वैक्सिनेशन को लेकर केंद्र सरकार पर लगे झूठे आरोपो की सियासत को समझने की जरूरत

वैक्सीनेशन को लेकर हर तरफ से मोदी सरकार पर हमला बोला जा रहा है। कई राज्य सरकारे ये आरोप लगा रही है कि वैक्सीनेशन को लेकर केंद्र सरकार उदासीनता बरत रही है। सोशल मीडिया में फैलाई जा रहे इस भ्रम का असर ये देखा जा रहा है कि जनता भी अफवाह में फंस रही है। लेकिन अब जनता के इस भ्रम को दूर करने के लिए खुद सरकार आगे आई है सरकार ने ऐसे आरोपो का जवाब दिया है और सरकार द्वारा उटाये कदमो को बताया है।  

आरोप – सरकार दूसरे देशों से वैक्सीन खरीदने में उदासीनता बरत रही है

सच- इस पर जवाब देते हुए केंद्र सरकार की तरफ से कहा गया है कि वैक्सीन बनाने वाली सभी बड़ी इंटरनेशनल कंपनियों के साथ केंद्र 2020 के मध्य से ही लगातार संपर्क में है। फाइजर, जॉनसन एण्ड  जॉनसन और मॉडर्ना के साथ सरकार कई दौर की बातचीत भी कर चुकी है। सरकार उन्हें वैक्सीन की सप्लाई या भारत में वैक्सीन निर्माण के लिए हर संभव सहयोग देने की पेशकश की है। लेकिन ऐसा नहीं है कि ये कंपनिया फ्री में वैक्सीन सप्लाई के लिए उपलब्ध हैं। दुनियाभर में वैक्सीन की सीमित सप्लाई है और कंपनियों की भी अपनी अलग प्राथमिकताएं हैं। जैसे हमारी कंपनियों ने बिना किसी हिचक के हमें प्राथमिकता दी थी वैसे ही वो कंपनियां भी उनके देशों को प्राथमिकता देंगी। केंद्र सरकार ने बताया कि जैसे ही फाइजर वैक्सीन की उपलब्धता की जानकारी देग, उतनी ही जल्दी भारत में वैक्सीन इंपोर्ट करने की कोशिश होगी। ये भारत सरकार की कोशिशों का ही नतीजा है कि स्पूतनिक वी की डोज भारत में आ गई हैं और भारत में इसका निर्माण भी शुरू हो गया है माना जा रहा है कि एक साल में 10 करोड़ डोज भारत में तैयार की जायेगी।

आरोप- मोदी सरकार ने दुनिया के टीको को अनुमति नहीं दी

सच – ये आरोप जो सरकार पर लगाये जा रहे है उसमे तनिक भी हकीकत नही है क्योकि सरकार ने अप्रैल में भारत में यूएस एफडीए,  ईएमए, यूके के एमएचआरए, जापान के पीएमडीए  और डब्ल्यूएचओ की आपातकालीन उपयोग सूची में मंजूरी प्राप्त टीकों के प्रवेश को आसान बना दिया है। इन्हें पूर्व ब्रिजिंग परीक्षणों से गुजरने की आवश्यकता नहीं होगी। अन्य देशों में निर्मित अच्छी तरह से स्थापित टीकों के लिए ट्रायल को पूरी तरह से समाप्त करने के लिए प्रावधान में अब और संशोधन किया गया है। ड्रग कंट्रोलर के पास मंजूरी के लिए किसी विदेशी विनिर्माता का कोई आवेदन लंबित नहीं है।

