नमस्कार का अंगीकार करता विश्व

कोरोना वायरस से लगभग समूची दुनिया परेशान है, हजारों की संख्या में लोग इस वायरस के चलते काल के कपाल में समा गये हैं इस वायरस से बचने के लिए कुछ सावधानियां ही बताई जा रही है। जिसमें सबसे पहले हाथ मिलाने से परहेज बताया जा रहा है। जिसके बाद विश्व के कई देश भारत की संस्कृति को अपनाते हुए दिख रहे हैं।

जिस तरह से योग भारत से निकलकर आज समूचे विश्व में लोगों के रोग दूर कर रहा है। ठीक इसी तरह भारतीय संस्कृति ही आज कोरोना वायरस से बचने के लिये कवच का रूप बन रही है और बता रही है कि हमारी संस्कृति में हाथ मिलाने से ज्यादा क्यों नमस्कार को जरूरी बताया गया था।

नमस्ते को अपनाते नेतान्याहू

दुनियाभर में कोरोनावायरस से मरने वालों की संख्या तीन हजार से ज्यादा हो गई है। इसके खतरे को देखते हुए इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अपने देश के लोगों से अपील की है कि वे अभिवादन करने के लिए हाथ मिलाने की जगह नमस्ते करें। नमस्ते भारत में एक दूसरे को हाथ जोड़कर अभिवादन का परंपरागत तरीका है।नेतन्याहू ने बुधवार को कहा, ‘‘जैसे मैं हाथ मिलाने से बच रहा हूं, आप भी वैसा ही करें। आप नमस्ते करने के भारतीय तरीके को लागू करने की कोशिश कर सकते हैं जिससे इस बीमारी से बचा जा सके।

जर्मनी में बैठक के दौरान मंत्री ने चांसलर एंजेला मर्केल से हाथ मिलाने से किया परहेज

इसके वायरस से बचने के लिए लोग मिलने-जुलने के अलावा हाथ मिलाने तक से कतराने लगे हैं। कुछ ऐसी घटना जर्मन में घटी,जर्मन सरकार की चल रही एक बैठक के दौरान जीहोफर दूसरे अधिकारियों के साथ बैठे थे। तभी चांसलर एंजेला मर्केल पहुंचीं। उन्होंने हाथ मिलाना चाहा, लेकिन जीहोफर ने सिर्फ हैलो कहा। इसके बाद मर्केल समेत सभी हंस पड़े। इस घटना का वीडियो वायरल हो रहा है। मीडिया को बताया गया कि ऐसा कोरोना वायरस के चलते ही किया गया है वैसे जर्मन चांसलर ने पहले से ही लोगों से हाथ मिलाना बंद कर दिया है। यह बचाव के लिए ठीक है। पिछले हफ्ते चांसलर मर्केल ने जब अपने संसदीय क्षेत्र का दौरा किया था, तब उन्होंने भी किसी से हाथ नहीं मिलाया था। चांसलर मर्केल खुद भी वायरस से बचने के लिए अलर्ट रहती हैं। मर्केल ने भी जीहोफर के फैसले को भी सही ठहराया।

लेकिन इन सब के बीच समूची दुनिया नमस्कार को अपनाने में लगा है, जर्मन हो या ब्रिटेन या फिर अमेरिका इसे खूब अपना रहा है। वही इजराइल के पीएम के बयान के बाद तो ये सिध्द हो गया है कि भारतीय संस्कृति से हर तरह के वायरस से निपटा जा सकता है। और विश्व भी इस बात को मान रहा है। वैसे नमस्ते करने से दोनो हाथ जुड़ने से जो ऊर्जा ईकठा होती है उससे नमस्ते करने वाले इंसान की भी शारीरिक शक्ति बढ़ती है। जो कई विद्वानों ने भी माना है। इसलिये अब हाथ मिलना छोड़ो नमस्कार का अंगीकार करो।