जनहित में लिए फैसलों ने नरेंद्र मोदी को चुनावों का भी हीरो बना दिया

7 अक्टूबर को नरेंद्र मोदी को सत्ता में आने के 20 वर्ष पूरे हो रहे हैं। इन 20 वर्षों में नरेंद्र मोदी ने अपनी राजनीति और व्यक्तित्व को फर्श से अर्श तक का सफर कराया है। गुजरात का मुख्यमंत्री बनने से लेकर देश का प्रधानमंत्री बनने तक नरेंद्र मोदी ने देश की सियासत में खुद को एक कुशल प्रशासक के तौर पर स्थापित किया है। सत्ता में रहते हुए उनके लिए गए फैसलों ने पहले गुजरात फिर पूरे भारत में बीजेपी के विजय रथ को जारी रखने का कार्य किया। नरेंद्र मोदी ऐसे ही देश की राजनीति का जादूगर नहीं बने हैं। उन्होने देश में जिस तरह की सियासत चल रही थी उसका रूप ही बदलकर रख दिया जिसके बाद आज वो इस मुकाम तक पहुंच पाये है।

संसद की सीढ़ियों पर माथा टेकने वाला प्रधानमंत्री

मोदी के नेतृत्व में बीजेपी लगातार तीन बार चुनाव जीत चुकी थी और वह दिन आ गया था जब वह जादूगर पहली बार संसद भवन में प्रवेश करने वाला था। बहुत सारे सांसद और नेता उनके पांव छूना चाहते थे, पर उस व्यक्ति ने पहले झुक कर संसद भवन की सीढ़ियों पर ऐसे माथा टेका जैसे कि वह संसद ना हो कर सोमनाथ का मंदिर हो। उसके बाद उसने अपने गुरु आडवाणी का पैर छू कर उनसे आशीर्वाद लिया। जिन लोगों ने भी संसद भवन में प्रवेश का वह नज़ारा देखा, वह इसे कभी नहीं भूल सकते, क्योंकि इससे पहले संसद को प्रजातंत्र का मंदिर सिर्फ कहा ही जाता था, उसे कोई पूजता नहीं था। यह प्रजातंत्र का चमत्कार ही था कि जो व्यक्ति बचपन में चाय बेचता था, जो गरीब घर में पैदा हुआ था, जिसके खानदान में पहले कोई राजनीति में नहीं रहा था, जिसे 13 वर्ष पहले बहुत कम भारतीय जानते थे, वह 6 दिनों बाद देश के प्रधानमंत्री पद का शपथ लेने वाला था।

चाइल्ड ऑफ डेस्टिनी वाले नरेंद्र मोदी

अंग्रेजी भाषा में ऐसे चमत्कारी व्यक्ति को लोग Child Of Destiny यानि भाग्यशाली बच्चा कहते हैं। नरेन्द्र मोदी को गुजरात का कांटों भरा ताज मिला था और उसके बाद उन्होंने खुद अपनी तक़दीर लिखी थी। अगर भुज में भयावह भूकंप ना आया होता और केशुभाई पटेल सरकार राहत कार्य में विफल नहीं हुई होती तो यह कहना कठिन है कि नरेन्द्र मोदी अभी कहां होते। कुर्सी तो बहुतों को मिलती है। मोदी से पहले भी गुजरात में 13 मुख्यमंत्री रह चुके थे, पर किसी अन्य को इस तरह की लोकप्रियता नहीं मिली थी। योजना, कार्यशैली और संयोग कुछ ऐसा रहा कि एक बार मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद मोदी ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा पर यह संयोग ज़रूर था कि गुजरात का 14वां मुख्यमंत्री भारत का 14वां प्रधानमंत्री बनने जा रहा था। 14 का आंकड़ा मोदी के जीवन से ऐसा जुड़ा कि प्रधानमंत्री बनने के बाद वह पीछे मुड़ कर देखने का नाम नहीं ले रहे हैं। परिस्थितियां विपरीत भी रहीं, चुनौतियां भी सामने आईं, पर मोदी लगातार सशक्त बनते जा रहे हैं।

टफ टास्क मास्टर नरेंद्र मोदी

2001 में जब मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री बने थे तब परिस्थितियां विपरीत थीं, चुनौतियां मुंह बाए सामने खड़ी थीं, सर पर कांटो भरा ताज था। मंत्री हों या सरकारी अधिकारी, सभी ने यही सोचा था कि एक ऐसा व्यक्ति जिसे प्रशासनिक अनुभव नहीं था, अभी तक कभी चुनाव भी नहीं लड़ा था, उसे नचाना काफी आसान होगा। पर हुआ ठीक उसके उल्टा, मोदी ने प्रशासन के क्षेत्र में ऐसी डुबकी लगायी जैसे कोई मछली जल में बहुत शीघ्र ही बात फ़ैल गयी कि ‘मोदी मीन्स बिज़नेस’ मोदी को काम समझते देर नहीं लगी, वह टफ टास्क मास्टर के रूप में विख्यात हो गए। 16 घंटे रोज काम करना, मंत्रियों और अधिकारियों से जवाबदारी शुरू हो गयी और जो उस कसौटी पर खरा नहीं उतरा उसकी छुट्टी होने लगी।

पूरी ईमानदारी से और लगन के साथ देश सेवा में सबकुछ समर्पण करके जिस तरह से पीएम मोदी ने काम किया उसी का नतीजा है कि आज नया भारत साफतौर पर देखा जा सकता है।