‘कानून के घर देर है पर अंधेर नहीं’, एक बार फिर साबित हुआ

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एक बार फिर से ये साबित हो गया कि कानून के दर पर देर जरूर है लेकिन अंधेर नही, क्योकि आज ये पक्का हो गया है कि निर्भया के दोषी की लाख कोशिश के बावजूद कल सुबह उन्हे फांसी दे दी जायेगी। वैसे दोषियों ने फांसी से एक दिन पहले भी इसे टालने के लिए हर तरह की पैंतरेबाजी की लेकिन कुछ काम नहीं आया। 

निर्भया के माता पिता का कानून पर भरोसे की हुई जीत 

आखिरकार सात साल, तीन महीने तीन दिन बाद निर्भया के गुनहगार अपने असल अंजाम तक पहुंचने वाले हैं। लंबे वक्त से कानून के साथ आंख मिचौली का खेल खेल रहे निर्भया गैंगरेप और मर्डर केस के चारों दोषियों की फांसी अब पक्की हो चुकी है। जो ये बताती है कि गलत काम का नतीजा गलत ही होता है। लेकिन इन सब के बीच निर्भया के माता पिता का भारत के कानून पर भरोसा रखना हर उस आदमी के लिए प्रेरणा बनेगा जो आज अदालतो में चक्कर लगा रहा है। क्योंकि ये सिध्द हो गया कि कानून की नजर में सब एक है और कानून सबको अपने बचाव का पूरा मौका भी देता है लेकिन फैसला बिलकुल न्याय संगत करता है। चलिये बताते है कि आरोपियों ने अपने आपको बचाने के लिए कौन कौन से दांव खेले जो सब बेकार साबित हुए |

दया याचिका खारिज होने को दोषी अक्षय ने दी चुनौती

चारों दोषियों- मुकेश, पवन, अक्षय और विनय के पास कोई लाइफलाइन नहीं बची थी यानी उनके सभी कानूनी विकल्प समाप्त हो चुके थे। इसके बाद भी अक्षय की तरफ से उसके वकील एपी सिंह ने दया याचिका खारिज किए जाने को गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। एपी सिंह ने कोर्ट से कहा कि दया याचिका के खारिज होने से अक्षय से जुड़े तमाम लोग प्रभावित होंगे। कोर्ट ने इस दलील को खारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने अक्षय के वकील से कहा कि दया याचिका खारिज होने के बाद दूसरी बार दया याचिका दी गई लेकिन राष्ट्रपति ने उसे खारिज कर दिया। अब इसकी न्यायिक समीक्षा नहीं हो सकती।

निचली अदालत ने डेथ वॉरंट पर रोक से इनकार किया

दोषियों ने दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट में याचिका दाखिल कर डेथ वॉरंट पर रोक लगाने की मांग की थी। हालांकि, कोर्ट ने डेथ वॉरंट पर रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया। अडिशनल सेशंस जज धर्मेंद्र राना ने अक्षय, पवन और विनय की तरफ से डेथ वॉरंट पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया। याचिका में कहा गया था कि इनमें से एक दोषी की दूसरी दया याचिका राष्ट्रपति के पास लंबित है, लिहाजा डेथ वॉरंट पर रोक लगाई जाए। इसके बाद पब्लिक प्रॉसिक्यूटर ने कोर्ट को बताया कि अक्षय और पवन की दूसरी दया याचिका भी खारिज हो चुकी है। इससे पहले, पटियाला हाउस कोर्ट ने 5 मार्च को चारों दोषियों- मुकेश, अक्षय, पवन और विनय के खिलाफ डेथ वॉरंट जारी करते हुए फांसी के लिए 20 मार्च को सुबह साढ़े 5 बजे का वक्त तय किया था।

कुल मिलाकर निर्भया के माता पिता को अब इंसाफ मिल जायेगा और समाज को एक सबक कि अगर इस तरह की घटना होती है तो उसे बिलकुल बर्दाशत नही किया जायेगा। लेकिन अगर ये सब वर्षो की जगह महीनो में हो तो जरूर लोगो में गलत काम करने से भय पैदा हो सके।


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