दिल्ली-मुंबई औद्योगिक गलियारा प्रोजेक्ट, दस हजार करोड़ रुपए निवेश करेंगी कंपनियां

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शायद ऐसा भारत के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ जब किसी पूर्व कार्यकाल वाले सरकार की योजना को किसी सरकार ने इतना महत्व दिया है| जी हाँ, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मनमोहन सरकार की योजनाओं को आगे बढ़ने का जिम्मा उठा रखा है| अमूमन देखा जाता है की बीती हुई सरकार के योजनाओ में या तो घुसखोड़ी होती है या तो वो योजना विफल हो जाती है लेकिन मोदी सरकार में ऐसा बिलकुल नहीं हुआ| 

मनमोहन सरकार की देश के औद्योगिकरण वाला दिल्ली-मुंबई औद्योगिक गलियारे (DMIC) वाला प्रोजेक्ट मोदी सरकार को भी पसंद आया है। यही वजह है मोदी सरकार ने न सिर्फ डीएमआईसी को आगे बढ़ाया बल्कि अब निवेश भी आना शुरू हो गया है। इस औद्योगिक गलियारे में केंद्र सरकार ने 451 एकड़ जमीन कंपनियों को आवंटित कर दी है। कंपनियां यहां 9483 करोड़ रुपए का निवेश करेंगी। कंपनियों की यूनिट लगने से इस कॉरिडोर में रोजगार के नए अवसर खुलेंगे।

चीन और साउथ कोरिया की कंपनियां आई

गुजरात के धालेरा, महाराष्ट्र के शेंद्र बिडकिन, यूपी में ग्रेटर नोएडा के आईआईजीएनएल और मप्र में उज्जैन के पास विक्रम उद्योगपुरी में यह नया निवेश किया गया है। बड़ी कंपनियों में साउथ कोरियन कंपनी ह्यूसंग कार्पोरेशन, चीन की हायर और अमूल को जमीन आवंटित की गई है। डीएमआईसी के अफसरों ने बताया कि कुल 64 प्लॉटस कंपनियों को दिए गए हैं जिसमें कुल जमीन 451 एकड़ है।

1483 किमी लंबा है कॉरिडोर

यूपीए सरकार ने वर्ष 2011 में डीएमआईसी को मंजूरी दी थी। दिल्ली-मुंबई औद्योगिक गलियारा (DMIC) दिल्ली और मुंबई के बीच 1,483 किलोमीटर की कुल लंबाई को कवर करने वाला एक मेगा-इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट है। इसके फेस वन के तहत दिल्ली, उप्र, हरियाणा, राजस्थान, मप्र, गुजरात और महाराष्ट्र में आठ नोड पर नए औद्योगिक शहर विकसित करना है। इसका उद्देश्य दिल्ली-मुंबई रेल फ्रेट कॉरिडोर के साथ विश्व स्तर के औद्योगिक शहरों को विकसित करना है, जो दुनिया में सबसे अच्छा विनिर्माण और निवेश स्थलों के साथ प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं।

4.5 बिलियन डालर की मदद दे रहा है जापान

कुछ लोगो का कहना है की मोदी सरकार विदेश नीतियों में विफल रही है लेकिन ये बिलकुल गलत है| आए दिन विदेशो से करोड़ो रूपये का निवेश आता रहा है, उसी में से एक निवेश ये भी है| आपको बता दें की इस मदद से प्रोजेक्ट से आयात-निर्यात करने वाले व्यापारियों को भारी राहत मिलेगी। क्योंकि बोड़ाकी से हरियाणा,मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात व महाराष्ट्र होते हुए मुंबई के जवाहर लाल नेहरु बंदरगाह तक एक डेडीकेटेड फ्रेट कोरिडोर बनेगा। इस पर सिर्फ हाई स्पीड माल गाड़ी ही चलेंगी। इससे गंतव्यों तक माल पहुंचने में समय कम लगे। करीब 1483 कि.मी. लंबे डीएमआईसी प्रोजेक्ट के लिए डीएमआईसीडीसी की जापानी कंपनियों के साथ हुए समझौत के अनुसार प्रोजेक्ट पर आने वाले खर्चे का 49 फीसदी भारत सरकार और 51 वित्तीय संस्थाएं करेंगी। जापानी बैंक 4.5 बिलियन डालर की मदद कर रहा है। जबकि भारत सरकार आठ शहरों के विकास के लिए 17500 करोड़ रुपए दे रही है। राज्य सरकारों को जमीन की व्यवस्था करनी है। इसके लिए 200 वर्ग किमी में निवेश क्षेत्र और 100 वर्ग किमी औद्योगिक क्षेत्र विकसित हो रही हैं।