साइकिल की दुकान से प्रोटेम स्पीकर तक सांसद वीरेंद्र कुमार का सफ़र

 BJP MP Virendra Kumar takes oath as the Protem Speaker of the 17th Lok Sabha, at Rashtrapati Bhawan.

आज 17 जून 2019 को 17वीं लोकसभा के पहले सत्र की शुरुवात हुई और नवनिर्वाचित सांसदों को शपथ दिलाया गया| आज सुबह राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सभी सदस्यों को सांसद के रूप में लोकसभा सदस्य पद की शपथ दिलाई तदोपरान्त सांसदों को उनके सम्बंधित पद पर नियुक्त किया गया| इसी क्रम में मध्यप्रदेश के टीकमगढ़ लोकसभा सीट से भाजपा के सांसद डॉक्टर वीरेंद्र कुमार को प्रोटेम स्पीकर बनाया गया है|

डॉक्टर वीरेंद्र कुमार सात बार सांसद रह चुके है| उन्होंने चार बार टीकमगढ़ लोकसभा और तीन बार सागर सीट का प्रतिनिधित्व लोकसभा में किया है| वर्तमान में वह टीकमगढ़ लोकसभा सीट से सांसद चुने गए है|

कौन हैं डॉक्टर वीरेंद्र कुमार?

मध्यप्रदेश के सागर जिले में 27 फरवरी 1954 को वीरेंद्र कुमार का जन्म हुआ था| पहली बार सांसद भी 1996 में सागर संसदीय सीट से ही चुने गए थे| उन्होंने अर्थशास्त्र में एमए और बाल श्रम संबंधी विषय पर पीएचडी की है| कई सालों तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में सक्रिय कार्यकर्ता और पदाधिकारी के तौर पर काम किया है| इसके अलावा इसके अलावा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, विश्व हिंदू परिषद सहित भाजपा में विभिन्न पदों पर रह चुके हैं| मोदी सरकार के पहले कार्यकल में भी उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल किया गया था|

PROTEM SPEAKER OF THE 17TH LOK SABHA

वीरेंद्र कुमार का बचपन काफी मुश्किलों भरा था| ऐसा कहा जाता है कि बचपन में अपने परिवार के भरण पोषण के लिए वीरेंद्र कुमार अपने पिता के साथ साइकिल की दुकान पर काम करते थे| इसके साथ ही वह अपनी पढाई भी किया करते थे| सूत्रों की मानें तो अपने संसदीय क्षेत्र के दौरे के दौरान जब वीरेंद्र कुमार को कोई पंक्चर सुधारता हुआ मिलता है तो वह उसके पास पहुंच जाते हैं। कई बार उनकी मदद कर देते हैं तो कभी पंक्चर सुधारने के टिप्स भी दे देते हैं|

क्या होता है प्रोटेम स्पीकर?

चुनाव के बाद पहले सत्र में स्थायी अध्यक्ष अथवा उपाध्यक्ष का चुनाव होने तक संसद या विधानसभा का संचालन करनेवाला पद प्रोटेम स्पीकर का होता है। सरल शब्दों में कहें, तो कार्यवाहक और अस्थायी अध्यक्ष ही प्रोटेम स्पीकर होते हैं| लोकसभा अथवा विधानसभा में इनका चुनाव बेहद कम समय के लिए होता है| प्रोटेम स्पीकर तब तक अपने पद पर बने रहते हैं, जब तक सदस्य स्थायी अध्यक्ष का चुनाव न कर लें| आमतौर पर सदन के सबसे वरिष्ठ सदस्य को ये जिम्मेदारी सौंपी जाती है|

प्रोटेम स्पीकर की जरूरत सदन में तब पड़ती है जब सदन में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष, दोनों का पद खाली हो जाता है| यह स्थिति तब पैदा हो सकती है, जब अध्यक्ष और उपाध्यक्ष, दोनों की मृत्यु हो जाए अथवा वे अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे दें|