“मोदी का विज़न 2025 – भारत को फाइव ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यस्था बनाना”

Modi's Vision 2025

पिछले कुछ हफ़्तों से चाहे वो निति आयोग की बैठक हो, 2019 का बज़ट, या फिर सदन में पेश आर्थिक समीक्षा; हर जगह देश की इकॉनोमी को 2025 तक पांच ट्रिलियन डॉलर क्लब में शामिल करने की बात हुई। आखिर ये 5 ट्रिलियन डॉलर का असल किस्सा क्या है, आज हम आपको इसका पूरा मामला बताते है।

शनिवार की सुबह बीजेपी के सदस्यता अभियान की शुरुआत के लिए PM मोदी वाराणसी में थे। इस मौके पर भी मोदी के भाषण में भारत की अर्थव्यवस्था शामिल रही। मोदी ने कहा अब देश विकसित होने के लिए ज्यादा इंतज़ार नही कर सकता। PM मोदी ने देश की अर्थव्यवस्था को 2025 तक दोगुना करने यानि 5 ट्रिलियन करने को अपना सपना बताया।

अंग्रेजी की एक कहावत ‘साइज ऑफ द केक मैटर्स’ का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि परिवार की आमदनी जितनी अधिक होगी, उसी अनुपात में सदस्यों की आय भी अधिक होगी। इसीलिए हमने देश की इकॉनोमी को बढ़ाने का लक्ष्य तय किया है।

मोदी ने कहा ‘आज जितने भी विकसित देश हैं, उनमें से ज्यादातर के इतिहास को देखें तो वहां भी एक समय में प्रति व्यक्ति आय बहुत अधिक नहीं होती थी| लेकिन, एक दौर ऐसा आया, जब कुछ ही समय में प्रति व्यक्ति आय ने जबरदस्त छलांग लगाई। यही वह समय था, जब वे देश विकासशील से विकसित की श्रेणी में आ गए। भारत अब लंबा इंतजार नहीं कर सकता। भारत दुनिया का सबसे युवा देश है और यह लक्ष्य भी मुश्किल नहीं है।”

PM मोदी ने कहा कि गरीबी हमारी मानसिक अवस्था बन गयी जिसे हम सबको दूर करने की ज़रुरत है। उन्होंने ये भी कहा की जब किसी देश में प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि होती है तो देश में खरीद की छमता बढती है जिसके वजह से बाज़ार में उसकी मांग बढती है। अब ज़ाहिर सी बात है मांग बढ़ेगी तो उसका उत्पादन भी बढेगा जिससे वजह से सेवा में विस्तार होगा और इसी क्रम में रोजगार के नए अवसर भी बनेंगे।

PM मोदी का इस सपने को पूरा करने के पीछे उनका पक्का विश्वास इसीलिए है क्योंकि आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार पिछले पांच वर्षों में देश की अर्थव्यवस्था में एक लाख करोड़ डॉलर का इजाफा हुआ है, जबकि उसके पहले पिछले 55 सालों में देश की व्यवस्था सिर्फ एक लाख करोड़ डॉलर ही थी। पांच साल पहले भारतीय अर्थव्यवस्था का आकार 1.850 लाख करोड़ डॉलर था, जो अब 2.7 लाख करोड़ डॉलर हो चुका है।

मोदी ने कहा कि इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए हमें ग्रोथ रेट को न केवल बढ़ाना होगा, बल्कि बढ़ी हुई ग्रोथ रेट को बरकरार भी रखना होगा। अगले पांच साल में ग्रोथ रेट को 8 प्रतिशत पहुँचाने का लक्ष्य तय किया गया है जिसके लिए निवेश पर ध्यान देना सबसे ज्यादा ज़रूरी बताया गया है।

सूत्रों के मुताबिक इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए रूपया को डॉलर के मुकाबले मजबूत करना बेहद ज़रूरी है| अगर रूपया डॉलर के मुकाबले कमज़ोर हुआ तो इस लक्ष्य तक पहुँचने में बाधा बन सकता है।

आपको बता दे कि पांच लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य प्राप्त करते ही भारत जर्मनी को पछाड़कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। खैर मोदी ने अपना लक्ष्य तय कर लिया और अपने रास्ते पर आगे बढ़ रहे है। अब देखना यह है की 2025 तक देश की अर्थव्यवस्था कहाँ पहुँचती है।