मोदी सरकार के कुशल शासन से पड़ा है पाला , संकट के इस दौर में कालाबाजारी पर लगा है ताला

मोदी सरकार के कुशल शासन से पड़ा है पाला , संकट के इस दौर में कालाबाजारी पर लगा है ताला 

कोरोना संकट के चलते देश में 30 दिनों से तालाबंदी है, लेकिन इस बीच देश के किसी भी जगह से कालाबजारी या अधिक मुनाफाखोरी करने के मामले सामने नही आये हैं, जिससे ये पता चलता है कि मोदी सरकार किस तरह से देश के कोने कोने में हर चीज पर पैनी नजर रखे हुए है।  

मोदी सरकार ने खूब कसी नकेल  

30 दिन से भारत में लॉकडाउन चल रहा है, लेकिन इस बीच सबसे बड़ी बात ये है कि आम लोगों तक खाने-पीने का सामान आराम से मिल ही नहीं रहा है, बल्कि उसके दामों में भी कोई ज्यादा बढ़ोत्तरी नही हुई है। सरकार की कुशल नीति का ही असर है जो खुदरा महंगाई के ऑकड़े आये हैं वो भी राहत देने वाले हैं सबसे बड़ी बात ये है कि अधिक मुनाफाखोरी के लिये गोदामो में सामान छुपाया नही जा रहा है। सरकार की सख्ती का ही नतीजा है, संकट के इस दौर में भी दामो में आग नही लगी है।  मोदी सरकार के कुशल नेतृत्व का ये सबसे बेहतर नमूना है ऐसा नमूना पहले नोटबंदी के वक्त भी देखा गया था जिसमे भी न महंगाई बढ़ी थी और न ही आम लोगों को  सामान खरीदने को लेकर कोई खास परेशानी उठानी पड़ी थी। 

 

संकट के वक्त पुरानी सरकारों में होती थी हालत खराब  

मोदी सरकार को छोड़ दे और इतिहास में जाएं तो आजादी के बाद जब जब देश पर कोई संकट आया सबसे पहले देश में मुनाफाखोरी और कालाबजारी खूब तेजी से बढ़ी उदाहरण के तौर पर 1962 के भारत चीन युध्द के दौरान देश में कंबल और खाने- पीने की चीज को लेकर खूब कालाबजारी देखी गई। खाने पीने की चीजों के दाम आम आदमी की पहुंच से दूर हो गये। इसी तरह 1971 के पाक युध्द में तो हद ही हो गई थी और अनाज  को खूब स्टॉक किया गया था, आपातकाल की बात करें तो आम लोगों को महंगाई ने खूब रुलाया था आलम ये हो गया था कि महंगाई के नाम पर कई दिग्गजों की सत्ता चली गई। 

अब बात ज्यादा पीछे कि नही बल्कि 2012 की करते हैं मंहगाई का आलम ये था, कि इसको लेकर न जाने कितनी फिल्मे बन गई, तो गाने भी रचे गये। मतलब साफ है कि कुछ खास लोगो को फायदा पहुंचाने के लिये सरकार ने सभी नियम ताक में रख दिये जिसका असर ये हुआ कि देश में मंहगाई चरम पर पहुंच गई। लेकिन आज ऐसा नही है, मोदी सरकार की रणननीति का ही असर है कि देश के भंडारन पूरी तरह से भरे हैं  तो आम लोगों तक खाने का समान भी सरलता से पहुंच रहा है। तभी तो कोरोना संकट से निपटने के लिये 93 फीसदी से ज्यादा लोग मोदी जी पर विश्वास कर रहे हैं। तो दूसरी तरफ मोदी जी अपने देश के मजदूर किसान और कारोबारियों पर विश्वास कर रहे हैं, कि देशहित के लिये सभी एक साथ चलेंगे यही वजह है कि इतने संकट में भी देश नये मुकाम छू रहा है जिसकी गूंज सारे संसार में सुनाई दे रही है।