कुछ ऐसा था फाँसी के पहले निर्भया केस के दोषियों का हाल

कहते हैं इस दुनिया मे मौत से ज्यादा भयावह कुछ नही | तो जरा सोचिये क्या बीत रही होगी उस इंसान पर जिसे पता हो कि उसकी मौत अब बस चंद घंटों दूर है | कुछ ऐसी ही स्थिति थी निर्भया केस के दोषियों की | देर रात जब दोषियों को पता चला कि उनकी फांसी अब किसी हालत में नहीं टल सकती है, तो अचानक की उनके व्यवहार में बदलाव आ गया। तिहाड़ जेल में बंद चारों दोषी खबर मिलते ही बेचैन हो उठे। रात भर दोषियों को नींद नहीं आई। वो बेचैन होकर अपने बैरक में ही टहलते रहे। फांसी का खौफ उनके चेहरे पर साफ नजर आ रहा था।

निर्भया के चारों दुष्कर्मियों की बिहैवियर स्टडी कर रहे डॉक्टरों के मुताबिक फांसी से एक दिन पहले चारों अजीबोगरीब हरकत कर रहे थे। वे अपनी बैरक से बार-बार बाहर झांकते रहे थे। स्टाफ को बुला रहे थे। दोषी विनय शर्मा और पवन गुप्ता सबसे ज्यादा आसामान्य व्यवहार कर रहे थे। मुकेश और अक्षय काफी हद तक सामान्य थे।

फांसी से पहले जेल में चारों दुष्कर्मियों का व्यवहार

विनय शर्मा की मानसिक स्थिति सबसे ज्यादा खराब थी। विनय अपने बैरक में कुछ भी अनाप-शनाप बोल रहा था। उसने बार-बार यह दिखाने की भी कोशिश की कि उसकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं है। हालांकि लगातार आधे घंटे बात करने के बाद उसका बर्ताव हो सामान्य हो जाता था।

पवन गुप्ता ने स्टाफ के साथ जेल में ही गाली-गलौज की। कभी कहा कि बैरक से बाहर निकालो। सबसे ज्यादा सेवादार को गाली दी। बार-बार दरवाजे को भी खटखटाए। 

मुकेश सिंह सबसे शांत रहा। किसी से कुछ नहीं बोला। जेल अधिकारियों के मुताबिक, मुकेश मानसिक तौर पर तैयार लगा। उसने मान लिया कि फांसी होना तय है। इसलिए हमेशा बस चुपचाप देखता रहता था।

अक्षय ठाकुर को लग रहा था कि फांसी टल सकती है, इसलिए बेचैन था। जब पता चला कि पत्नी ने तलाक के लिए अर्जी लगाई, तब खुश दिखा। जेल स्टाफ और वकील से बार-बार खबर लेता रहता था।

शुक्रवार तड़के 3:15 बजे ही चारों दोषियों को उनके सेल से उठाया गया। दैनिक क्रिया के बाद चारों को नहाने के लिए कहा गया। उन चारों के लिए जेल प्रशासन की ओर से चाय मंगाई गई, लेकिन किसी ने भी चाय नहीं पी। इस दौरान विनय ने कपड़े बदलने से इनकार कर दिया और रो-रो कर माफी मांगने लगा।

इस दौरान अन्य दोषी भी गिड़गिड़ाकर माफी मांगने लगे और रोने लगे। इसके बाद उन्हें समझा-बुझाकर शांत कराया गया। उनकी आखिरी इच्छा पूछी गई। फांसी घर में लाने से पहले उनके हाथ पीछे की ओर बांध दिए गए। इसके बाद जब उन्हें फांसी घर लाया जाने लगा तो एक दोषी सेल में ही लेट गया और जाने से मना करने लगा |

किसी तरह उसे पकड़ कर फांसी घर तक लाया गया। फांसी कोठी से कुछ दूर पहले ही उनके चेहरे को काले कपड़े से ढंका गया। इसके बाद उनके पैरों को भी बांधा गया ताकि वे ज्यादा छटपटा न पाएं और एक दूसरे से टकराएं नहीं।

इसके बाद ठीक साढ़े पांच बजे पवन जल्लाद ने जेल नंबर-3 के सुपरिटेंडेंट के इशारे पर लीवर खींच दिया। इस दौरान जल्लाद की मदद के लिए तीन जेल कर्मचारी भी मौजूद थे। फांसी के करीब आधे घंटे बाद डॉक्टरोंने चारों दोषियों को मृत घोषित कर दिया। जेल अधिकारी ने बताया कि अगर दोषियों के परिवार वाले उनके शव की मांग करते हैं तो उन्हें सौंप दिया जाएगा, नहीं तो उनका अंतिम संस्कार करवाना हमारी जिम्मेदारी है।