विरोधियों के हर व्यूह को भेदते नमो

जब पूरी दुनिया कोरोना से पीडि़त हो तो उसमें किसी देश और सरकार की सफलता इसी पैमाने से ही आंकी जाएगी कि उसने अपने देश को कैसे इस वायरस से महफूज रखा। कोरोना आपदा ने जहां दुनिया के कई विकसित देशों के साधन संपन्न स्वास्थ्य ढांचे की कलई खोल दी वहीं उनसे कहीं बड़ी आबादी और कम संसाधनों वाले भारत का प्रदर्शन बहुत बेहतर रहा। कोरोना का सामना करने में मोदी सरकार के सराहनीय प्रदर्शन के बावजूद कुछ लोग मोदी सरकार पर  हमलावर ही रहे। यह अफसोस की बात है कि जिस मसले पर एकजुटता दिखानी चाहिए थी उस पर भी कुछ लोग  राजनीति करने से बाज नहीं आये।

हर मोर्चे में सधी सियासत का परिचय देती मोदी सरकार

दरअसल पिछले आम चुनाव में जनता द्वारा लगातार दूसरी बार खारिज कर दिए जाने के बाद से तिलमिलाए विपक्षी दलों ने मोदी जी के सत्ता संभालते ही सरकार के निर्णायक राजनीतिक कदमों का विरोध शुरू कर दिया। साल 2019 के लोकसभा चुनाव में ऐतिहासिक जीत के बाद ही मोदी सरकार अपने वादों पर अमल में जुट गई थी। उसने तीन तलाक और अनुच्छेद 370 की समाप्ति के बाद नागरिकता संशोधन कानून यानी सीएए के जरिये देश के राजनीतिक और सामाजिक जीवन को नई दिशा देना आरंभ ही किया था कि विपक्षी खासकर मोदी विरोधियों ने सरकार के खिलाफ दुष्प्रचार शुरू कर दिया। हांलाकि विरोधियों के लाख भड़काने के बाद भी देस की जनता के बीच में मोदी सरकार का विश्वास बरकरार रहा। देश की जनता मोदी जी के साथ खड़ी दिखी और ऐसा इसलिये हुआ क्योकि मोदी और देश की जनता का के बीच एक तरह का गहरा रिस्ता बन गया है इसके साथ साथ जिस तरह से मोदी सरकार ने काम किया है उससे देश की जनता में एक विश्वास कायम हुआ है।

मोदी के राजनीतिक अश्वमेध रथ को रोकना नामुमकिन

मोदी पार्ट -2 में जिस स्पीड से काम कर रही है उसकी स्पीड को अभी तक विपक्ष नही समझ पा रही है। तभी वो अपने ही व्यूह में फंसती जा रही है या यूं ले की मोदी सरकार की हर नीति में देशहित साफ तौर पर दिखता है तभी जनता को कितना भी गुमराह किया जाये लेकिन वो भ्रम में तो आती है लेकिन वो ये भी समझती है कि मोदी जी जो करते है वो ठीक ही होता है। बस इसी लिये जनता और मोदी जी के बीच विश्वास बढ़ता ही जा रहा है। वैसे एक बार इस विश्वास में दरारा डालने के लिए किसान को इस बार हथियार कुच मोदी विरोधियों ने बनाया है लेकिन जिस तरह से नकाब उनसे हट रहा है वैसे वैसे अब किसानों का भ्रम भी टूट रहा है। तभी तो अब 25 संगठन ऐसे सामने आये है जो किसान बिल पर सरकार के साथ खड़े दिख रहे है। तो पंजाब को छोड़ दिया जाये तो समूचे राज्य ज्यादातर नये बिल को सही बता रहे है।जिससे ये साबित होता है कि मोदी सरकार का कदम बिलकुल ठीक है।

जिसके बाद तो यही लगता है कि कोई कितने भी व्यूह रच लें लेकिन हर व्यूह को मोदी नीति भेदने के लिए तैयार है क्योकि मोदी जी के पास जनता का विश्वास है वो भी बहुत अटूट …