देश में शुरू हुई नई परिपाटी, तय समय से पहले होते है विकास के काम 

सच में मोदी सरकार वो काम कर रही है जिसके बारे में कभी किसी का ध्यान नहीं गया जबकि थोड़े से परिवर्तन से देश के विकास में गति तेज हो जाती है। अब आप सेना के दफ्तर को ही देख लीजिये रायसीना हिल्स के पास बने इस दप्तर की हालत इतनी जर्जर हो गई थी कि डर यही लगता था कि कही इमारत अपने आप ही गिर ना जाये। लेकिन अब सेना को नया हाइटेक दफ्तर मिल गया है जो अपने आप में कई सारी सुविधाओ से लैस है इस मौके पर पीएम मोदी ने कहा कि आज़ादी के 75वें वर्ष में आज हम देश की राजधानी को नए भारत की आवश्यकताओं और आकांक्षाओं के अनुसार विकसित करने की तरफ एक और कदम बढ़ा रहे हैं। ये नया डिफेंस ऑफिस कॉम्लेक्स हमारी सेनाओं के कामकाज को अधिक सुविधाजनक, अधिक प्रभावी बनाने के प्रयासों को और सशक्त करने वाला है।

12 महीने में पूरा हुआ डिफेंस ऑफिस कॉम्प्लेक्स का निर्माण

दिल्ली में हुए सुधारों की बात करते हुए पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा, “राजधानी की आकांक्षाओं के अनुरूप दिल्ली में नए निर्माण पर बीते वर्षों में बहुत जोर दिया गया है। जनप्रतिनिधियों के आवास हों, अंबेडकर जी की स्मृतियों को सहेजने के प्रयास हों, अनेक नए भवन हों, इन पर लगातार काम किया है।” डिफेंस ऑफिस कॉम्प्लेक्स के काम की तारीफ करते हुए प्रधानमंत्री बोले, “डिफेंस ऑफिस कॉम्प्लेक्स का जो काम 24 महीने में पूरा होना था वो सिर्फ 12 महीने में पूरा किया गया है। वो भी तब जब कोरोना से बनी परिस्थितियों में लेबर से लेकर तमाम दूसरी चुनौतियां सामने थीं।” उन्होंने कहा कि कोरोना काल में सैकड़ों श्रमिकों को इस प्रोजेक्ट में रोजगार मिला है।

सेना की ताकत को आधुनिक बनाने पर दिया जोर

इतना ही नहीं पीएम मोदी ने कहा, “आज जब भारत की सैन्य ताकत को हम हर लिहाज से आधुनिक बनाने में जुटे हैं, आधुनिक हथियार से लैस करने में जुटे हैं, सेना की जरूरत की खरीद तेज हो रही है। ऐसे में देश की रक्षा से जुड़ा कामकाज दशकों पुराने तरीके से हो, ये कैसे संभव हो सकता है? उन्होंने कहा, “अब केजी मार्ग और अफ्रीका एवेन्यु में बने ये आधुनिक ऑफिस, राष्ट्र की सुरक्षा से जुड़े हर काम को प्रभावी रूप से चलाने में बहुत मदद करेंगे। राजधानी में आधुनिक डिफेंस एऩ्क्लेव के निर्माण की तरफ ये बड़ा स्टेप है।”

आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर ही सेंट्रल विस्टा की मूल भावना

देश की राजधानी की बात करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बोले, “जब हम राजधानी की बात करते हैं तो वो सिर्फ एक शहर नहीं होता। किसी भी देश की राजधानी उस देश की सोच, संकल्प, सामर्थ्य और संस्कृति का प्रतीक होती है।” उन्होंने कहा, “भारत तो लोकतंत्र की जननी है इसलिए भारत की राजधानी ऐसी होनी चाहिए, जिसके केंद्र में लोक हो, जनता हो।” इसको ध्यान में रखकर काम किया जा रहा है।

साफ नियत के साथ और पूरी ईमानदारी से काम हो रहा है तभी अब विकास कागजो में नहीं बल्कि जमीन पर दिखता हैऔर तय वक्त से पहले काम होता था जो एक नई व्यवस्था की शुरूआत है।