Narendra Modi: संकट जिसे और मजबूत और लोकप्रिय बना देता है

नरेंद्र दामोदर दास मोदी! जी हाँ, देश के प्रधानमंत्री! सुनने में कितना आसान लगता है ना कि एक साधारण व्यक्ति देश का प्रधानमंत्री बन गया। लेकिन हर सफलता के पीछे एक लंबी कहानी होती है। और वो भी जीवन का दौर मुश्किलों से भरा हो तो इस मुकाम पर पहुंचना नामुमकिन सा हो जाता है। लेकिन जो परिस्थितियों को अवसर (Opportunity) में बदल दे, उसी का नाम नरेंद्र मोदी है। बात उनकी पारिवारिक जीवन की नहीं है, बात उनकी जीवन यात्रा की है।

जब जब संकट आए हैं, नरेंद्र मोदी और निखर कर निकले हैं। ज्यादातर देखा गया है अच्छे अच्छे प्रशासक संकट काल के बाद अपनी लोकप्रियता खो देते हैं। लेकिन संकटमोचक की भूमिका निभाने वाले नमो और ज्यादा लोकप्रिय होते जाते हैं।

 

  1. आपातकाल: भारतीय लोकतंत्र अपने आपातकाल के दौर को नहीं भूल सकता। संविधान और लोकतंत्र जब कराह रहे थे और जयप्रकाश नारायण के आह्वान पर पूरा देश सड़कों से होते जेल में पहुँच रहा था उस दौर में भी एक युवा अपनी पहचान बड़े बड़े धुरंधरों के बीच बना रहा था। सन 2000 में गुजरात में आपातकाल के इस हीरो के सम्मान में 5 मिनट का Standing Ovation दिया गया था।

  1. प्राकृतिक आपदा: 1998 का कांडला चक्रवात हो या 2000 का अहमदाबाद बाढ़, संकट के उस दौर में नरेंद्र मोदी मदद का दूसरा नाम बन कर उभरे। 2001 कच्छ भूकंप में तो संकटमोचक के रूप में लोगों के दिल में बस गए। आपदा प्रबंधन में ऐसी महारत विरले ही देखने को मिलती है।

  1. गोधरा दंगा: यह एक ऐसा दौर था जब गुजरात दंगों के चपेट मे तो आया लेकिन कुशल नेतृत्व ने उसे गुजरात का आखिरी दंगा बना दिया। दंगों का इतिहास लिखने वाला गुजरात आज शांत है तो इसका श्रेय नरेंद्र मोदी को ही जाता है। मुख्यमंत्री के रूप में शायद पहले व्यक्ति होंगे जिनसे 9 घंटे की लंबी पूछताछ भी की गई लेकिन अपनी साफ सुथरी छवि के साथ इस संकट से भी निखर कर निकले।

  1. 2013 पटना बम ब्लास्ट: 2014 चुनाव के पहले का वो दौर था। नरेंद्र मोदी के पटना रैली के दौरान बम विस्फोट हुआ। भगदड़ और बड़ी तबाही हो सकती थी लेकिन मंच से नमो की सूझबूझ ने इस हादसे को टाल दिया।

  1. सर्जिकल स्ट्राइक: उरी हमले में भारतीय सैनिकों के शहादत के बाद जब पूरा हिंदुस्तान गुस्से मे था, कई छाती के नाप लेने में लगे थे, ठीक उसी समय नमो के एक फैसले ने सबकी बोलती बंद कर दी। सर्जिकल स्ट्राइक का वह फैसला दुश्मनों को करारा जवाब था। देशवासियों का विश्वास और प्यार भी पीएम मोदी के लिए और बढ़ गया।

  1. नोटबंदी: आर्थिक इतिहास का सबसे बड़े फैसले में से एक नोटबंदी ने ना जाने कितने भ्रष्टाचारियों, आतंकियों, अलगाववादियों और नक्सलियों के कमर तोड़ कर रख दिए। यह वो दौर था जब देश एक साथ खड़ा हुआ और इस फैसले को सम्मान दिया।

  1. डोकलाम: चीन अपनी ताकत की नशे में तिब्बत के क्षेत्र डोकलाम में घुस आया था जो भारत के सामरिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण था। उस घड़ी में भारत ने चीन को ना सिर्फ आँख दिखाया बल्कि वापस अपने सीमा में जाने को मजबूर भी किया।

  1. एयर स्ट्राइक: पुलवामा में 40 जवानों की शहादत पर आँसू थमे भी नहीं थे कि भारतीय नेतृत्व ने एयर स्ट्राइक कर बदला लेने का निर्णय किया। नतीजा यह रहा कि PoK में आतंकी कैम्प तबाह हुए और पाक को एक और सबक सिखाने में हम कामयाब रहे।

  1. अभिनंदन की वापसी: सारा देश दुआएँ कर रहा था। क्योंकि भारत का लाल अभिनंदन पाक के चंगुल में फंसे थे। भारत सरकार के कूटनीति का यह एक सफल अध्याय है कि पाक को झुकना पड़ा और अभिनंदन की घर वापसी हुई।

  1. धारा 370 की समाप्ति: नरेंद्र मोदी के समर्थक भी निराश थे क्योंकि भाजपा का सबसे बड़ा वादा 5 साल के शासन में पूरा नहीं हो पाया था। लेकिन यह मोदी-02 का दौर था जिसने ना सिर्फ कश्मीर में आतंक को शांत किया बल्कि धारा 370 हटा कर इतिहास रच दिया।

Ram Madhav tweets pic of young Narendra Modi, says 'promise ...

  1. राम मंदिर: दशकों से देश के सबसे उलझा हुआ मुद्दा यूं शांतिपूर्वक सुलझ जाएगा इसकी उम्मीद तो बिल्कुल नहीं थी। लेकिन ऐसा हुआ और सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले से राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ।
  2. लॉकडाउन: कोरोना जैसे महामारी से निपटने के लिए ऐसा मजबूत फैसला दुनिया के शायद और देश ले पाती तो वहाँ का मृत्यु दर काफी काम होता। लेकिन इस संकट के घड़ी में भी नरेंद्र मोदी ने साबित किया कि वो बेहतरीन Crisis Manager हैं।