इतिहास में पहली बार जलशक्ति मंत्रालय बनाकर मोदी ने किया अपना वादा पूरा

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आज सम्पुर्ण विश्व जल संकट की समस्या से जूझ रहा है| डेढ़ अरब की आबादी वाला देश भारत भी इस से अछूता नहीं है| देश की एक बड़ी जनसँख्या पीने के पानी जैसी बेसिक जरुरत को भी पूरा नहीं कर पा रहा| इस बार के लोकसभा चुनाव के घोषणापत्र में नरेन्द्र मोदी ने देश के नागरिकों को पीने के शुद्ध पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने का वादा किया था| अपने कई भाषणों में मोदी ने प्रमुखता से कहा था कि, “ये देश की जनता का अधिकार है कि उन्हें पीने के लिए स्वच्छ जल उपलब्ध हो”|

जोधपुर के सांसद गजेन्द्र सिंह शेखावत

सरकार बनते ही प्रधान मंत्री मोदी ने एक अलग जलशक्ति मंत्रालय का गठन करके अपने वादे को पूरा करने की दिशा में पहला कदम बढ़ा दिया है| इस मंत्रालय की बागडोर जोधपुर के सांसद गजेन्द्र सिंह शेखावत को सौंपी गयी है| उल्लेखनीय है की शेखावत ने वर्तमान मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत को शिकस्त देकर जोधपुर लोकसभा सीट जीती थी|

जलशक्ति मंत्रालय को “जल संसाधन, नदी विकास और गंगा कायाकल्प मंत्रालय” को पुनर्गठित कर बनाया गया है| पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय को भी इसमें जोड़ा गया है| मोदी के पिछले मंत्रिमंडल में नितिन गडकरी इस मंत्रालय को संभाल रहे थे|

क्या क्या होगा जलशक्ति मंत्रालय के जिम्मे

जलशक्ति मंत्रालय एक अलग एकीकृत मंत्रालय है, इसके जिम्मे निम्नलिखित जिम्मेदारियां होंगी

• देश की जनता को पीने के लिए शुद्धपेयजल मुहैयाकरवाना
• किसानों को सिंचाई के लिए समुचित जल की उपलब्धता सुनिश्चित करना
• नदियों को जोड़ने, नदी मार्ग बनाने और नदियों के इकोसिस्टम को संरक्षित करना
• देशव्यापी जल प्रबंधन

भारत के ज्यादातर राज्य जल संकट से जूझ रहे हैं| महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और तमिलनाडु हर साल पीने के पानी, सुखाड़ और अकाल जैसी परिस्थितियों का सामना करते हैं| इसके अलावा देश में किसानों का एक बड़ा तबका अपने सिंचाई की जरूरतों के लिए सिर्फ मानसून पर निर्भर है|

ऐसे में एक अलग मंत्रालय होने से सुधार कार्यों में गति आएगी और नागरिकों को इसका त्वरित लाभ मिलेगा|