मोदी लहर में न तो चला वंशवाद, न ही जातिवाद

2019 की मोदी लहर में ये तो साफ़ हो गया कि हिंदुस्तान की जनता अब ना तो अब जातिवाद पर भरोसा रखती है ना ही वंशवाद पर| इस बार के लोक सभा चुनाव में न तो जातिवाद करने वाले अपनी दाल गला पाए और न ही वंशवाद और परिवारवाद की राजनीति करने वालों की दाल गली|

बिहार और उत्तर प्रदेश जहाँ सदियों से जात-पात की राजनीति होती आई है, वहाँ भी लालू परिवार का पूरी तरह सफाया हो गया| वहीं उत्तर प्रदेश से मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव को छोड़कर परिवार के सारे नेता चुनाव हार गए|

आगे अगर बात करे हरियाणा की, तो यहाँ भी हुड्डा परिवार चुनाव हार गया| न केवल हुड्डा परिवार बल्कि पूर्व केंद्रीय मंत्री बिरेंद्र सिंह के बेटे भाजपा उम्मीदवार ब्रिजेंद्र सिंह ने पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला के पौत्र दुष्यंत चौटाला और पूर्व मुख्यमंत्री भजन लाल के परिवार की तीसरी पीढ़ी के भव्य बिश्ननोई को पराजित किया।

कहा जाता था मध्य प्रदेश में गुना की सीट और उत्तर प्रदेश में अमेठी, कांग्रेस का अभेद्य किला है| पर गुना में ज्योतिरादित्य सिंधिया को हार का सामना करना पड़ा| ऐसा 1957 के बाद पहली बार हुआ है कि सिंधिया परिवार का कोई भी व्यक्ति संसद में प्रतिनिधित्व नहीं करेगा| ऐसा ही कुछ हाल राहुल गाँधी का रहा, अमेठी से सोनिया गाँधी, राजीव गाँधी सभी सांसद रह चुके है| ऐसा पहली बार हुआ है की कांग्रेस को वहाँ भी हार का सामना करना पड़ा है|

ज्योतिरादित्य सिंधिया तो चुनाव हारे ही, मध्य प्रदेश में उनके और राहुल गाँधी के तथाकथित राजनैतिक गुरु दिग्विजय सिंह को भी हार का स्वाद चखना पड़ा| साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को बीजेपी ने दिग्विजय सिंह के खिलाफ खड़ा कर मध्य प्रदेश में भगवा कार्ड खेला था, जिसमें वो कामयाब रहे। साध्वी प्रज्ञा ने दिग्विजय सिंह को 3 लाख 66 हजार वोटों से हराया।

उधर राजस्थान में भी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत को भी हार का मुंह देखना पड़ा। उन्हें गजेंद्र शेखावत ने पौने 3 लाख वोटों से हराया।

महाराष्ट्र में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रमुख शरत पवार की बेटी सुप्रिया सुले पवार बारामती से तीसरी बार जीत गयी, लेकिन उनके भतीजे और पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार के पुत्र पार्थ मावल से चुनाव हार गए।

तेलंगाना में भी मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव की बेटी कविता कलवाकुंतला को निजामाबाद से हार का सामना करना पड़ा|

अगर देखा जाये तो इस बार के चुनाव में सिर्फ विकास का डंका बजा है, हिंदुस्तान की जनता ने पहली बार जात-पात से उठ कर अपनी सरकार का चुनाव किया है|