डिफेंस एक्सपो में अब तक हुए 200 से ज्यादा समझौते

उत्तर प्रदेश की धरती के नाम एक और उपलब्धि जुड़ गई है। यहां रक्षा मंत्रालय द्वारा आयोजित 11वां डिफेंस इंडिया एक्सपो-2020 में भारत रक्षा क्षेत्र में निवेश का बड़ा ‘गेट-वे’ बना है।

लखनऊ में 05 से 09 फरवरी तक आयोजित की गई रक्षा प्रदर्शनी डेफ एक्सपो-2020 में सात फरवरी तक देशी विदेशी रक्षा कम्पनियों और सरकारी उपक्रमों व विभागों के बीच 200 से अधिक सहयोग के समझौते सम्पन्न हो चुके हैं। ये सभी समझौते भारतीय रक्षा कंपनियों के लिये नये अवसर लेकर आए है। इन समझौतों का मकसद देश में रक्षा उत्पाीदन के क्षेत्र में सहभागिता को बढ़ाना है।

रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता के मुताबिक ये सहयोग समझौते तकनीक हस्तांतरण, उत्पादों के साझा उत्पादन और सहमतियों के ज्ञापन आदि के हैं। ये समझौते डेफ एक्सपो-2020 के दौरान आयोजित बंधन समारोह के दौरान पेश किये गए। इस तरह ये समझौतों से उजागर हुआ है कि डेफ एक्सपो- 2020 अब तक का सबसे सफल आयोजन रहा है। इन समझौतों से भारत में रक्षा निर्माण को नया आयाम मिलेगा। ये समझौते रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ की मौजूदगी में हुए।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि ये समझौते प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के पांच साल में पांच अरब डालर रक्षा निर्यात का लक्ष्य हासिल करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। जो सहमतियों के ज्ञापन सम्पन्न हुए हैं उनमें से 23 उत्तर प्रदेश सरकार के साथ हुए हैं जिनकी बदौलत उत्तर प्रदेश के रक्षा गलियारे में 50 हजार करोड़ रुपये से अधिक के निवेश होंगे। इस निवेश की बदौलत राज्य में रोजगार के तीन लाख से अधिक मौके पैदा होंगे। समारोह में उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री ने कहा कि राज्य में होने वाले सभी निवेश सुरक्षित हैं। उन्होंने कहा कि निवेश के लिये उत्तर प्रदेश सबसे आकर्षक इलाका बन चुका है। उन्होंने बताया कि हिंदुस्तान एरोनाटिक्स लि. उत्तर प्रदेश सरकार को 19 सीटों वाले डार्नियर विमान की सप्लाई करेगा।

रक्षा सचिव अजय कुमार ने कहा कि मौजूदा डेफएक्सपो कई कामयाबियों के लिये याद किया जाएगा। डीआरडीओ के चेयरमैन डा. सतीश रेड्डी ने कहा कि यह सुनिश्चित करना डीआरडीओ की ड्यूटी है कि रक्षा क्षेत्र में उत्तर प्रदेश फले फूले। इसलिये डीआरडीओ ने उत्तर प्रदेश सरकार के साथ तकनीक साझेदारी का समझौता किया है। इसके लिये राज्य में एक सहयोग कक्ष का गठन किया जा चुका है।

समारोह के दौरान हिदुंस्तान एरोनाटिक्स लि. द्वारा निर्मित तीन टन वजन वाले लाइट यूटिलटी हेलिकॉप्टर को इनीशियल आपरेशनल क्लीयरेंस प्रदान की गई। ये हेलीकाप्टर चीता और चेतक हेलिकॉप्टरों की जगह लेंगे। समारोह में आर्डनेंस फैक्टरी बोर्ड ने 36 किलोमीटर तक गोले फेंकने वाली 155 मिमी. की तोप सारंग की एक प्रति थलसेना को सौंपी।

सेना के बेड़े में शामिल होंगी दस शारंग तोप

अंतरराष्ट्रीय मानक की 155 एमएम कैलिबर शारंग तोप एक्सपो के मंच से आयुध निर्माणी बोर्ड के निदेशक हरिमोहन ने थलसेना अध्यक्ष एमएम नरवने को अधिकृत रूप से हस्तांतरित कर दी। आयुध निर्माणी कानपुर के आयुध विकास केंद्र में डिजाइन की गई यह तोप साठ के दशक से सेना में शामिल 130 एमएम कैलिबर की इजरायली तोप का स्थान लेगी। मेक इन इंडिया के तहत बनी शारंग की दुनिया की बेहतरीन तोप में से एक है, जिसकी मारक क्षमता 37 किलोमीटर तक है। आयुध निर्माणी बोर्ड के पास तीन सौ तोप का ऑर्डर है और दस तोप सेना को सौंपे के लिए तैयार हैं।

मेक इन इंडिया अभियान को मिल रही है गति

एक्सपो के तीसरे दिन ऑर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड के चेयरमैन हरि मोहन ने कहा कि वो निर्यात को बढावा देने की दिशा में प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि हाल के सालों का निर्यात का प्रतिशत काफी बढा है और जल्दी ही हम 1000 करोड़ रुपए के आंकड़े को पार कर जाएंगे।

भारत में इतने बड़े निवेश के साथ रक्षा उत्पादन में तेजी के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मेक इन इंडिया अभियान को भी गति मिलेगी।