का रास्ता चुनने वाले युवाओं की संख्या में काफी कमी भी आई, जो कि एक अच्छा संकेत है।

कुछ महीनें पहले सरकार ने कई हुर्रियत नेताओं को सुरक्षा देने से माना कर दिया साथ ही कई बड़े और छोटे नेताओं को जेल और उनकी जमीने जप्त कर ली गयी है| अब लगातर ऐसे कदम उठाने से वहां के लोग भी सेना का साथ देना शुरू कर दिया है|

 


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