100 से अधिक भ्रष्ट और काम न करने वाले अधिकारियों को किया गया रिटायर

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Delhi Lt Governor Anil Baijal

दिल्ली के इतिहास में पहली बार भ्रष्टाचार पर सबसे बड़ा वार हुआ है। भ्रष्टाचार पर अपने कड़े रुख को जारी रखते हुए सरकार ने विभिन्न विभागों के 108 से अधिक अधिकारियों को रिटायर करने का फैसला किया है। भ्रष्टाचार पर नो टॉलरेंस नीति अपनाते हुए सरकारी विभागों में व्यापक सफाई अभियान चला रही है और नाकारा और दागी अफसरों को जबरन रिटायर कर रही है।

गुरुवार को एक बयान में कहा गया है कि दिल्ली सरकार से भ्रष्ट और काम न करने वाले विभिन्न विभागों के 108 से अधिक अधिकारियों को “अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त” किया गया है।

उत्तरी दिल्ली नगर निगम ने (10) और दक्षिण (3) के नगर निगमों के 13 ‘ग्रुप ए’ अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई। तीनों नागरिक निकायों के कुल 61 अधिकारियों को अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त किया गया। उपराज्यपाल अनिल बैजल द्वारा सरकारी अधिकारियों के कामकाज की समीक्षा करने के निर्देश के बाद यह कार्रवाई शुरू हुई। इस मामले में कार्रवाई उपराज्यपाल अनिल बैजल के लिखित पत्र के बाद की गई है। जुलाई में उपराज्यपाल ने तीनों निगमों को पत्र लिखकर भ्रष्ट और काम न करने वाले अधिकारियों की सूची मांगी थी। निगमों की तरफ से सौंपी गई रिपोर्ट के आधार पर यह कार्रवाई की गई है। इनमें कई ऐसे अधिकारी हैं जिनपर काम न करने, भ्रष्टाचार में लिप्त होने के आरोप के अलावा चार्जशीट हुए अधिकारी भी शामिल हैं।

उत्तरी दिल्ली नगर निगम (NDMC) में सबसे अधिक 39 अधिकारी हैं, जो अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त हुए, इसके बाद दक्षिणी दिल्ली नगर निगम (15), दिल्ली विकास प्राधिकरण और सेवा विभाग (14 प्रत्येक), दिल्ली जल बोर्ड और पूर्वी दिल्ली नगर निगम (7 प्रत्येक), दिल्ली परिवहन विभाग (5) और दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (4) शामिल है।

31 अक्टूबर, 2019 तक 108 अधिकारियों को अनिवार्य रूप से एफआर 56 (जे) के तहत प्राप्त शक्तियों के उचित अधिकार द्वारा सार्वजनिक हित में सेवानिवृत्त कर दिया गया है, एलजी की मंजूरी के साथ, दिल्ली सरकार के विभिन्न विभागों के तहत DANICS, DASS, स्टेनो और साथ ही साथ संगठित कैडर के अधिकारियों के मूल्यांकन के लिए समीक्षा समितियों का गठन किया गया था।

समीक्षा समिति दिल्ली सरकार के अधीन विभागों और निकायों के साथ सख्ती से पेश आया। इस कार्रवाई के पहले समय-समय पर मुख्य सचिव और एलजी के स्तर पर भी समीक्षा की गई। आयुक्त वर्षा जोशी ने कहा कि निगम क्षेत्र में रहने वालों और निगम की बेहतरी के लिए यह कार्रवाई की गई है। हालांकि ऐसे मामलों की लगातार शिकायतें मिल रही थी, लेकिन सभी पहलुओं की पुख्ता जांच के बाद ही कार्रवाई की गई है। कार्रवाई नियमानुसार की गई हैं और इसमें कोई जल्दबाजी नहीं की गई है।

सरकार सभी विभागों की कार्यकुशलता बढ़ाने हेतु न सिर्फ भ्रष्टाचारी अधिकारियों पर सख्त है, बल्कि ख़राब प्रदर्शन करने वाले अधिकारी भी सरकार के घेरे में हैं। मूलतः सरकार युवा और सक्षम अधिकारियों को मौका दे कर सरकारी विभागों की कार्यकुशलता बढ़ाने पर ध्यान दे रही है। केंद्रीय सतर्कता आयोग और अन्य निगरानी समिति की मदद से सरकार सभी भ्रष्ट कर्मियों पर पुख्ता नजर रख रही है और उनके प्रदर्शन की नियमित समय पर विवेचना करके आगे का निर्णय ले रही है। नागरिकों के कल्याण के लिए एक मजबूत और भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन सुनिश्चित करने के लिए ये निगरानी हमेशा जारी रखी जाएगी।

 


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