गांधी के सपनों को पूरा कर रहे मोदी

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मन की बात हो या फिर CII का कार्यक्रम कोरोना संकट से उबरने के साथ-साथ आत्मनिर्भर भारत बनाने की जो कवायद पीएम मोदी ने शुरू की है। उसे मूर्त रूप कैसे दिया जायेगा इसका खका दोनो जगहों पर रखा। लेकिन सबसे बड़ी बात ये है कि पीएम ने गांव को आत्मनिर्भर बनाने के लिये दोनों जगाहों पर विशेष जोर देने का आवाहन किया।

 

भविष्य में भारत के गांव होंगे आत्मनिर्भर

इसमे कोई भी दो राय नही है कि कोरोना के चलते अगर सबसे ज्यादा बुरी अवस्था से कोई गुजर रहा है, तो वो है देश का गरीब, खुद पीएम मोदी ने भी इस बात को कहते हुए बोला है कि देश के गरीब की पीड़ा को शब्दों में बयां नही किया जा सकता है। इसके साथ-साथ उन्होंने लॉकडाउन लगाते हुए भी इस वर्ग से हाथ जोड़कर माफी मांग ली थी, कि लॉकडाउन के वक्त इस वर्ग को दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन ये भी सच है कि मोदी सरकार ने जितना इस दौरान इन लोगों की सहायता की उतना आजादी के बाद किसी भी सरकार ने किसी भी आपदा के वक्त नही की होगी। इसी क्रम में गांवों को आत्मनिर्भर बनाने का भी काम मोदी सरकार ने शुरू कर दिया है। जिसके तहत सबसे पहले किसानों की फसल का दाम 50 से 80 फीसदी तक बढ़ाने का ऐलान कैबिनेट मीटिंग में कर दिया गया है। तो महापैकेज में किसानों और गांव में रहने वालों के लिये विशेष फंड का ऐलान किया गया है। बड़ी बात ये है कि इस आर्थिक पैकेज में गांव में रह रहे लोग छोटे और लघु उघोग के जरिये खुद सबल होंगे ही साथ में रोजगार भी देने लायक बनेंगे।

गांव में ही रोजगार के खुलेंगे द्वार

भारत में गांवों से शहरों की ओर रोजगार के लिए पलायन एक बड़ा मुद्दा रहा है, किंतु ज्यादातर राज्यों में इस पर कभी ठोस मंथन कर स्थायी निदान करने की कोशिश नहीं हुई। केंद्र ने भी एक गड्ढ़े का माटी उधर डालो और दूसरे से उसे भर दो जैसे रोजगार कार्यक्रम पैदा किए। लेकिन इसपर भी घोटालों का आवरण चढ़ने लगा ऐसे में गांव की सूरत बदलने के लिये कोई ठोस योजना की जरूरत थी जो गांधी के उस सपनो को पूरा कर सके जिसे वो आजादी के वक्त देखते थे। शायद जिस तरह से मोदी सरकार ने इस बार विपदा के वक्त पैकेज की घोषणा की है वो उसी रूप में है, क्योंकि ये सहायता आने वाले दिनों में देश और छोटे छोटे गांव को नये कलेवर में रंगते हुए दिखेगी। इसलिए आर्थिक पैकेज में 40 हजार करोड़ की रकम अलग से रखी गई है, ताकि लौट कर आए श्रमिकों को काम मिले और वे अपने परिवार का भरण पोषण कर सकें। इसीलिये सरकार ने इसबार सीधे खाते में पैसा डालने के लिये कुछ करके पैसा कमाने पर बल दिया है। जो नये भारत की शुरूआत करेगा।

मोदी सरकार देश के कामगारों की ताकत को बहुत अच्छी तरह से समझती है, तभी तो वो ये जानती है कि ये देश की वो कौम है, जो फोकट का खाने में यकीन नही रखती है, तभी सरकार ने ऐसे महापैकेज के जरिये किसानों, मजदूरों को भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिये बस सहयोग देने का काम किया है, क्योंकि वो अच्छी तरह जानते हैं कि ये वो लोग है जो बंजर जमीन से अन्न का निवाला निकाल देते हैं। तो फिर उत्पादन में भारत को नबंर वन क्यों नही बना सकते हैं।


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