राष्ट्रीय बैंबू मिशन – किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए मोदी सरकार की योजना

  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

bamboo

मोदी सरकार ने कार्यभार सँभालते ही किसानों को सौगात देनी शुरू कर दी थी| अब किसानों की आमदनी बढ़ाने की दिशा में मोदी सरकार ने एक अनोखा प्रयास शुरू किया है| जिसके द्वारा किसान अपनी आमदनी को अपने हिसाब से बांस की खेती कर के बढ़ा सकते हैं|

क्या है राष्ट्रीय बैंबू मिशन?

कृषि मंत्रालय की अतिरिक्त सचिव अलका भार्गव के अनुसार, “सरकार किसानों को बांस की खेती को नगदी खेती के तौर पर करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है| इसके लिए राष्ट्रीय बैंबू मिशन बनाया गया है| हर राज्य में मिशन डायरेक्टर बनाये गए हैं, जिनकी देख रेख में ये कार्यक्रम आगे बढेगा| इस मिशन में तीन विभाग कृषि, वन तथा उद्योग मिलकर काम कर रहे हैं|”

बांस को फारेस्ट एक्ट से हटाया गया

पहले कांग्रेस की सरकार में बांस को फारेस्ट एक्ट के अन्दर रखा गया था और बांस काटना कानूनन अपराध की श्रेणी में था| लेकिन अब बांस को फारेस्ट एक्ट से बाहर कर दिया गया है| हालांकि सिर्फ निजी जमीन पर लगाये हुए बांस को फारेस्ट एक्ट से बाहर किया गया है| सरकारी जंगल की जमीन पर लगे हुए बांस को काटना अभी भी मना है|

बैंबू मिशन के तहत सरकार क्या सहायता करेगी?

ये बांस से बना शेड है
Photo-Ministry of Agriculture

बांस एक बहुमुखी कार्यों में उपयोग आने वाला पौधा है| अलग अलग प्रकार के बांस का उपयोग अलग अलग कार्यों में होता है| इसकी पत्तियों का चारे के रूप में उपयोग होता है, बांस से विभिन्न प्रकार के फर्नीचर और कलाकृतियाँ भी बनती है और इसका इस्तेमाल भवन निर्माण में भी होता है| इसलिए किसानों को पहले तय करना होगा की किस प्रकार के बांस वो लगाना चाह रहे हैं| उसी प्रकार के बांस के पौधे सरकारी नर्सरी से मुफ्त में प्राप्त कर सकते हैं|

बांस के पौधे तीन से चार मीटर की दुरी पर लगाये जाते हैं| बीच में बाकी फसलों की भी खेती की जा सकती है| इस प्रकार से आमदनी का पुराना विकल्प भी त्यागने की जरुरत नहीं है| बांस की खेती से होने वाली आय, किसानों की अतिरिक्त आय होगी|

सरकारी नर्सरी से लें बांस का पौधा
Photo-Ministry of Agriculture

औसतन 4 साल में बांस की फसल कटाई के लिए तैयार होती है| और 3 सालों में कुल लागत करीब 240 रुपया प्रति पौधा आता है, जिसमें से 120 रुपया प्रति पौधा सरकार किसानों को देगी| इसका मतलब हुआ की 50-50 फीसदी खुद की पूंजी और बाकि का सरकार देगी| सरकारी हिस्से का 60 फ़ीसदी केंद्र और 40 फ़ीसदी राज्य सरकार के हिस्से में होगा|

इस योजना का लाभ उठाकर किसान औसतन प्रति हेक्टेयर 3-3.5 लाख की कमाई कर सकते हैं| और इसके अलावा अन्य फसलों की भी खेती उसी जमीन में कर सकते हैं|


  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •