नफरत कितनी भी असरदार हो, मोहब्बत पर भारी नहीं पड़ती

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नॉर्थ ईस्ट दिल्ली जहां एक ओर नफरत की आग में झुलस रहा था, तो इस बीच कुछ ऐसी खबरे भी आ रही थी जो दिल को सुकून देने वाली थी, वो थी आपसी भाईचारे की खबरे, जो ये बता रही थी कि नफरत कितनी भी असरदार हो पर मोहब्बत पर हमेशा हल्की ही पड़ती है।

खुद झुलस कर प्रेमकांत ने मुस्लिम पड़ोसी को बचाया

मामला शिव बिहार का है, जहां प्रेमकांत बघेल ने अपने मुस्लिम पड़ोसी का जलता हुआ घर देखकर, पड़ोसियों को बचाने के लिए जान की बाजी लगा दी। और उन्हे बचा लिया; जबकि वो इस दौरान घायल हो गये और आज अस्पताल में भर्ती डॉक्टरो की माने तो वो वैसे तो खतरे से बाहर है। इस दौरान प्रेमकांत का कहना है कि वो घायल जरूर हो गये हो लेकिन उन्हे इस बात की खुशी है कि उन्होने अपने पड़ोसियों को बचा कर इंसानियत का फर्ज अदा किया।

मुसलमानों के लिये खोल दिये अपने आशियाने

नार्थ ईस्ट दिल्ली के अशोक नगर में करीब 40 मुस्लिमों के लिए उनके हिंदू पड़ोसी सहारा बने हैं। उस वक्त जब उनके घर आग में जल रहे थे। इस बीच इन लोगो की चर्चा न के बराबर हो रही है। क्योकि आग लगाने वाले ज्यादा पूजे जा रहे है, जबकि आग बुझाने वालो की कोई सुध नही ले रहा है।

राख होने से बचाईं 50 दुकानें

मौजपुर-बाबरपुर मेट्रो स्टेशन से चंद कदम दूर कर्दमपुरी-कबीर नगर के सामने विजय पार्क का इलाका। यहां मंगलवार को जमकर पथराव हुआ और गोलियां चलीं। यहां की सड़क अभी भी ईंट-पत्थरों से लाल है। लेकिन इलाके के लोगों ने हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल दी है। इस मिसाल की बदौलत ही कम से कम 50 दुकानों को जलने से बचा लिया गया।

तीन दिन से भूखे परिवार को पुलिस ने खिलाया खाना

जिस दिल्ली पुलिस पर कुछ लोग सवाल खड़े कर रहे है, उस दिल्ली पुलिस ने एक तरफ जहां दंगाइयों को रोकने का काम किया तो दूसरी तरफ बिना मजहब जाने लोगो की मदद भी की। कुछ महिलाओं को और बच्चो को जहां उनके घर तक छोड़ा, तो दूसरी तरफ शिव बिहार के एक स्कूल में जब दंगाइयों ने आग लगा दी तो उसके गार्ड ने स्कूल में छुपकर अपनी जान बचाई थी। लेकिन इसके चलते वो तीन दिन से भूखे थे और इसी दौरान जब पुलिस बल के लिए लंच आया तो क्राइम ब्रांच में तैनात सब इस्पेक्टर अरूण सिंधू ने उन्हे खाना खिलाकर एक मिसाल कायम की।

किडनी के मरीज नईम के लिये अजय बने भगवान

चमनपुरी इलाके का मंजर में सिर्फ हिंसा ही हिंसा दिख रही थी, तभी किडनी के मरीज नईम के लिये उनके पड़ोसी अजय देवदूत बनकर आये। डायलिसिस के अभाव में पड़े हुए नईम को जब कही से अस्पताल ले जाने के लिये एंबुलेंस नही मिल पा रही थी और उनके खुद के लोग उनकी मदद के लिये आगे नही आ रहे थे तब इलाके के अजय ने बिना अपनी जान की परवाह किये एंबुलेंस लाकर उन्हे अस्पताल पहुंचाकर एक ऐसी मिसाल पेश की जो दिल्ली की संस्कृति हुआ करती है।

लेकिन कुछ लोग अपने फायदे के लिये इन लोगों के बारे में बात न करके, ये जानने की कोशिश में लगे है, कि इस दंगे में किस वर्ग को ज्यादा नुकसान हुआ है। क्योकि उसके बाद उस पर सियासत की जा सके। लेकिन आग लगाना और सियासत करने वालों को इन दिल्लीवालों ने जो इंसानियत का पाठ पढ़ाया है, उससे आग लगाने वालों को जरूर सबक लेना चाहिये।

 


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