भारत में ना लोकतंत्र खतरे में है और ना ही बोलने की आजादी

आजकल देश में कुछ लोग सिर्फ यही चिल्लाकर भ्रम पैदा करने में लगे होते है कि देश में लोकतंत्र खत्म हो चुका है, मोदी राज में देश में आज अपने हक के लिए आवाज नही कोई उठा सकता है। लोकतंत्र का हर तरफ गला घोटा जा रहा है, ऐसे लोगो को आईना दिखाने के लिए हम आज अपने दो पड़ोसी देश में क्या हाल है उसके जरिये ये बताते की कोशिश करूंगा कि भारत में लोकतंत्र कितना बेहतर है।

चीन में सरकार के खिलाफ बोला तो होता ये हाल है

चीन के सबसे अमीर लोगों में शामिल और अलीबाबा के मालिक ‘जैक मा’ के बारे में संदेह जताया जा रहा है कि वे गायब हो गए हैं। इससे पहले उन्होंने चीन की सरकारी एजेंसियों के काम काज के तरीके पर सवाल उठाए थे। फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, जैक मा करीब दो महीने से किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में नहीं देखे गए हैं। खुद के बनाए उनके टीवी शो ‘अफ्रीका के बिजनेस हीरो’ में भी जैक मा की जगह पर किसी और को भेज दिया गया है। हालांकि, अलीबाबा कंपनी के एक प्रवक्ता ने कहा कि शेड्यूल कंफ्लिक्ट की वजह से जैक मा टीवी शो में शामिल नहीं हुए। जानकारों की माने तो सरकार के खिलाफ बोलने और नीतियों का विरोध करने के चलते उन्हे गायब किया गया है। वैसे चीन में ये पहली घटना नही है इसके पहले भी कोरोना के खिलाफ बोलने वाली एक महिला को भी चीन में इसी तरह से गायब कर दिया गया था। ऐसे में उन लोगो को थोड़ा सोचना चाहिये जो ये कहते है कि विश्व में सबसे कम लोकतंत्र अगर कही बचा है तो वो भारत देश है इस तरह वो देश ही नही विदेश में देश की छवि खराब करने में जुटे है।

पाकिस्तान का आलम चीन से भी बुरा

चीन के बाद अब बात करते है पाकिस्तान की जहां का आलम ये है कि गुलाम कश्मीर में हर दिन मानवाधिकार का हनन हो रहा है। महिलाओं के साथ हर दिन सेना बदसलूकी करते हुए पाई जाती है। बलूचिस्तान में तो हालात बद से बत्तर है, आये दिन वहां आम लोगो और सरकार के बीच खूनी संघर्ष के हिस्से छपते ही रहते है। लेकिन जिस तरह से बलूचिस्तान की बेटी करीमा बलूच की हत्या कनाडा में कर दी गई इससे साफ हो गया है कि पाकिस्तान में कितना लोकतंत्र बचा हुआ है। इसी तरह विपक्ष की आवाज दबाने के लिए लगातार पाक की सरकार विपक्ष पर दमनकारी कदम उठा रही है जिसका समूचा जग विरोध कर रहा है लेकिन इसके बाद भी कुछ लोग पाक चीन की तारीफ में कसीदे पढ़ रहे है और भारत को गाली देने में लगे हुए है।

क्रिसमस उपहार' की धमकी के साथ करीमा बलोच की मौत जवाबों से ज़्यादा सवाल छोड़  गई

जबकि भारत में इन दोनो देश की अपेक्षा मोदी राज में लोकतंत्र मजबूत ही हुआ है। तभी आज सड़को पर मोदी सरकार के खिलाफ कापी लंबे वक्त तक खुला प्रदर्शन देखा जा रहा है। फिर वो सीएए के वक्त हो या फिर अब किसान आंदोलन के चलते हो, ये जरूर है कि जो लोग इन आंदोलन के मुखिया है उनपर देश की जनता को रत्ती भर भी विश्वास नही है बस इसी लिए ये लोग मोदी सरकार को बदनाम करने के लिए साजिश रच रहे है लेकिन देश की जनता उन लोगो की साजिश को बिलकुल सफल नही होने देगी, ये भी पक्का है।