राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) के लिए किसी दस्तावेज की जरूरत नहीं

Amit Shah

राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनपीआर) को लेकर भ्रम दूर करने में जुटी सरकार ने एक बार फिर साफ किया है एनपीआर यानी राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर को अपडेट करते वक़्त ना तो किसी तरह के दस्तावेज़ की मांग की जाएगी और ना ही कोई बायोमेट्रिक डाटा लिया जाएगा. केन्द्रीय गृह मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि एनपीआर को सिर्फ़ अपडेट किया जा रहा है, जिसमें पहले से ही 119 करोड़ लोगों का डाटाबेस है. जो भी भारत में रहता है, सिर्फ उसकी गणना होगी. कैबिनेट से जनगणना 2021 के लिए 8,754.23 करोड़ और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) के अपडेशन के लिए 3,941.35 करोड़ की मंजूरी मिली है. इसके लिए एक विशेष ऐप तैयार किया गया है.

यह रजिस्टर नागरिकता अधिनियम 1955 के प्रावधानों के तहत स्थानीय, उप-जिला, जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर तैयार किया जाता है. एनपीआर के लिए प्रत्येक व्यक्ति के बारे में 15 जानकारियां जुटाई जाएंगी, जिसमें व्यक्ति का नाम, माता पिता, लिंग, जन्म, शैक्षणिक स्थिति, पता आदि शामिल हैं.

एनपीआर को अपडेट करने की प्रक्रिया 01 अप्रैल, 2020 से 30 सितंबर, 2020 के बीच घर-घर जाकर पूरी की जाएगी. गृह मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक रजिस्टर अपडेट करने को लेकर पिछले साल ही अधिसूचना जारी की गई थी, जिसे सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों ने दुबारा अधिसूचित किया. इतना ही नहीं जनगणना की तरह एनपीआर के लिए भी प्री टेस्ट सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में हुआ था, जिसमें ना तो किसी तरह की दिक्कत आई और ना ही कोई शिकायत सामने आई.

एनपीआर के लिए अलग मोबाइल एप्प तैयार किया गया है. इसके लिए प्रश्नावली मोटे तौर पर तैयार है, लेकिन उसको अंतिम रूप नहीं दिया गया है. प्री टेस्ट के दौरान पैन कार्ड का नंबर भी मांगा गया था, लेकिन एनपीआर अपडेट करने में अब पैन कार्ड का नंबर नहीं मांगा जाएगा. हालांकि प्रक्रिया के दौरान मातृभाषा के बारे में जानकारी मांगी जा सकती है. पहली बार एनपीआर साल 2010 में तैयार किया गया था, साल 2015 में एनपीआर को अपडेट किया गया.

अपडेशन के दौरान आधार नंबर, मोबाइल नंबर, ड्राइविंग लाइसेंस और वोटर आईडी कार्ड के बारे में जानकारी मांगी जा सकती है, हालांकि इसके लिए दस्तावेज़ नहीं मांगे जाएंगे. इनमें से कुछ चीजों के बारे में पहले के एनपीआर एक्सरसाइज में भी जानकारी मांगी जा चुकी है.

क्या है नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर

राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) सभी भारतीय निवासियों की पहचान का एक डेटाबेस है. ये डेटाबेस भारत के रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त द्वारा मैनेज किया जाता है. भारत के प्रत्येक सामान्य निवासी के लिए एनपीआर में पंजीकरण कराना अनिवार्य है. कोई भी व्यक्ति जो 6 महीने या उससे अधिक समय से किसी इलाके में रह रहा हो तो उसे नागरिक रजिस्टर में जरूरी रजिस्ट्रेशन कराना होता है.

क्या करेगा नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर?

– सरकारी योजनाओं के अन्तर्गत दिया जाने वाला लाभ सही व्यक्ति तक पहुंचे और व्यक्ति की पहचान की जा सके.
– सोशियो इकोनॉमिक कास्ट सेंसस (SECC) एनपीआर डेटा पर आधारित है, जिसे बाद में विभिन्न प्रकार के लाभार्थियों को तय करने के लिए उपयोग किया गया था. आयुष्मान भारत, जन धन योजना, प्रधान मंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना, सौभाग्या आदि योजनाओं के बेहतर लक्ष्यीकरण में घरेलू वार एनपीआर डेटा का उपयोग किया गया था.
– एनपीआर विभिन्न सरकारी योजनाओं/कार्यक्रमों के तहत लाभ के वितरण तंत्र को बेहतर बनाने में मदद करेगा.