लेफ्टिनेंट जनरल मनोज मुकुंद नरवणे होगे अगले सेनाअध्यक्ष, जनरल बिपिन रावत की लेंगे जगह

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लेफ्टिनेंट जनरल मनोज मुकुंद नरवणे थलसेना के अगले प्रमुख होंगे

लेफ्टिनेंट जनरल मनोज मुकुंद नरवणे थलसेना के अगले प्रमुख होंगे। फिलहाल जनरल नरवणे सेना में सह सेना प्रमुख हैं और 31 दिसंबर को मौजूदा सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत से पदभार संभालेंगे। 1 सितंबर 2019 को लेफ्टिनेंट जनरल नरवणे ने भारतीय सेना के उप-थलसेनाध्यक्ष का पदभार ग्रहण किया था। 37 साल सेना में गुजारने वाले जनरल नरवणे के पास आतंकवाद विरोधी अभियान का खासा अनुभव है। सेना के 27वें चीफ बनने वाले जनरल नरवणे करीब ढाई साल तक आर्मी चीफ के पद पर बने रहेंगे। चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ का कार्यकाल 3 साल या 62 वर्ष की उम्र तक होता है। इन दोनों में से जो भी पहले पूरा होता है, उसी समय सेवाएं समाप्त होती हैं।

बता दें कि सरकार ने नियुक्ति में वरिष्ठता के सिद्धांत का पालन किया है। सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत इस पद पर तीन साल रहने के बाद 31 दिसंबर को सेवानिवृत्त होंगे। उन्हें देश का पहला चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ बनाए जाने की उम्मीद है। गौरतलब है कि सरकार तीनों सेनाओं की एकीकृत कमांड के तौर पर चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ की नियुक्ति पर विचार कर रही है। इस फोर स्टार पोजिशन वाले पद का ऐलान अगले कुछ ही दिनों में हो सकता है।

सितंबर में थलसेना उप प्रमुख बनने से पहले नरवणे सेना की पूर्वी कमान का नेतृत्व कर रहे थे जो चीन से लगती भारत की लगभग चार हजार किलोमीटर लंबी सीमा की रखवाली करती है। नरवणे को जून 1980 में सातवीं बटालियन, सिख लाइट इन्फैंट्री रेजीमेंट में कमीशन मिला था।

जनरल रावत के बाद नरवणे सबसे सीनियर अफसरों में से एक हैं। जनरल नरवणे ईमानदार और धीर-गंभीर अफसर हैं। नरवणे ही वे आर्मी कमांडर हैं, जिन्होंने डोकलाम संकट के समय चीन को उसकी हद बताई थी। वे अपनी त्वरित निर्णय क्षमता और कोई भी फैसला लेने से पहले अपने साथियों को सुनने की जबर्दस्त योग्यता के लिए पहचाने जाते हैं।

लेफ्टिनेंट जनरल मनोज मुकुंद नरवणे को सबसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में काम करने का अनुभव है। जम्मू-कश्मीर में अपनी बटालियन के कुशल नेतृत्व के लिए उन्हें विशिष्ट सेना पदक प्रदान किया गया। उत्कृष्ट सेवाओं के लिए उन्हें विशिष्ट सेवा पदक, अति विशिष्ट सेवा पदक और परम विशिष्ट सेवा पदक से भी अलंकृत किया जा चुका है।

 


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