सादगीपूर्ण जिंदगी जीकर शीर्ष पर पहुंचे हैं नरेंद्र मोदी, ट्रेन की ये घटना सुनकर यकीन नहीं करेंगे आप

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23 मई को चुनाव नतीजे आने के बाद सोशल मीडिया पर नरेंद्र मोदी और शंकर सिंह वाघेला को लेकर एक कहानी वायरल हो रही है। इस कहानी को नरेंद्र मोदी के सादगीपूर्ण व्यक्तित्व के साथ जोड़कर खूब शेयर किया जा रहा है। यह कहानी सबसे पहले साल 2014 में उस वक्त सामने आई थी जब नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने थे। अंग्रेजी अखबार ‘द हिंदू’ में छपे एक लेख में इस कहानी का जिक्र हुआ था। इस कहानी में नरेंद्र मोदी के ट्रेन यात्रा का जिक्र है….। हालांकि सबसे पहले जब यह कहानी साल 1995 में एक लेख के जरिए छपी थी तब लेखिका को नहीं पता था कि ट्रेन यात्रा कर रहे शख्स मोदी थे। आइए जानते हैं क्या है यह कहानी जो 90 के दशक की है और फिर से लोग इसे अपने सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे हैं..।

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इस कहानी में नरेंद्र मोदी और शंकर सिंह वाघेला ने अपने विनम्र स्वभाव से दो अजनबी महिलाओं पर गहरी छाप छोड़ी थी। कहानी को रेलवे में वरिष्ठ अधिकारी लीना शर्मा ने अपने एक लेख के जरिए पांच साल पहले साझा किया था जो 2019 में भाजपा की प्रचंड जीत के बाद फिर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल हो रही है। इस कहानी में लीना शर्मा ने 90 के दशक में अपनी अहमदाबाद यात्रा का जिक्र किया है।

लीना शर्मा ने उस घटना को याद किया जिसमें उनकी मुलाकात मोदी और वाघेला से हुई थी। दोनों ही ने अपना नाम बताया था लेकिन लीना को याद नहीं रहा। हालांकि दोनों ही लोगों के सादगीपूर्ण व्यवहार को वो कभी नहीं भूल सकी। यह कहानी तब की है जब लीला शर्मा अपने एक सहपाठी सहेली के साथ दिल्ली से अहमदाबाद जा रही थीं। उनकी और उनके बैचमेट का टिकट कंफर्म नहीं हुआ था। तब मोदी और वाघेला ने इन दोनों ही महिलाओं को अपनी सीट दी थी। इतना ही नहीं, जब सोने की भारी आई तो मोदी और शंकर सिंह वाघेला ट्रेन के फर्श पर चादर बिछाकर लेट गए और अपनी रिजर्व सीट दोनों महिलाओं को दी।

लेख में जिक्र किया गया है कि खाने के वक्त चार थाली आई जिसका बिल भी मोदी ने चुकाया और इन दोनों ही महिलाओं को गुजरात भाजपा में शामिल होने के लिए कहा। लीना ने इस घटना का जिक्र पहली बार 1995 में असम के एक अखबार में लेख लिखकर किया तब वह मोदी और वाघेला का नाम नहीं जानता थी और उन्होंने दो अज्ञात राजनेताओं के नाम का जिक्र किया था। तब लीना को नहीं पता था कि वो जिन दो नेताओं का जिक्र कर रही हैं वो आने वाले वक्त में इतने मशहूर होंगे।

1996 में शंकर सिंह वाघेला गुजरात के मुख्यमंत्री बने। 2001 में नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री बने। जब मोदी देश के प्रधानमंत्री बने तो फिर लीना ने इस घटना को एक लेख के जरिए याद किया। लीना ने लिखा- साल 1990 गर्मियों की बात है। रेलवे में सेवा प्रोबेशनर्स के दौरान मैं और मेरी सहेली ट्रेन से लखनऊ से दिल्ली की यात्रा कर रही थी। उसी बोगी में दो सासंद भी यात्रा कर रहे थे। वो तो सही थे लेकिन उनके साथ बिना रिजर्वेशन के यात्रा कर रहे करीब 12 लोगों का व्यवहार डराने वाला था। उन्होंने हमें हमारे रिजर्व बर्थ खाली करने के लिए मजबूर किया और हमारे सामान पर बैठ गए। इतना ही नहीं वो लोग भद्दी और गाली-गलौज वाली टिप्पणियां करने लगे। हमें लड़ाई से डर भी लग रहा था और गुस्सा भी आ रहा था।

इस तरह हम अगली सुबह दिल्ली पहुंचे। हालांकि उन गुंडों ने हमें कोई शारीरिक चोट नहीं पहुंचाई थी। लेकिन हम भावनात्मक तौर पर चोटिल थे। मेरी सहेली इतनी सहमी हुई थी कि उसने अगले फेज की ट्रेनिंग टाल दी। हमारी अगले फेज की ट्रेनिंग अहमदाबाद में थी। लेकिन मैं दूसरी बैचमेट के साथ अहमदाबाद के लिए रवाना हो गई और इस बार हमारे पास रिजर्वेशन नहीं था और नही इसे अरेंज करने के लिए इतना वक्त था।

हम प्रथम श्रेणी के बोगी में टीटीई से मिले और उसे अपनी बात बताई। ट्रेन की सारी सीटें बुक थी। लेकिन टीटी ने अच्छे तरह से हमारी मदद की और ट्रेन में बैठने दिया। मेरी नजर साथ में यात्रा कर रहे दो सहयात्री राजनेताओं पर गई जो खादी कुर्ता-पायजामा पहने हुए थे। दोनों ही सभ्य थे और उन्होंने हमें बैठने की जगह दी। उन्होंने खुद को परिचय भाजपा नेता के तौर पर दिया और अपना नाम भी बताया। हम लोगों की विभिन्न विषयों पर बातचीत भी हुई। इस तरह उन्होंने हमारी मदद की और हमें अपनी सीट देकर खुद जमीन पर सो गए।

Originally Published At: अमर उजाला