आरोप- केंद्र सरकार ने अपनी जिम्मेदारी राज्यों को सौंप दी है

सच- इस आरोप का जवाब देते हुए केंद्र सरकार की तरफ से कहा गया है कि वैक्सीन का उत्पादन बढ़ाने से लेकर विदेशी वैक्सीन भारत लाने के लिए जल्द से जल्द मंजूरी प्राप्त करवाने तक, हर भारी भरकम काम भारत सरकार कर रही है। राज्य सरकारें ये अच्छी तरह से जानती हैं कि केंद्र राज्यों को लोगों मे मुफ्त में टीके देने के लिए वैक्सीन सप्लाई कर रही है। भारत सरकार ने राज्यों को उनके स्पष्ट अनुरोध पर, स्वयं टीकों की खरीद का प्रयास करने में सक्षम बनाया है। राज्य अच्छी तरीके से जानते हैं कि भारत की वैक्सीन उत्पादन क्षमता क्या है और विदेश से वैक्सीन मंगवाने में क्या परेशानी हो रही है लेकिन इसके बाद भी वो सिर्फ भ्रम फैलाने में लगी है।

आरोप – केंद्र नहीं दे रहा राज्यों को वैक्सीन

सच- इस बात में कितनी हकीकत है ये तो केंद्र के ऑकड़े ही बताते है ऑकड़ो पर नजर डाले तो अभी भी राज्यों के पास 1 करोड़ से ज्यादा वैक्सीन है और केंद्र जल्द ही उन्हे और वैक्सीन सप्लाई भी कर रही है। केंद्र सहमत दिशानिर्देशों के अनुसार पारदर्शी तरीके से राज्यों को पर्याप्त टीके आवंटित कर रहा है। राज्यों को वैक्सीन की उपलब्धता के बारे में पहले से सूचित किया जा रहा है। उधर कई राज्यो से वैक्सीन की बर्बादी का भी मामला सामने आया है जिसे ध्यान में रखते हुए भी केंद्र राज्यो को अब वैक्सीन दे रही है जिससे कम से कम वेस्टेज हो सके।

आरोप – बच्चों के टीकाकरण को लेकर मोदी सरकार उदासीन

सच- सोशल मीडिया में एक खबर तेजी से फैलाई जा रही है कि मोदी सरकार देश के बच्चो की वैक्सीन लगाने को लेकर कोई तैयारी नही कर रही है ना इसके बारे में सोच रही है, जो सरासर गलत है। सरकार बच्चो की वैक्सीन को लेकर लगातार वैज्ञानिको के संपर्क में है तो दूसरी तरफ देश में बच्चो पर वैक्सीन के ट्रायल करने की बात भी कही है। हालाकि इस पर कुछ लोग सियासत कर रहे है लेकिन सरकार जब पूरी तरह से ऐतबार हो जायेगा कि बच्चो के लिये ये दवा बिलकुल ठीक है उसके बाद ही उसे लगाने की दिशा में काम किया जायेगा

आरोप – वैक्सीन उत्पादन बढ़ाने में कुछ नही कर रही सरकार

सच – सरकार ज्यादा से ज्यादा कंपनियों से वैक्सीन बनवाने के लिए हर संभव सुविधा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। फिलहाल देश में केवल एक कंपनी है भारत बायोटेक जिसके पास आईपी है।  भारत सरकार ने ये सुनिश्चित किया है भारत बायोटेक के आलावा 3 अन्य कंपनियां भी कोवैक्सीन का निर्माण करेंगी। वहीं सरकार के लगातार प्रोत्साहन के बाद कोवीशिल्ड वैक्सीन के निर्माण में भी तेजी आ रही है। कंपनी कोवीशिल्ड का निर्माण 6.5 करोड़ से बढ़ाकर 11 करोड़ डोज कर रही है।

फिलहाल जिस तरह से वैक्सीनेशन को लेकर सरकार पर झूठ थोपा जा रहा है और बोला जा रहा है कि सरकार इसको लेकर कोताही बरत रही है तो वो पूरी तरह से झूठ है। हां इसमे ये सच्चाई जरूर है कि राज्य केंद्र पर सिर्फ झूठा आरोप लगा रहे है और अपने हिस्से की कोताही को भी मोदी सरकार पर थोपना चाहते हैं।