मोदी की “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” अभियान ने बढाई लिंग अनुपात में लड़कियों की संख्या

वैसे तो हमारे देश में लड़कियों को देवी का रूप माना जाता है और इनकी पूजा की जाती है| पर अभी भी हमारे समाज में ऐसे लोग है जिनको बेटियां बोझ लगती है, और ऐसे ही लोग अपने घर की बहु-बेटियों पर जुल्म ढाते हैं| शर्मनाक बात ये भी है कि आज भी हमारे देश के कुछ ऐसे हिस्से हैं जहाँ पर गर्भ में पल रहे शिशु की लिंग जाँच कर के गर्भ में लड़की है पता चलने पर गर्भपात करवा दिया जाता है|

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“बेटी बचाओ, बेटी पढाओ” योजना

मोदी सरकार ने ऐसे लोगो के बीच जागरूकता बढ़ाने के लिए कई योजनाओ की शुरुआत की| इन्ही योजनाओ में से एक योजना “बेटी बचाओ, बेटी पढाओ” भी है| इस योजना के तहत PM मोदी की कोशिश रही कि वे लोगो को बेटियों की महत्ता समझा सके और बेटियों को भी समाज में बराबरी का हक़ दिलवा सकें| इस योजना के नतीजे अब देखने को मिल रहे हैं|

2015-2016 में पुरे भारत में हुए लिंग अनुपात के मुकाबले इस साल के लिंग अनुपात में 8 पॉइंट्स की बढ़ोतरी देखने को मिली है| जिनमे केरला और छत्तीसगढ़ इस लिंग अनुपात की संख्या में सबसे आगे है| इन राज्यों में हर 1000 लडको पर लड़कियों की संख्या 959 रही| वहीँ मिजोरम में ये संख्या 958 थी, जबकि गोवा में ये संख्या 954 रही|

Girls Sex Ratio

क्या है लिंग अनुपात?

आसान भाषा में लिंग अनुपात, प्रति हज़ार पुरुषों पर महिलाओं की संख्या को मापने के लिए एक महत्वपूर्ण सामाजिक सूचक है| पुरे देश में लिंग अनुपात की गणना के अनुसार 2015-16 में ये संख्या 923 थी, 2016-17 में यह संख्या 929 थी, जबकि 2017-18 की गणना के मुताबिक ये संख्या 931 पर पहुच गयी|

लोक सभा में “बेटी बचाओ, बेटी पढाओ” योजना पर उठे सवाल का जवाब देते हुए महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के द्वारा ये आंकड़े जारी किये गए|

कौन से राज्य में बढ़ी लिंग अनुपात की संख्या ?

लिंग अनुपात की संख्या में बढ़ोतरी पुरे 25 राज्यों और केंद्र शाषित प्रदेशों में देखने को मिली| जिनमें सबसे ज्यादा बढ़त अंडमान और निकोबार में देखी गयी, जहाँ पिछले गणना के मुकाबले 51 पॉइंट्स की बढ़त हुई यानि की लड़कियों की संख्या 897 से 948 पहुँच गयी है|

दूसरा सबसे ज्यादा बढ़त वाला राज्य सिक्किम रहा जहाँ लड़कियों की संख्या 928 से 948 पर पहुँच गयी| इसके बाद तेलंगाना में भी बढ़त देखने को मिली जहाँ पर ये संख्या 925 से 943 पहुँच गयी| इसके बाद लक्षद्वीप (832 से 891 लड़कियां), नागालैंड (904 से 936 लड़कियां) और उत्तराखंड (906 से 938 लड़कियां) जैसे राज्यों में भी लिंग अनुपात में बढ़ोतरी देखने को मिली|

हरियाणा में जहाँ 2015 में मोदी सरकार द्वारा बेटी बचाओ, बेटी पढाओ योजना की शुरुआत की गयी थी| वहां पर भी लिंग अनुपात में बढ़ोतरी हुई और लड़कियों की संख्या 887 से 914 पहुँच गयी|

मोदी सरकार का बेटी बचाओ, बेटी पढाओ अभियान पिछले पांच साल में लिंग अनुपात में इतनी बढ़त ला सकता है, तो मुमकिन है की अगले कुछ सालों में लडकियों की संख्या लड़कों के बराबर हो जाये|