पूर्वी भारत 60 सालों से जिस विकास के लिये तरस रहा था वहा उम्मीद बने मोदी

देश का पूर्वी छोर जो आजादी के 60 साल बाद भी विकास की रह ताक रहा था और तरस रहा था कि वो भी 21वीं सदी से जुड़ सकें। लेकिन अब उनका ये सपना मोदी सरकार के वक्त पूरा होता हुआ दिख रहा है।

आजकल एक खबर आप खूब न्यूज चैनल मे सुनते होगे  कि देश मे पहली बार ये हुआ तो वो हुआ मसलन  इस तरह की खबरे जैसे हर गांव तक बिजली पहुंचाई गई। देश मे हर गांव को सड़को से जोड़ा गया। नदियों पर पहली बार बड़े बड़े पुल बनाये जा रहे है। बैंकों को घर घर पहुंचाने का काम हुआ तो कई जगह पर पहली बार रेल पहुंची। मतलब विकास की नई गाथा लेखी जा रही है. सबसे बड़ी बात ये है कि विकास की ये गाथा उन दूर भारत के पूर्वी राज्यों मे भी लिखी जा रही है। जहां सूरज तो सबसे पहले उगता है लेकिन विकास अधेरे मे ही डूबा रहता था। आज वहां भी विकास की गंगा बह रही है। इसी क्रम मे सिक्किम भी अब देश के उन राज्यों मे शामिल हो गया है जिनके पास खुद का हवाई अड्ड़ा है। गंगटोक से 33 किमी दूर स्थित है पाकयोंग ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट. 600 करोड़ रुपये की लागत से बना है

देश का 100वां वर्किंग एयरपोर्ट

सिक्किम की राजधानी गंगटोक के ऊंचे पहाड़ी इलाके में बने इस ग्रीनफील्‍ड एयरपोर्ट को हाल ही में सिविल एविएशन विभाग की ओर से कॉमर्शियल उड़ानों की परमीशन मिली है. यह एयरपोर्ट चीन बॉर्डर से सिर्फ 60 किमी दूर है. यहां से उड़ने वाले एयरफोर्स विमानों को चीन सीमा तक पहुंचने में कुछ ही मिनट का समय लगेगा. यह एयरपोर्ट देश का 100वां वर्किंग एयरपोर्ट होगा. हाल ही में भारतीय वायुसेना का एक डोर्नियर 228 इस हवाई अड्डे पर ट्रायल के तौर पर उतारा गया था. इसके अलावा यात्री विमानों की टेस्टिंग के तौर पर स्‍पाइसजेट पहले ही यहां ड्राई रन कर चुकी है। इसके साथ इसे उड़ान योजना से भी जोड़ा गया है जिसके चलते एक घंटे का सफर सिर्फ 25 सौ रूपये मे किया जा सकेगा।

यही नही इसके साथ साथ पूर्वी भारत मे नदियों मे नये पुल बनाये जा रहे है। तो पहली बार मेघालय त्रिपुरा मिजोरम रेल के मेप मे आये तो सिक्किम भी जल्द ही रेल मार्ग से जुडने वाला है। वही सड़को को भी विश्व स्तर का बनाया गया है। जिससे दिखता है कि किस तरह से विकास के लिये मोहताज पूर्वी भारत अब विकास की गंगा मे गोता लगा रहा है। इससे साफ होता है कि पीएम जिस तरह से कहते है कि सबका साथ सबका विकास उसे वो पूरा भी कर रहे है। और उन इलाको पर खासा ध्यान दे रहे है जो आजादी के बाद विकास के लिये तरस रहे थे।