मोदी की दो दिवसीय बंगाल यात्रा – क्या होगा ख़ास?

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प्रधानमंत्री मोदी की दो दिवसीय पश्चिम बंगाल यात्रा आज से शुरू हो रही है| दो दिनों के इस महत्वपूर्ण बंगाल दौरे में प्रधानमंत्री कई योजनाओं का उद्घाटन करेंगे और कुछ कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे|

प्रधानमंत्री मोदी और ममता दीदी की मुलाकात

बंगाल दौरे पर प्रधानमंत्री मोदी और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की मुलाकात भी होगी| कोलकाता में एक कार्यक्रम के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी और सूबे की सीएम ममता बनर्जी एक मंच पर नजर आ सकते हैं। सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री ममता बनर्जी 12 जनवरी (रविवार) को कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट (केओपीटी) के 150 साल पुरे होने के मौके पर हो रहे कार्यक्रम में शामिल होंगी, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी उपस्थित होंगे।

बता दें कि केओपीटी के 150 साल पूरे होने के मौके पर आयोजित होने वाले कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को आमंत्रित करने के लिए जहाजरानी राज्य मंत्री मनसुख मंडाविया स्वयं शुक्रवार को निजी तौर पर राज्य सचिवालय गए थे। इसके अलावा सूत्रों ने यह भी बताया है कि राजभवन में भी पीएम मोदी और ममता बनर्जी की एक बैठक होगी।

प्रधानमंत्री मोदी के कार्यक्रम

पीएमओ से मिली जानकारी के मुताबिक, आज शनिवार को प्रधानमंत्री मोदी कोलकाता में मरम्मत की गयी चार हेरिटेज इमारतों (पुरानी करेंसी बिल्डिंग, बेल्वेदेरे हाउस, मेटकॉफ हाउस और विक्टोरिया मेमोरियल हाल) को राष्ट्र को समर्पित करेंगे। इन इमारतों की मरम्मत एवं साज सज्जा का काम संस्कृति मंत्रालय द्वारा किया गया है। इसके उपरांत शनिवार एवं रविवार को मोदी कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट के कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट के वर्तमान एवं सेवानिवृत कर्मचारियों के पेंशन फंड मे कमी को पूरा करने के लिए अंतिम निपटारे के तहत प्रधानमंत्री मोदी 501 करोड़ रूपये का चेक भी भेंट करेंगे|

रामकृष्ण मिशन के मुख्यालय बेलूर मठ भी जायेंगे प्रधानमंत्री

शनिवार शाम को बाकि कार्यक्रमों से फुर्सत पाकर प्रधानमन्त्री रामकृष्ण मिशन के मुख्यालय बेलूर मठ भी जायेंगे| उल्लेखनीय है कि अपनी किशोरावस्था में अपने प्रधानमंत्री मोदी विवेकानंद की शिक्षा से प्रभावित होकर रामकृष्ण मिशन के राजकोट स्थित आश्रम में शामिल होने गए थे। जहाँ स्वामी आत्मास्थानंद ने उन्हें सलाह दी थी कि उनका जीवन संन्यास के लिए नहीं है बल्कि उन्हें लोगों के बीच काम करना चाहिए।

2017 में स्वामी आत्मास्थानंद के निधन पर मोदी ने इसे अपनी व्यक्तिगत क्षति बताई थी।


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