जनता के बीच से ली मोदी जी ने ‘सुशासन’ की प्रेरणा!

साल 2001 तारीख 7 अक्टूबर, यही वो दिन था जब नरेंद्र मोदी ने पहली बार गुजरात के सीएम बने या यूं बोले की उन्होने प्रशासन के क्षेत्र में अपना पहला पैर रखा। इससे पहले मोदी जी बीजेपी के केंद्रीय संगठन महामंत्री की भूमिका में थे जबकि 1971 में संघ के प्रचारक के तौर पर उन्होने सियासत का सफर शुरू किया था।

प्रशासिक अनुभव न होने के बाद भी गुजरात में रचा इतिहास

जिस समय मोदी ने गुजरात सरकार की बागडोर संभाली, उससे पहले उनके पास प्रशासन का कोई अनुभव नहीं था। हां अगर अनुभव था तो समाज जीवन में लोगों को एक-दूसके से जोड़ने का, बस क्या था इसी अनुभव के दम पर उन्होने गुजरात को एक मजबूत राज्य बनाने की नींव रखनी शुरू कर दी जिसकी शुरूआत उन्होने ‘वाइब्रेंट गुजरात’ ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट से की जिसमें 14 बिलियन डॉलर का निवेश गुजरात में आया। इसी तरह बेटियों के लिये कन्या केलवणी योजना और शाला प्रवेशोत्सव प्रोग्राम चलाकर उनके दिन बदले, साथ ही शिशु लिंग अनुपात में कमी को रोकने के लिए गुजरात में बेटी बचाओ अभियान लांच किया जिससे बेटियों की संख्या गुजरात में बढ़ी। टाटा नैनो हो या दूसरी कार कंपनियां सभी ने गुजरात में दिल खोलकर निवेश किया। जिसका असर ये देखा गया कि गुजरात की आर्थिक स्थिति देश के दूसरे राज्यों से अच्छी होती गई। गुजरात में भूकंप के बाद सत्ता संभालने वाले मोदी जी ने विकास का जो खाका खीचा वो पूरे देश में गुजरात मॉडल के नाम से जाना गया। जिसके आधार पर वो दिल्ली की सत्ता पर काबिज होने में सफल रहे।

दिल्ली में दिखी मोदी की एक अलग छवि

साल 2014 में जब वो दिल्ली की सत्ता पर काबिज हुए तो उनके पास प्रशासनिक अनुभव काफी था इस बात का जिक्र खुद मोदी जी भी कई बार कर चुके है लेकिन पीएम बनने के बाद जिस तरह से उन्होने विदेशनीति में झंडा गाढ़े वो अपने आप में किसी चमत्कार से कम नही था। पीएम होते उन्होने भारत की छवि जिस तरह से विदेश में रखी उससे भारत आज एक शक्तिसाली देश के तौर पर जाना जाता है। आजादी के बाद पहली बार ऐसा हुआ है कि हर देश भारत के करीब आना चाहता है और ये छवि बनाने में पीएम मोदी का एक बड़ा रोल रहा ऐसा नही कि पीएम ने सिर्फ विदेशनीति पर ही जोर दिया उन्होने भारत को मजबूत बनाने के लिये आत्मनिर्भर का नारा दिया जिससे देश की आर्थिक स्थिति बेहतर हो सके। मेक इन इंडिया, स्वच्छ भारत मिशन, योग दिवस, जनधन योजना, आयुष्मान योजना, ऐसी कई योजनाए है जिससे नये भारत को बनाने में मोदी जी लगे हुए है। कोरोना काल में भी पीएम मोदी जी की ही कार्यकुशलता के चलते आज सबसे ज्यादा आबादी होने वाला देश होने के बाद भी भारत दूसरे देश की जगह अच्छी स्थिति में है। सही वक्त पर लॉकडाउन लगाने के चलते ही देश में दूसरे देशों से कम मौते भारत में हुई।

सत्ता में रहते मोदी जी ने ये दिखा दिया कि जनता के दुख को दूर करने के लिए किसी प्रशासनिक अनुभव की जरूरत नही बस जनता के दुख को अपना दुख बना लो, अपने आप सेवा करने का अनुभव आपको हो जायेगा। जो मोदी जी पिछले 20 साल से करने में जुटे हुए है।

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