कोई ऐसे ही नहीं नरेंद्र दामोदर दास मोदी बन जाता है

पीएम मोदी आज अपना 70वां जन्मदिन मना रहे है। आज पीएम जिस मुकाम पर खड़े है वहां से देखो तो सब कुछ बहुत अच्छा ही अच्छा दिखता है। लेकिन यहां तक का सफर उनका ऐसे ऐसे संघर्ष की कहानी बुनकर तैयार हुआ है जिसको जानने मात्र से ही नकरात्मकता खत्म हो जाती है और ऊर्जा का ऐसा संचार होता है, जिसका कहना ही क्या। वैसे मोदी जी के जीवन पर बहुत कुछ लिखा गया है। आज हम आपको मोदी जी कि वो बात बताते है जिसको शायद आप नही जानते होंगे।

किस स्वतंत्रता सेनानी की अस्थियां लेने मोदी स्विटजरलैंड गए थे?

आखिर कौन था वो स्वतंत्रता सेनानी, जिसकी अस्थियां लेने के लिए मोदी स्विटजरलैंड गए, वो भी आजादी के पूरे 56 साल बाद। इतना ही नहीं उनकी याद में एक शानदार इमारत भी उन्हीं के गांव में बनाई, आखिर कौन था वो स्वतंत्रता सेनानी जिसके लिए नरेंद्र मोदी ने भागीरथ जैसा काम किया? चलिये हम आपको बताते है। उनका नाम था श्यामजी कृष्ण वर्मा। विदेशी धरती पर भारतीय क्रांतिकारियों का सबसे बड़ा मददगार,  श्यामजी कृष्ण वर्मा ने अपने जीवन भर की कमाई से लंदन में ‘इंडिया हाउस’ बनवाया था और भारतीय क्रांतिकारी युवाओं को लंदन में पढ़ने के लिए कई सारी स्कॉलरशिप्स शुरू कीं, उनको इंडिया हाउस में वो रुकने का ठिकाना देते थे। उनकी स्कॉलरशिप से ही वीर सावरकर जैसे क्रांतिकारी लंदन पहुंचे। मदन लाल धींगरा जैसे कई क्रांतिकारियों को वहां शरण मिली और वहीं से सावरकर ने इंग्लैंड और यूरोप के क्रांतिकारियों को एकजुट किया और भारत के क्रांतिकारियों को तमाम तरह की मदद की। श्यामजी कृष्ण वर्मा 1907 में सावरकर को इंडिया हाउस की जिम्मेदारी देकर पेरिस निकल गए और प्रथम विश्व युद्ध में फ्रांस और ब्रिटेन की दोस्ती हो गई तो वहां से पत्नी भानुमति के साथ वो स्विटजरलैंड चले आए, वहां उन्होंने एक अस्थि बैंक ‘सेंट जॉर्ज सीमेट्री’ में फीस जमा करवाकर उनसे अनुबंध किया कि वो पति-पत्नी दोनों की अस्थियों को संभालकर रखेंगे, आजादी के बाद कोई देशभक्त आएगा और उनकी अस्थियां देश की सरजमीं पर ले जाएगा। लेकिन आजादी के बाद आई सरकारें उन्हें भूल गईं। 22 अगस्त 2003 को लगभग 56 साल बाद मोदी जेनेवा से उन दोनों की अस्थियां लेकर आए तब वो गुजरात के सीएम थे।

सेवा भारती जैसे संगठन के पीछे मोदी की मेहनत

कोरोना काल में आपने आरएसएस की सेवाभारती की टीम की खबरे खूब सुनी होगी कि कैसे इसके सदस्य गरीब और मजबूरों को खाना, दवा या दूसरी सेवाए दे रहे थे। लेकिन क्या आपको पता है कि आरएसएस में  सेवाभारती को तैयार किसने किया था? चलिए हम बताते है पीएम मोदी ने इसकी स्थापना की थी। 1979 की बात है, जब मोरवी (गुजरात) में मच्छू नदी पर बने बांध में दरार आ गई, बांध टूट गया और भयंकर बाढ़ आ गई। उस दौरान करीब 20 हजार लोगों की मौत हो गई थी, नरेंद्र मोदी उस दिन चेन्नई में थे। फौरन दिल्ली आए, वहां से वाया मुंबई राजकोट पहुंचे। दिल्ली में उन्होंने उन दिनों संघ के वरिष्ठ नेता नानाजी देशमुख से मुलाकात की और चर्चा की कि कैसे सेवा कार्यों के लिए संघ को संगठित तौर से करना चाहिए। उस बाढ़ के लिए तो एक बाढ़ राहत समिति बनाई ही गई, ट्रस्ट को रजिस्टर्ड करवाया गया और 50 लाख रुपए का चंदा इकट्ठा किया गया। ये सब नरेंद्र मोदी ने किया। बाढ़ पीड़ितों की तमाम तरीके से मदद के अलावा मोरबी में उनके लिए एक कॉलोनी भी बनवाई गई। ये वो योजना थी, जिसे बाद में संघ ने सेवा भारती जैसा संगठन बनाकर अपना लिया। आज संघ से बिना स्वार्थ के इतने स्वंयसेवक जुड़े रहते हैं, तो काफी कुछ वजह सेवा भारती के लगातार गरीबों के लिए चलने वाले सेवा कार्य ही हैं।

वैसे मोदी जी से जुड़ी ऐसी और भी कई बात होगो लेकिन ये दो बाते ये साफ बताती है कि देश के प्रति उनका प्यार और देशपर मर मिटने वालो के प्रति उनका सम्मान कितना अधिक है। शायद देश के लिए अच्छा करने की प्रेरणा भी इनको यही से मिलती है। तभी तो वो नये भारत को आत्मनिर्भर बनाने का मंत्र दे पाते है।